आबकारी नीति मामले में केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ से केस ट्रांसफर करने की मांग
अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर केस को न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की बेंच से किसी दूसरी पीठ को ट्रांसफर करने की मांग की..
नयी दिल्ली। अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर केस को न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की बेंच से किसी दूसरी पीठ को ट्रांसफर करने की मांग की है।
यह पत्र आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल, वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और इस मामले के अन्य आरोपियों की ओर से लिखा गया है। इसमें कहा गया है कि मामले की सुनवाई एक निष्पक्ष पीठ के सामने होनी चाहिए ताकि न्याय प्रक्रिया में जनता का भरोसा बना रहे।
सुप्रीम कोर्ट से पलटे गए आदेशों का हवाला
पत्र में यह भी कहा गया है कि आबकारी नीति से जुड़े इसी मामले में न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा द्वारा दिए गए कई आदेशों को सुप्रीम कोर्ट पहले ही पलट चुका है। इसलिए यह जरूरी है कि मामले की सुनवाई किसी अन्य बेंच को सौंपी जाए।
11 मार्च को लिखे गए पत्र में केजरीवाल ने आशंका जताई कि यदि यह मामला इसी बेंच के पास रहता है तो “सुनवाई पूरी तरह निष्पक्ष और तटस्थ नहीं हो सकती।”
उन्होंने अनुरोध किया कि “CBI बनाम कुलदीप सिंह व अन्य” शीर्षक वाले इस मामले को निष्पक्षता सुनिश्चित करने और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए किसी अन्य पीठ को सौंपा जाए।
CBI केस में आरोपी नंबर 18 हैं केजरीवाल
पत्र में बताया गया है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की 17 अगस्त 2022 को दर्ज एफआईआर में अरविंद केजरीवाल को आरोपी नंबर 18 बनाया गया था और 26 जून 2024 को उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
ट्रायल कोर्ट ने करीब दो महीने तक सुनवाई की, जिसमें पांच चार्जशीट और 23 आरोपियों से जुड़े तर्क सुने गए। इसके बाद 12 फरवरी 2026 को आदेश सुरक्षित रखा गया और 27 फरवरी 2026 को विशेष सीबीआई अदालत ने सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया।
दिल्ली हाईकोर्ट में CBI की चुनौती
इसके बाद CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट में करीब 50 पन्नों की रिवीजन याचिका दाखिल कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी। केजरीवाल के पत्र के अनुसार, इस याचिका में ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों या सबूतों में कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं बताई गई है, जिससे बरी किए जाने के आदेश को रद्द किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि 9 मार्च 2026 को पहली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए बिना आरोपियों की दलील सुने ही ट्रायल कोर्ट के विस्तृत आदेश को प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण बताया।
ED मामले की सुनवाई भी रोकी गई
पत्र में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट ने संबंधित प्रवर्तन निदेशालय (ED) मामले की सुनवाई कर रही ट्रायल कोर्ट को भी कार्यवाही स्थगित करने का निर्देश दिया, जबकि CBI ने ऐसी कोई मांग नहीं की थी और ED इस रिवीजन याचिका का पक्षकार भी नहीं है।
आरोपियों का कहना है कि केस ट्रांसफर की मांग का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि मामले की सुनवाई पूरी तरह तटस्थ और निष्पक्ष तरीके से हो और न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा बना रहे।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित 22 अन्य आरोपियों को आबकारी नीति मामले में सीबीआई कोर्ट ने बरी कर दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने CBI की याचिका पर केजरीवाल और अन्य आरोपियों से उनका पक्ष मांगा है।
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