‘भारत पाकिस्तान की तरह ब्रोकर देश नहीं बन सकता’: जयशंकर ने मध्यस्थता की अटकलों को किया खारिज

केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि भारत अंतरराष्ट्रीय विवादों में खुद को “मध्यस्थ” या “ब्रोकर” के रूप में पेश नहीं करेगा। यह बयान ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की सक्रिय कूटनीतिक कोशिशों को लेकर उठ रही चर्चाओं के बीच..

‘भारत पाकिस्तान की तरह ब्रोकर देश नहीं बन सकता’: जयशंकर ने मध्यस्थता की अटकलों को किया खारिज
26-03-2026 - 02:50 PM

नयी दिल्ली। केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि भारत अंतरराष्ट्रीय विवादों में खुद को “मध्यस्थ” या “ब्रोकर” के रूप में पेश नहीं करेगा। यह बयान ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की सक्रिय कूटनीतिक कोशिशों को लेकर उठ रही चर्चाओं के बीच आया है।

भारत ने ‘ब्रोकर’ भूमिका से किया इनकार

सर्वदलीय बैठक में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत की नीति विवादों में हस्तक्षेप करने की नहीं, बल्कि समाधान को प्रोत्साहित करने की है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत के दौरान इस संघर्ष के व्यापक प्रभावों का मुद्दा उठाया और जल्द समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि इसका असर सभी पक्षों पर पड़ रहा है।

इतिहास का हवाला, आलोचना नहीं

जयशंकर ने संदर्भ देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने ऐतिहासिक रूप से खुद को वैश्विक मामलों में मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश की है। उन्होंने 1971 में अमेरिका-चीन के बीच संवाद स्थापित कराने और 1981 में वॉशिंगटन-तेहरान के बीच संपर्क में उसकी भूमिका का उल्लेख किया। सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी वर्तमान में पाकिस्तान की आलोचना के लिए नहीं, बल्कि ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य देने के लिए थी।

यह सर्वदलीय बैठक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई, जिसमें अमित शाह, निर्मला सीतारमण और हरदीप सिंह पुरी समेत कई वरिष्ठ मंत्री और विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए।

ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक स्थिति पर जोर

घरेलू मोर्चे पर सरकार ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद ऊर्जा सुरक्षा में सुधार का दावा किया। अधिकारियों ने एलपीजी उत्पादन में वृद्धि और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से कई जहाजों के सुरक्षित गुजरने की जानकारी दी, साथ ही आने वाले दिनों में और जहाजों के पार होने की उम्मीद जताई।

चुप्पी’ के आरोपों का जवाब

विपक्ष द्वारा भारत की कथित चुप्पी पर सवाल उठाने पर जयशंकर ने कहा कि सरकार कई स्तरों पर सक्रिय रूप से कूटनीतिक प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन, जिसकी वर्तमान अध्यक्षता युगांडा के पास है, ने इस मुद्दे पर कोई बयान जारी नहीं किया है, जबकि ब्रिक्स देशों के बीच इस संकट को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं।

पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता

दूसरी ओर, पाकिस्तान अपनी भूमिका को लेकर सक्रिय नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने घोषणा की है कि यदि दोनों पक्ष सहमत हों, तो उनका देश वॉशिंगटन और तेहरान के बीच वार्ता की मेजबानी करने को तैयार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की के साथ मिलकर पर्दे के पीछे तनाव कम करने के प्रयासों में जुटा है।

शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी संपर्क कर संयम बरतने की अपील की। वहीं, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शरीफ के बयान को साझा कर इन प्रयासों को अप्रत्यक्ष रूप से मान्यता दी।

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान का सुरक्षा तंत्र अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष संवाद में भूमिका निभा रहा है, जहां विदेश मंत्री इशाक डार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में हैं। हालांकि ईरान ने प्रस्ताव प्राप्त होने की पुष्टि की है, लेकिन अभी तक औपचारिक वार्ता के लिए सहमति नहीं दी है।

इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि भारत जहां संतुलित और स्वतंत्र कूटनीतिक रुख अपनाए हुए है, वहीं पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिशों में लगा हुआ है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।