हाईकोर्ट और राज्यपाल के आदेशों के अनुपालन न होने पर वरिष्ठ नागरिक ने उठाए सवाल, केंद्र से हस्तक्षेप की मांग

मध्यप्रदेश शासन द्वारा न्यायालय और राज्यपाल के आदेशों का पालन न किये जाने को लेकर एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। डॉ. मनोहर भंडारी नाम के सत्तर वर्षीय वरिष्ठ नागरिक ने प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, केंद्रीय कानून मंत्री, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर न्याय न मिलने की पीड़ा व्यक्त की..

हाईकोर्ट और राज्यपाल के आदेशों के अनुपालन न होने पर वरिष्ठ नागरिक ने उठाए सवाल, केंद्र से हस्तक्षेप की मांग
01-01-2026 - 11:26 AM
01-01-2026 - 11:39 AM

भोपाल/नयी दिल्ली। मध्यप्रदेश शासन द्वारा न्यायालय और राज्यपाल के आदेशों का पालन न किये जाने को लेकर एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। डॉ. मनोहर भंडारी नाम के सत्तर वर्षीय वरिष्ठ नागरिक ने प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, केंद्रीय कानून मंत्री, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर न्याय न मिलने की पीड़ा व्यक्त की है।

डॉ. भंडारी ने अपने पत्र में कहा है कि माननीय उच्च न्यायालय आज के समय का “धर्मक्षेत्र–कुरुक्षेत्र” है, जहां नागरिक अन्याय के खिलाफ न्याय की उम्मीद करता है। उन्होंने बताया कि उनके एक मामले में हाईकोर्ट ने 29 अगस्त 2025 को उनके पक्ष में आदेश पारित करते हुए मध्यप्रदेश शासन को तीन माह के भीतर अनुपालन के निर्देश दिए थे। हालांकि, चार माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक उस आदेश का पालन नहीं किया गया है, जो न्यायिक गरिमा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने एक अन्य प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें ग्रेड पे योजना का लाभ सितंबर 2015 से मिलना चाहिए था। 31 दिसंबर 2020 को सेवानिवृत्त होने के बावजूद, लगातार प्रयासों के बाद भी उन्हें यह वैधानिक लाभ नहीं मिला। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन और प्रथम अपील असफल रहने के बाद द्वितीय अपील में उन्हें राहत मिली। 10 जनवरी 2023 को राज्यपाल के नाम से आदेश जारी कर ग्रेड पे का लाभ देने के निर्देश दिए गए लेकिन आज तक उस आदेश का भी अनुपालन नहीं किया गया।

डॉ. भंडारी ने आरोप लगाया कि यह स्थिति चिकित्सा शिक्षा विभाग की हठधर्मिता को दर्शाती है, जहां संवैधानिक पदों द्वारा पारित आदेशों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे आम नागरिकों में यह धारणा बनती जा रही है कि न्यायालयों से जीतने के बाद भी उन्हें निराशा और अपमान का सामना करना पड़ता है।

डॉ. भंडारी का कहना है कि वर्तमान परिदृश्य में अन्याय जीवन के प्रत्येक चरण में व्याप्त है। अधिकांश नागरिक इसे नियति मानकर मौन सहन करते रहते हैं। विरले ही ऐसे लोग होते हैं जो सभी प्रशासनिक प्रयासों की विफलता के पश्चात सूचना का अधिकार अधिनियम का सहारा लेने और अंततः उच्च न्यायालय की शरण में जाने का साहस कर पाते हैं।

उन्होंने दिन्यूजठिकानाडॉटकॉम से बातचीत में कहा कि अन्याय के इस अथाह महासागर में कभी-कभी कोई सजग नागरिक ऐसा भी होता है, जो बहाव के साथ बहने के बजाय अन्याय के विरुद्ध खड़ा होने का साहस करता है..हाथ-पैर मारता है, संघर्ष करता है और आरटीआई अथवा उच्च न्यायालय के माध्यम से न्याय प्राप्त भी कर लेता है। परंतु इससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक तथ्य यह है कि राज्यपाल के आदेश से जारी निर्णयों अथवा उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों का भी पालन नहीं किया जाता। यह स्थिति केवल प्रशासनिक शिथिलता नहीं, बल्कि संवैधानिक शासन की आत्मा पर गहरा प्रहार है।

उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय के निर्णय और संवैधानिक प्राधिकारियों के आदेश भी काग़ज़ों तक सीमित रह जाएँ, तो यह मानने में कोई संकोच नहीं रह जाता कि मध्यप्रदेश की शासकीय व्यवस्था वर्तमान में गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा कि मैं स्वयं इसका प्रत्यक्ष साक्षी हूँ। लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व ग्रेड-पे के गंभीर विषय पर मैंने केन्द्रीय कानून मंत्री श्री अर्जुन जी मेघवाल से दूरभाष पर विस्तृत चर्चा की थी। उन्होंने पूरे धैर्य से विषय सुना, संबंधित दस्तावेज़ माँगे, जिन्हें तत्क्षण उपलब्ध भी कराया गया—परंतु परिणाम शून्य रहा। ढाक के तीन पात आज भी जस के तस हैं।

भंडारी ने कहा, यह मौन, यह उदासीनता और यह अनुपालन-विहीनता केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में आम नागरिक के विश्वास के क्षरण का जीवंत प्रमाण है।

उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने पत्र में केंद्र सरकार से मांग की है कि यदि राज्य स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेप संभव नहीं है, तो उच्च न्यायालय और राज्यपाल द्वारा पारित आदेशों की अवमानना के मामलों में केंद्र सरकार स्वयं नागरिकों के हित में आवश्यक विधिक कार्रवाई शुरू करे।

पत्र के अंत में डॉ. भंडारी ने आशा व्यक्त की कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने और नागरिकों का न्याय प्रणाली पर विश्वास कायम रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।