शिक्षित हिन्दुओं ! भारत के धार्मिक पाखण्डों का सर्वनाश करो ..!
अपेक्षा तो यह थी कि उच्च शिक्षित हिन्दू होने के नाते आप धार्मिक पाखण्डों को तार-तार करते। परन्तु ,आपने स्वयं तो देर से जागना, कमोड को वापरना, नीम-बबूल और मंजन त्याग कर टूथपेस्ट करना, गरमागरम पानी से स्नान करना, सूर्य को जल चढ़ाना और मन्दिर जाना त्याग दिया..
अपेक्षा तो यह थी कि उच्च शिक्षित हिन्दू होने के नाते आप धार्मिक पाखण्डों को तार-तार करते। परन्तु, आपने स्वयं तो देर से जागना, कमोड को वापरना, नीम-बबूल और मंजन त्याग कर टूथपेस्ट करना, गरमागरम पानी से स्नान करना, सूर्य को जल चढ़ाना और मन्दिर जाना त्याग दिया, जूते पहनकर खड़े-खड़े मित्रों से बहस करते हुए जीरो फैट के भोजन का आनन्द उठा रहे हो और करोड़ों हिन्दू आज भी उस अनुपम आनन्द और सुखों से वंचित हैं।
वीरो..! उठाओ विज्ञान की तीक्ष्ण तलवार और पूरे साहस के साथ हिन्दुओं के सड़े-गले पाखण्डों को खण्ड-खण्ड कर विज्ञान का अखण्ड साम्राज्य पूरे भारत में स्थापित कर दो। अरे ! आपके साथ तो इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन नाम की तोप भी है, जिससे बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्णजी को धराशायी कर दिया था..।
उठाओ तलवार और इंग्लैंड के सेम्युअल जोंस तथा प्रोफेसर माइक विडान का सिर काट दो जिन्होंने सात लाख लोगों पर अध्ययन कर आनुवांशिक वेरिएंट और जीनोम के आधार पर यह बताया था कि देर से जागने वालों को पागलपन, रुग्ण मानसिकता, मोटापा, मधुमेह और अवसाद की सम्भावना अधिक रहती है। ब्रह्ममुहूर्त पर जागने के पक्ष में तो लगभग सौ से ज्यादा वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिक आधार पर कुछ-कुछ ऐसी ही बकवास की है, उनको भी मत छोड़ना।
वैज्ञानिक टगर्ट, रेडियोलाजिस्ट डॉ. सईद राद, अमेरिका के प्रोक्टोलाजिस्ट डॉ.माइकेल फ्रेलिच, इजरायली शोधकर्ता डॉ. डोव सिकिरोव, अमेरिकी पेट और आंत रोग विशेषज्ञ डॉ. एम.के.रिज्क, डॉ.डेनिस बरकिट और डॉ.विलियम विल्स का भी गला काट दो जिन्होंने भारतीय शौच पद्धति को अनेक रोगों और कैंसर तक से बचाने वाला निरूपित किया।
ब्रिटिश डेंटल जर्नल और जर्नल फ्रंटियर्स इन सेल्युलर एण्ड इन्फेक्शन माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार माउथवाश में विद्यमान रसायन उन मित्र जीवाणुओं को मार डालते हैं, जो रक्तचाप को नियंत्रित करते हैं I इसका अर्थ यही है कि टूथपेस्ट हमारे मुंह के 99% से ज्यादा मित्र और शत्रु सूक्ष्मजीवों को मार देते हैं। मित्र जीवाणु हमारे शरीर के नाइट्रेट (NO3-) को नाइट्राइट (NO2-) और बाद में नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) में बदलने में सहायता करते हैं। नाइट्रिक ऑक्साइड की कमी से रक्तचाप बढ़ सकता है और प्री डायबिटिक लक्षण आ सकते हैं। ऐसे शोध करने वाले वैज्ञानिकों और उन शोधों को प्रकाशित करने वाली पत्रिकाओं के सम्पादकों को फांसी दे दीजिए। इसी तरह बबूल और नीम की दातून को लेकर एक क्लिनिकल स्टडी 'जर्नल ऑफ क्लिनिकल डायग्नोसिस एंड रिसर्च' में छपी और बताया गया कि स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटेंस की वृद्धि रोकने में ये दोनों अत्यधिक प्रभावी हैं। इससे जुड़े लोगों को भी मत छोड़िएगा।
