ट्रंप की नयी व्यापार नीति लागू, पहली वैश्विक टैरिफ़ की किस्त प्रभावी
शनिवार, 5 अप्रेल को अमेरिकी समयानुसार रात 12:01 बजे, अमेरिकी सीमा शुल्क अधिकारियों ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित 10% के “बेसलाइन” टैरिफ की वसूली शुरू कर दी। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका की व्यापार नीति में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
वॉशिंगटन। शनिवार, 5 अप्रेल को अमेरिकी समयानुसार रात 12:01 बजे, अमेरिकी सीमा शुल्क अधिकारियों ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित 10% के “बेसलाइन” टैरिफ की वसूली शुरू कर दी। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अमेरिका की व्यापार नीति में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। 9 अप्रैल से, 11% से 50% के बीच के और कड़े शुल्क 57 देशों से आयातित वस्तुओं पर लागू होंगे—जिनमें अमेरिका के करीबी साझेदार जैसे ब्रिटेन, जापान और यूरोपीय संघ भी शामिल हैं।
ट्रंप की यह नीति वैश्विक बाजारों और राजधानियों में हलचल मचा रही है।
वैश्विक प्रतिक्रिया: बाजार में गिरावट और चीन का जवाब
ट्रंप की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में गिरावट देखी गई। S&P 500 कंपनियों से $5 ट्रिलियन की पूंजी सिर्फ दो दिन में साफ हो गई। तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतें गिर गईं, और निवेशकों ने सरकारी बांड की ओर रुख किया।
चीन पर 34% का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जिससे कुल अमेरिकी टैरिफ 54% तक पहुंच गया। इसके जवाब में चीन ने 10 अप्रैल से अमेरिकी निर्यात पर 34% शुल्क लगाने की घोषणा की है। साथ ही, चीन दुर्लभ खनिजों (rare earth metals) के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है।
ट्रंप का जवाब तीखा था, "चीन ने गलत दांव खेला है। उनके पास यह करने की क्षमता नहीं है।"
छूट सीमित, लेकिन जोखिम व्यापक
इन टैरिफ के बीच कुछ वस्तुओं को अस्थायी छूट दी गई है, जैसे:
- कच्चा तेल और ऊर्जा आयात
- सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स, कॉपर, टाइटेनियम, लंबर और यूरेनियम
हालांकि, इनमें से कई क्षेत्रों की समीक्षा “राष्ट्रीय सुरक्षा टैरिफ” के तहत की जा रही है।
स्टील, एल्यूमीनियम, कारें और उनके पुर्जों पर पहले से 25% का अलग टैरिफ लागू है, और वे इस बार के दायरे में नहीं आए हैं। कनाडा और मेक्सिको को नई टैरिफ नीति से बाहर रखा गया है, लेकिन वे अब भी 25% शुल्क के अधीन हैं यदि उनके माल USMCA समझौते के अनुरूप नहीं हैं।
वियतनाम, जो पहले चीन से हटते अमेरिकी सप्लाई चेन का लाभ उठा रहा था, अब 46% शुल्क के निशाने पर है। हालांकि ट्रंप के बयान के बाद हनोई बातचीत के लिए तैयार हो गया है।
कोई ग्रेस पीरियड नहीं, राहत सीमित
ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कोलंबिया, अर्जेंटीना, मिस्र और सऊदी अरब जैसे देश तुरंत इस नीति का प्रभाव झेलने वाले पहले देश हैं। जो सामान 6 अप्रैल से पहले शिप हो चुके थे, उन्हें राहत के लिए 27 मई, सुबह 12:01 बजे तक अमेरिकी सीमा पर पहुंचना होगा, वरना उन पर भी 10% टैरिफ लग जाएगा। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स का अनुमान है कि ट्रंप की नई नीति के चलते अमेरिका का औसत टैरिफ रेट 24% तक पहुंच सकता है, जो महामंदी (Great Depression) के दौरान की दरों से भी अधिक है।
यूरोप और एशिया में प्रतिशोध की तैयारी
चीन के बाद, यूरोप और जापान भी जवाबी कदम उठा सकते हैं। यूरोपीय संघ के वाणिज्य आयुक्त मारोस शेफचोविक ने कहा, "हम शांत, सुव्यवस्थित और एकजुट प्रतिक्रिया देंगे, लेकिन चुप नहीं बैठेंगे।" फ्रांस और जर्मनी ने अमेरिकी टेक कंपनियों पर टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा है।
जापान के प्रधानमंत्री ने संयम बरतने की अपील की है, हालांकि 24% टैरिफ उन पर भी लागू हुआ है।
ऑटो उद्योग पर असर
Stellantis (Jeep की मूल कंपनी) ने कनाडा और मेक्सिको में अपने कुछ संयंत्रों में उत्पादन रोक दिया है।
क्या हम पुराने ट्रेड वॉर में लौट रहे हैं?
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