नेशनल हेराल्ड मामला: दस्तावेजों की कमी के कारण कोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी को नोटिस जारी करने से इनकार किया
प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अभी और दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे और कमियों को दूर करना होगा, यह कहते हुए दिल्ली की एक अदालत ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य को नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया है..
नयी दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अभी और दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे और कमियों को दूर करना होगा, यह कहते हुए दिल्ली की एक अदालत ने नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य को नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया है।
प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत में यह दलील दी थी कि कानून के तहत प्रॉसिक्यूशन शिकायत (चार्जशीट) पर संज्ञान लेने से पहले आरोपियों को सुना जाना जरूरी है, इसलिए अदालत को गांधी परिवार और अन्य को नोटिस जारी करना चाहिए। यह जानकारी Bar and Bench की रिपोर्ट में दी गई है।
हालांकि, राउज़ एवेन्यू कोर्ट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC एक्ट) के तहत मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि नोटिस जारी करने से पहले अदालत को पूरी तरह संतुष्ट होना होगा। उन्होंने कहा, "मैं संतुष्ट हुए बिना ऐसा आदेश पारित नहीं कर सकता।" अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 मई को निर्धारित की गई है।
क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?
यह मामला कांग्रेस पार्टी द्वारा ₹90 करोड़ का ऋण एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को देने और फिर उस ऋण के बदले AJL के स्वामित्व को प्राइवेट कंपनी यंग इंडियन को महज ₹50 लाख में हस्तांतरित किए जाने से जुड़ा है। आरोप है कि इस लेनदेन के जरिए ₹2,000 करोड़ से अधिक की संपत्तियों के गबन की साजिश रची गई।
ED की चार्जशीट में क्या है?
15 अप्रैल 2025 को दायर इस अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) में ED ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा और अन्य को आरोपी बनाया है।
चार्जशीट के अनुसार:
- 2017 की आयकर जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए ED ने कहा है कि AICC (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी), AJL और यंग इंडियन के अधिकारी एक आपराधिक साजिश का हिस्सा थे, जिसका मकसद AJL की संपत्तियों पर अवैध रूप से कब्जा करना था।
- AJL के 99% शेयर केवल ₹50 लाख में यंग इंडियन को ट्रांसफर किए गए।
- सोनिया और राहुल गांधी यंग इंडियन में 38%–38% हिस्सेदारी रखते हैं, बाकी शेयर मोतिलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस (अब दिवंगत) के पास थे, जिन्हें ED ने गांधी परिवार के करीबी बताया है।
- AICC द्वारा AJL को दिया गया ₹90.21 करोड़ का ऋण, बाद में ₹9.02 करोड़ मूल्य के इक्विटी शेयरों में बदल दिया गया, जिन्हें यंग इंडियन ने औने-पौने दाम पर हासिल कर लिया।
ED का यह भी कहना है कि..
- यंग इंडियन को कंपनी अधिनियम की धारा 25 के तहत "गैर-लाभकारी संस्था" बताया गया था, लेकिन संस्था ने कोई भी चैरिटेबल/जनकल्याणकारी कार्य नहीं किया।
- इसी आयकर रिपोर्ट के आधार पर यह आरोप भी लगाया गया है कि यंग इंडियन ने ₹414 करोड़ से अधिक टैक्स की चोरी की, क्योंकि उसने गैरकानूनी तरीके से AJL की संपत्तियां हासिल कीं।
मामले की पृष्ठभूमि
- यह मामला मूल रूप से भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर एक शिकायत से शुरू हुआ था, जिसे जून 2014 में दिल्ली की अदालत ने स्वीकार किया था।
- इसके बाद 2021 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले की औपचारिक जांच शुरू की।
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