देखिए ना ! थ्रोम्बोसिस रिसर्च सेण्टर, इंग्लैण्ड ने ठण्डे पानी से स्नान पर शोध कर उसके बेशुमार लाभ बता दिए हैं, इस संस्थान को नेस्तनाबूद करने के लिए तोप दाग दीजिए क्योंकि उनका यह कृत्य माघ और कार्तिक माह की ठण्ड में सुबह साढ़े चार बजे नहाने वाले करोड़ों हिन्दुओं के पाखण्ड का समर्थन करता है।
एक दुष्ट वैज्ञानिक ने 2002 में बहुत बड़ी गुस्ताखी करते हुए मनुष्यों के रेटिना में विशेष तरह की कोशिकाएं Intrinsically Photosensitive Retinal Ganglion Cells खोज डाली और बोल दिया कि ये कोशिकाएं सूर्योदय के 30 से 45 मिनट में सक्रिय होती हैं और सूर्योदय के समय सूर्य दर्शन करने वाले व्यक्ति के मनोशारीरिक स्वास्थ्य के लिए अच्छी सिद्ध होती है, दिनभर के उनींदी से दूर करता है और रात की सुखद नींद सुनिश्चित करता है। आप तो बस, एक काम करो, ब्राउन विश्वविद्यालय के डॉ. डेविड बर्सन और साथियों को तोप से उड़ा दीजिए।
हाउ गॉड चेंजेज योर ब्रेन नामक पुस्तक लिखने वाले न्यूरोसाइंटिस्ट चिकित्सक डॉ. एन्ड्रू न्यूबर्ग और उसके साथीयों को भी मत छोड़ना उसके कारण बहुत सारे लोग भगवान में विश्वास कर सुबह शाम मन्दिर जाने लगे हैं।
आपके जीरो फैट के अभियान को पलीता लगाने वाले फंक्शनल मेडिसिन के विश्व भर के विशेषज्ञों पर तो सर्जिकल स्ट्राइक कर दीजिए, ये हरामी लो कार्बोहाइड्रेट और हाई फैट जैसी भ्रांतियां फैला रहे हैं।
शिवजी ने मुझे निमित्त बनाकर एक पुस्तक लिखवाई है, भारतीय ज्ञान परम्परा और समग्र स्वास्थ्य, 370 पृष्ठों की इस पुस्तक को मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी ने प्रकाशित किया है, मात्र 270 रुपयों की है, 15% डिस्काउंट पर उपलब्ध है, वेबसाइट पर जाइए और ऑर्डर कीजिये, क्योंकि उसमें ऐसी अनेक बातें हैं।
जवानी में एक कहानी सुनी थी। एक प्रेमिका के कहने पर प्रेमी अपनी मां का सिर काटकर उसे भेंट करता है तो वह उसे लताड़ कर भगा देती है कि जो अपनी मां का न हुआ वो मेरा क्या होगा। आपसे निवेदन है कि भारत माता और सनातन परम्पराओं के सम्मान को मत त्यागिये। आपके पास विज्ञान है, विज्ञान बुद्धि है,आर्टिफिशियल बुद्धिमत्ता भी है, गूगल क्रोम तो आपकी उँगलियों पर नाचता है। एक क्लिक करते ही भारतीय ज्ञान परम्पराओं की वैज्ञानिकता आपकी आँखों के सामने होगी I आप अपनी माता के सम्मान में उसकी ज्ञान परम्पराओं को ससम्मान प्रतिष्ठित कीजिए अन्यथा आपकी संतानें जब भारतीय ज्ञान परम्पराओं की वैज्ञानिकता के विषय में ऑक्सफ़ोर्ड या केम्ब्रिज विश्वविद्यालय की पुस्तकों में पढेंगे तो आपकी कृतघ्नता पर क्रोधित होंगे।
माता का सम्मान कीजिए, भारत माता की विज्ञान के दीपक से आरती कीजिये।
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