ईरानी युद्धपोत IRIS Dena के संकट संदेश के बाद भारतीय नौसेना ने शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन
भारतीय नौसेना ने गुरुवार को बताया कि ईरान के डूब चुके युद्धपोत IRIS Dena से मिले संकट संदेश (डिस्ट्रेस कॉल) के बाद खोज और बचाव अभियान (Search and Rescue) शुरू किया गया है। इसके लिए भारतीय नौसेना ने विमान और नौसैनिक जहाजों को तैनात..
नयी दिल्ली। भारतीय नौसेना ने गुरुवार को बताया कि ईरान के डूब चुके युद्धपोत IRIS Dena से मिले संकट संदेश (डिस्ट्रेस कॉल) के बाद खोज और बचाव अभियान (Search and Rescue) शुरू किया गया है। इसके लिए भारतीय नौसेना ने विमान और नौसैनिक जहाजों को तैनात किया है।
नौसेना के आधिकारिक बयान के अनुसार यह अभियान Sri Lanka के दक्षिणी तट के पास चलाया जा रहा है।
4 मार्च को मिला था संकट संदेश
नौसेना के अनुसार संकट संदेश 4 मार्च की सुबह Maritime Rescue Coordination Centre Colombo को प्राप्त हुआ था।
बताया गया कि जहाज Galle से लगभग 20 नॉटिकल मील पश्चिम में संचालित हो रहा था, जो श्रीलंका के सर्च एंड रेस्क्यू क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
नौसेना के बयान में कहा गया, “04 मार्च 2026 की सुबह MRCC कोलंबो को IRIS Dena से संकट संदेश मिला। जहाज गाले से 20 नॉटिकल मील पश्चिम में श्रीलंका की जिम्मेदारी वाले सर्च एंड रेस्क्यू क्षेत्र में था। सूचना मिलते ही भारतीय नौसेना ने खोज अभियान शुरू कर दिया।”
भारतीय नौसेना ने तुरंत भेजे विमान और जहाज
जानकारी मिलने के बाद Indian Navy ने तुरंत सहायता अभियान शुरू किया।
- 4 मार्च सुबह करीब 10 बजे एक लॉन्ग-रेंज समुद्री गश्ती विमान को खोज अभियान में शामिल किया गया।
- एक अन्य विमान, जिसमें एयर-ड्रॉपेबल लाइफ राफ्ट लगे थे, उसे आपात स्थिति के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया।
इसके अलावा नौसेना का प्रशिक्षण पोत INS Tarangini, जो पास के क्षेत्र में मौजूद था, उसे भी बचाव कार्य में लगाया गया। यह जहाज 4 मार्च को लगभग शाम 4 बजे खोज क्षेत्र में पहुंच गया।
कोच्चि से भेजा गया INS Ikshak
भारतीय नौसेना ने बचाव अभियान को और मजबूत करने के लिए INS Ikshak को Kochi से रवाना किया।
यह जहाज अभी भी क्षेत्र में मौजूद है और लापता नाविकों की तलाश में मदद कर रहा है। भारतीय नौसेना और श्रीलंका की एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय बना हुआ है।
पहले ही शुरू हो चुका था श्रीलंका का बचाव अभियान
जब तक INS Tarangini खोज क्षेत्र में पहुंचा, तब तक Sri Lankan Navy और अन्य एजेंसियां वहां पहले से ही सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर चुकी थीं।
अमेरिकी हमले में डूबा था ईरानी युद्धपोत
यह रेस्क्यू मिशन उस घटना के बाद शुरू हुआ जब ईरान का फ्रिगेट IRIS Dena इस सप्ताह हिंद महासागर में डूब गया।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार जहाज पर United States Navy की एक पनडुब्बी से मार्क-48 टॉरपीडो से हमला किया गया था। यह टॉरपीडो जहाज के नीचे विस्फोट कर शक्तिशाली गैस बुलबुला बनाता है, जिससे जहाज का ढांचा टूट जाता है और वह तेजी से डूब जाता है।
बताया जा रहा है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने युद्ध में टॉरपीडो से दुश्मन के जहाज को डुबोया है।
कई नाविक बचाए गए, कई अभी भी लापता
Sri Lankan Navy के अनुसार Galle के पास समुद्र से 32 ईरानी नाविकों को बचाया गया, जबकि कई अन्य अभी भी लापता हैं।
माना जा रहा है कि इस युद्धपोत पर लगभग 180 नाविक सवार थे।
ईरान ने हमले की कड़ी निंदा की
Seyed Abbas Araghchi ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना चेतावनी हमला करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि यह घटना ईरान के तट से लगभग 2000 मील दूर हुई और अमेरिका को इसके परिणामों का “कड़वा पछतावा” होगा।
व्यस्त समुद्री मार्ग के पास हुई घटना
यह घटना उत्तरी हिंद महासागर के उस क्षेत्र में हुई जो मध्य पूर्व और एशिया को जोड़ने वाले दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।
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