भारत–रूस ने अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर मिलकर काम करने का संकल्प लिया
भारत और रूस ने शुक्रवार को बाह्य अंतरिक्ष (Outer Space) के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने मानव अंतरिक्ष उड़ान (Human Spaceflight), सैटेलाइट नेविगेशन, ग्रहों की खोज (Planetary Exploration) और अंतरिक्ष से जुड़े दीर्घकालिक कार्यक्रमों पर साझेदारी बढ़ाने का फैसला किया। साथ ही, दोनों ने संयुक्त रूप से रॉकेट इंजन विकसित करने और अंतरिक्ष की दीर्घकालिक स्थिरता (Long-term Sustainability) सुनिश्चित करने..
नयी दिल्ली। भारत और रूस ने शुक्रवार को बाह्य अंतरिक्ष (Outer Space) के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने मानव अंतरिक्ष उड़ान (Human Spaceflight), सैटेलाइट नेविगेशन, ग्रहों की खोज (Planetary Exploration) और अंतरिक्ष से जुड़े दीर्घकालिक कार्यक्रमों पर साझेदारी बढ़ाने का फैसला किया। साथ ही, दोनों ने संयुक्त रूप से रॉकेट इंजन विकसित करने और अंतरिक्ष की दीर्घकालिक स्थिरता (Long-term Sustainability) सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती रोकने पर जोर
संयुक्त बयान में भारत और रूस ने अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती रोकने के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी वैश्विक समझौते की “तत्काल आवश्यकता” बताई।
बयान में कहा गया कि इस समझौते का आधार ‘Outer Space में हथियारों की तैनाती और अंतरिक्षीय वस्तुओं के विरुद्ध बल प्रयोग रोकने’ संबंधी प्रस्तावित संधि तथा 2024 में अपनाई गई सरकारी विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट हो सकती है।
भारत—रूस: दशकों पुराना अंतरिक्ष सहयोग
भारत और रूस का अंतरिक्ष सहयोग कई दशकों से बेहद घनिष्ठ रहा है।
- गगनयान मिशन के लिए भारतीय अंतरिक्षयात्री डिजाइनट्स को बेसिक अंतरिक्ष प्रशिक्षण रूस में ही मिला।
- रूस ने गगनयान के लिए जीवन-समर्थन प्रणाली (Life Support System), क्रू सीट और फ्लाइट सूट जैसी महत्वपूर्ण प्रणालियों में भी सहयोग दिया।
क्रायोजेनिक इंजन में रूस का बड़ा योगदान
भारत के भारी प्रक्षेपण यानों (Heavy Launch Vehicles) के विकास में भी रूस ने अहम भूमिका निभाई।
- GSLV के शुरुआती संस्करण रूसी क्रायोजेनिक इंजनों पर आधारित थे, जिसके बाद भारत ने अपनी स्वदेशी क्रायोजेनिक तकनीक विकसित की।
चंद्रयान-2 से लेकर अन्य ग्रहों तक—अनुसंधान मिशनों में साझेदारी
भारत और रूस ने कई हाई-प्रोफाइल मिशनों में साझेदारी की है।
- चंद्रयान-2 के लिए शुरू में रूस ही लैंडर और रोवर बना रहा था, लेकिन अपने फोबोस (Phobos) सैम्पल-रिटर्न मिशन की असफलता के बाद उसने हाथ खींच लिया। इसके बाद भारत ने लैंडर और रोवर पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित किए।
आने वाले दशक में बड़ा सहयोग—अंतरिक्ष स्टेशन व चंद्र मिशन
यह साझेदारी ऐसे समय में बढ़ाई जा रही है जब भारत आने वाले वर्षों में बड़े अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है,,
- 2035 तक भारत का अपना स्पेस स्टेशन स्थापित करने की योजना।
- 2040 तक मानव को चंद्रमा पर भेजने का लक्ष्य।
- साथ ही पहली शुक्र ग्रह मिशन (Venus Mission) पर भी काम जारी है।
अंतरिक्ष की स्थिरता: ISRO की नई प्राथमिकता
ISRO अब अंतरिक्ष में बढ़ती भीड़ और ‘स्पेस डेब्रिस’ के खतरे को देखते हुए स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है।
- हाल के मिशनों में पर्याप्त ईंधन रखा जा रहा है ताकि उनकी जीवनावधि पूरी होने पर उन्हें सुरक्षित ढंग से डी-ऑर्बिट किया जा सके।
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