भारत को हिंद महासागर में दूसरा खनिज अन्वेषण अनुबंध: क्या है यह, क्यों है अहम
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्राधिकरण (ISA) के साथ एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पिछले सप्ताह भारत ने हिंद महासागर के कार्ल्सबर्ग रिज में पॉलीमेटैलिक सल्फाइड्स (PMS) के अन्वेषण के लिए विशेष अधिकारों वाला अनुबंध ..
नयी दिल्ली। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्राधिकरण (ISA) के साथ एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पिछले सप्ताह भारत ने हिंद महासागर के कार्ल्सबर्ग रिज में पॉलीमेटैलिक सल्फाइड्स (PMS) के अन्वेषण के लिए विशेष अधिकारों वाला अनुबंध किया।
इस अनुबंध के साथ भारत दुनिया का पहला देश बन गया है जिसके पास ISA के साथ PMS अन्वेषण के दो अनुबंध हैं। भारत अब अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में PMS अन्वेषण के लिए सबसे बड़े क्षेत्र का अधिकार रखता है।
गोवा स्थित नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (NCPOR) वर्ष 2026 से अन्वेषण कार्य शुरू करेगा। इसमें सबसे पहले भू-भौतिकीय और जल-मानचित्रण सर्वे किए जाएंगे।
PMS क्या है और भारत के लिए क्यों जरूरी?
- पॉलीमेटैलिक सल्फाइड्स समुद्र तल पर पाए जाने वाले खनिज भंडार हैं। इनमें तांबा, जस्ता, सीसा, सोना, चांदी और कई दुर्लभ धातुएं मौजूद होती हैं।
- भारत के पास इन धातुओं के स्थलीय संसाधन सीमित हैं। PMS से जुड़ी खोजें भारत की संसाधन सुरक्षा को मजबूत कर सकती हैं।
- ये धातुएं हाई-टेक उद्योगों, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी के लिए बेहद अहम हैं।
भारत का पिछला अनुभव
भारत ने 2016 में ISA से पहला PMS अनुबंध हासिल किया था। तब से NCPOR ने मध्य और दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर में कई खोजी सर्वे किए।
सरकार की डीप ओशन मिशन और समुद्रयान परियोजना जैसी पहल ने गहरे समुद्र में अन्वेषण की क्षमता बढ़ाई है।
कार्ल्सबर्ग रिज का महत्व
- यह हिंद महासागर की एक प्रमुख मिड-ओशन रिज प्रणाली है, जहां समुद्री प्लेटें फैल रही हैं।
- यहां हाइड्रोथर्मल वेंट सिस्टम मौजूद हैं, जो PMS के प्रमुख स्रोत माने जाते हैं।
- रणनीतिक दृष्टि से यह भारत के नजदीक (करीब 2 डिग्री उत्तर अक्षांश) स्थित है।
अन्वेषण की चुनौतियां
- PMS की खोज अन्य समुद्री खनिजों की तुलना में कठिन है।
- ये खनिज समुद्र तल के जटिल, कठोर और असमान चट्टानी इलाकों में 2,000–5,000 मीटर गहराई पर पाए जाते हैं।
- इसके लिए अत्याधुनिक सर्वे जहाज, स्वचालित अंडरवॉटर वाहन (AUV), रिमोट ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) और बहु-विषयक विशेषज्ञ टीम की आवश्यकता होती है।
ISA साइट कैसे आवंटित करता है?
ISA, जो कि संयुक्त राष्ट्र समुद्री क़ानून (UNCLOS) के तहत काम करता है, सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में खनिज अन्वेषण के लिए क्षेत्र आवंटित करता है।
इसके लिए विस्तृत वर्क प्लान, पर्यावरणीय अध्ययन और तकनीकी/वित्तीय क्षमता का मूल्यांकन होता है।
आगे की राह
भारत अब हिंद महासागर में और अधिक क्षेत्र हासिल करने की कोशिश कर रहा है। विशेष रूप से, भारत की नजर कोबाल्ट-समृद्ध फेरोमैंगनीज क्रस्ट पर है जो अफनासी-निकितिन सी-माउंट, मध्य हिंद महासागर में स्थित है। इस पर भारत ने आवेदन कर दिया है।
यह उपलब्धि न सिर्फ भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता को दर्शाती है बल्कि हिंद महासागर में उसकी रणनीतिक उपस्थिति और संसाधन सुरक्षा को भी मजबूत करती है।
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