तमिलनाडु में मंदिर में दीप जलाने के आदेश से कैसे भड़का राजनीतिक तूफ़ान: ‘वेद आपकी रक्षा करेंगे’

मदुरै बेंच, मद्रास हाई कोर्ट में 2014 में असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल के रूप में नियुक्ति के बाद से न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन जो वर्तमान में मद्रास हाई कोर्ट के जज हैं, अपने भाषणों और फैसलों में हिंदू धार्मिक दक्षिणपंथ के प्रति झुकाव के आरोपों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। इस राजनीतिक झुकाव को लेकर अक्सर विवाद खड़े होते रहे..

तमिलनाडु में मंदिर में दीप जलाने के आदेश से कैसे भड़का राजनीतिक तूफ़ान: ‘वेद आपकी रक्षा करेंगे’
11-12-2025 - 10:27 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

चेन्नई। मदुरै बेंच, मद्रास हाई कोर्ट में 2014 में असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल के रूप में नियुक्ति के बाद से न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन जो वर्तमान में मद्रास हाई कोर्ट के जज हैं, अपने भाषणों और फैसलों में हिंदू धार्मिक दक्षिणपंथ के प्रति झुकाव के आरोपों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। इस राजनीतिक झुकाव को लेकर अक्सर विवाद खड़े होते रहे हैं।

थिरुप्परंकुंद्रम मंदिर में दीप जलाने का विवाद

3 दिसंबर (काठीगई दीपम पर्व) को थिरुप्परंकुंद्रम पहाड़ी स्थित सुब्रमण्य स्वामी मंदिर में दीप जलाने को लेकर बड़ा विवाद छिड़ गया। न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने एक फैसले में हिंदू मक्कल कच्ची के सदस्यों को हजरत सुल्तान सिकंदर बादशाह दरगाह के पास बने दीपथून” (दीप स्तंभ) पर दीया जलाने की अनुमति दी—यह शब्द खुद जज ने गढ़ा था।

इस फैसले ने राजनीतिक हलचल मचा दी, और INDIA गठबंधन ने न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के महाभियोग की मांग तेज कर दी।

तमिलनाडु चुनाव से पहले बढ़ी राजनीति

तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ छह महीने बचे हैं। भाजपा—AIADMK गठबंधन पूरी ताकत से DMK को रोकने की कोशिश में है। वहीं DMK भाजपा पर राज्य में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने का आरोप लगा रही है।

DMK और वामपंथी दलों ने न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के फैसले पर सवाल उठाते हुए उनकी निष्पक्षता को चुनौती दी है।

जज के राजनीतिक संबंधों के आरोप

रिपोर्ट्स के अनुसार..

  • 2014: न्यायमूर्ति स्वामीनाथन भाजपा के एक कार्यक्रम में ASG के रूप में शामिल हुए थे।
  • 2015: वे हिंदू मुन्नानी से जुड़े रहे।
  • उन पर RSS से संबंध के आरोप भी लगे हैं।
  • 2022 में उन्होंने तत्कालीन राज्य भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई की खुलकर प्रशंसा की।

इसके बाद डेमोक्रेटिक एडवोकेट एसोसिएशन (DAA) के एक वकील ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर स्वामीनाथन के इस्तीफे की मांग की, यह कहते हुए कि वे राजनीतिक दल के समर्थन में बयान दे रहे हैं।

उन्होंने एक बार अदालत में कहा था कि यदि राम की अनुपस्थिति में उनकी मूर्ति रखी जा सकती है तो वर्चुअल उपस्थिति से विवाह पंजीकृत क्यों नहीं हो सकता?”
वकीलों ने सवाल किया कि विवाह के वर्चुअल पंजीकरण के तर्क में धर्म को क्यों शामिल किया गया।

मंदिर प्रशासन विवाद और वेदों पर टिप्पणी

पुराने मामलों में..

  • वरिष्ठ भाजपा नेता एच. राजा द्वारा चलाई जा रही हिंदू मंदिर पुनः प्राप्ति आंदोलन में जज की राय उससे मिलती-जुलती रही।
  • मई 2022 में जज ने कहा था कि हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ विभाग (HR&CE) मंदिर ट्रस्ट को रथोत्सव रोकने से नहीं रोक सकता।
  • कुछ महीने पहले उन्होंने एक वेद-पंडित मित्र को गलत होने के बावजूद बचाने का किस्सा सुनाया और कहा: यदि आप वेदों की रक्षा करेंगे, तो वेद भी आपकी रक्षा करेंगे।”

DAA ने ऐसी कई घटनाओं को सूचीबद्ध कर कहा कि जज का झुकाव स्पष्ट है। मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व जज के. चंद्रु ने भी हाल में कहा कि न्यायमूर्ति स्वामीनाथन RSS के प्रचार सचिव की तरह व्यवहार करते हैं।”

मंदिर–दरगाह विवाद ने लिया खतरनाक मोड़

थिरुप्परंकुंद्रम मंदिर विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। भाजपा नेता, खासकर एच. राजा, इसे अयोध्या मुद्दे से जोड़ते हुए बयान दे रहे हैं।

ASI के अनुसार जिस दीपथून  की बात हो रही है, वह सदियों पुराना क्षेत्र-चिह्न है—कोई धार्मिक संरचना नहीं। लेकिन दक्षिणपंथी संगठनों का दावा है कि दरगाह वाले इस स्तंभ पर “मंदिर का ध्वज” फहरा रहे हैं।

DMK की आशंका

सत्तारूढ़ DMK और उसके सहयोगियों को आशंका है कि जज और दक्षिणपंथी समूह मिलकर राज्य में ध्रुवीकरण की जमीन तैयार कर रहे हैं ताकि चुनाव में राजनीतिक लाभ लिया जा सके।

वे मानते हैं कि यह विवाद चुनावी मौसम में साम्प्रदायिक राजनीति को हवा देने का प्रयास हो सकता है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।