ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद पहली बार होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत पहुंचा कच्चे तेल का जहाज, मुंबई पोर्ट पर लगा टैंकर
ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद पहली बार होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत के लिए कच्चा तेल लेकर आया एक जहाज सुरक्षित रूप से मुंबई बंदरगाह पहुंच गया है। लाइबेरिया के झंडे वाला टैंकर Shenlong Suezmax, जिसकी कमान एक भारतीय कप्तान के हाथ में थी, दो दिन पहले जलडमरूमध्य पार कर बुधवार को मुंबई पोर्ट..
मुंबई। ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद पहली बार होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत के लिए कच्चा तेल लेकर आया एक जहाज सुरक्षित रूप से मुंबई बंदरगाह पहुंच गया है। लाइबेरिया के झंडे वाला टैंकर Shenlong Suezmax, जिसकी कमान एक भारतीय कप्तान के हाथ में थी, दो दिन पहले जलडमरूमध्य पार कर बुधवार को मुंबई पोर्ट पर पहुंचा।
यह जहाज सऊदी अरब के रस तनूरा पोर्ट से 1 मार्च को कच्चा तेल लादकर रवाना हुआ था और 3 मार्च को अपनी यात्रा पर निकला। समुद्री डाटा कंपनियों Lloyd’s List Intelligence और TankerTrackers के अनुसार 8 मार्च को इसकी आखिरी लोकेशन होर्मुज जलडमरूमध्य के भीतर दर्ज की गई थी।
दरअसल, ईरान ने कई व्यापारी जहाजों पर हमले किए हैं और चेतावनी दी है कि चीन को छोड़कर अन्य देशों के लिए तेल ले जाने वाले जहाजों को इस मार्ग से गुजरने नहीं दिया जाएगा। दुनिया के कुल कच्चे तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है, इसलिए यहां से समुद्री यातायात लगभग ठप हो गया था।
मुंबई की ओर बढ़ते समय जहाज कुछ समय के लिए “डार्क” हो गया था, यानी उसने अपने AIS (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) ट्रांसपोंडर बंद कर दिए थे, ताकि खतरनाक क्षेत्र से गुजरते समय उसकी लोकेशन का पता न चल सके। बाद में 9 मार्च को वह फिर से ट्रैकिंग डाटाबेस में दिखाई दिया।
बंदरगाह अधिकारियों के अनुसार जहाज बुधवार को दोपहर 1 बजे मुंबई पोर्ट पहुंचा और शाम 6 बजकर 6 मिनट पर उसे जेटी से बांध दिया गया।
मुंबई पोर्ट अथॉरिटी के डिप्टी कंजरवेटर प्रवीण सिंह ने बताया कि “Shenlong जहाज में 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल है। इसे जवाहर द्वीप टर्मिनल पर खड़ा किया गया है और तेल उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।” यह कच्चा तेल पूर्वी मुंबई के माहुल स्थित रिफाइनरियों में भेजा जाएगा।
यह जहाज Shenlong Shipping Ltd का स्वामित्व है और इसका संचालन एथेंस स्थित Dynacom Tanker Management Ltd द्वारा किया जाता है। जहाज पर कुल 29 चालक दल के सदस्य हैं, जिनमें भारतीय, पाकिस्तानी और फिलिपींस के नाविक शामिल हैं। जहाज के कप्तान सुखशांत सिंह संधू हैं और तेल उतारने में लगभग 36 घंटे लगेंगे।
इस टैंकर के सुरक्षित पहुंचने से भारत में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पैदा हुई चिंताओं को कुछ राहत मिल सकती है क्योंकि भारत के कच्चे तेल और गैस की आधी से अधिक आपूर्ति इसी जलडमरूमध्य से होकर आती है।
हालांकि युद्ध शुरू होने के बाद भी 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज अभी भी होर्मुज क्षेत्र या उसके आसपास मौजूद हैं। भारत के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग के अनुसार इनमें से कुछ जहाज सुरक्षित क्षेत्रों की ओर बढ़ चुके हैं।
रिपोर्ट के अनुसार Desh Mahima, Desh Abhiman, Swarna Kamal, Vishva Prerna, Jag Viraat, Jag Lokesh और LNGC Aseem जैसे सात जहाज हाल के दिनों में अरब सागर की ओर निकल गए हैं, जबकि Jag Lakshya जहाज अंगोला की ओर रवाना हो गया है।
स्थिति को देखते हुए कई जहाजों ने सुरक्षित निकलने के लिए अपने AIS ट्रांसपोंडर बंद कर दिए या “चीनी पहचान” का उपयोग किया, क्योंकि क्षेत्र में सिग्नल जामिंग और स्पूफिंग की घटनाएं बढ़ गई हैं।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार फिलहाल भारत सरकार की ओर से भारतीय जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने पर कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं है, लेकिन जहाजों को वहां जाने से पहले खतरे का आकलन करने और पूरी सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
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