दुकानदारों की पहचान अनिवार्य करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस नयी दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक सार्वजनिक हित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें मांग की गई है कि देशभर के दुकानदारों और सेवा प्रदाताओं के लिए अपनी पहचान और विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना ..
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक सार्वजनिक हित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें मांग की गई है कि देशभर के दुकानदारों और सेवा प्रदाताओं के लिए अपनी पहचान और विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाए।
यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दाखिल की गई है। उनका कहना है कि दुकानदारों की स्पष्ट पहचान उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक है और इससे विक्रेताओं की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है।
याचिका में मुख्य तर्क
- दुकानदारों और सेवा प्रदाताओं की पहचान की जानकारी दुकान पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होनी चाहिए।
- इससे उपभोक्ता यह जान सकेंगे कि वह किससे सामान या सेवा खरीद रहे हैं।
- पहचान की पारदर्शिता से उपभोक्ता शिकायतें दर्ज कराने में सहूलियत होगी, जिससे धोखाधड़ी और मिलावट जैसे मामलों पर नियंत्रण संभव होगा।
- वर्तमान में एक "असमानता की स्थिति" बनी हुई है, जिससे ग्राहक अपने अधिकारों का सही उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
- सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अश्विनी उपाध्याय के पहनावे (वकील का गाउन) पर टिप्पणी करते हुए कहा, "अगर आप खुद याचिकाकर्ता हैं तो वकील की पोशाक क्यों पहन रखी है? बाहर जाइए और वापस आइए।"
- इसके बाद उपाध्याय ने गाउन उतारा और दोबारा कोर्ट में उपस्थित हुए।
- पीठ ने यह भी पूछा, "आप हाईकोर्ट क्यों नहीं गए?" लेकिन फिर भी मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र को नोटिस जारी कर दिया।
याचिका की मांग:
- हर दुकानदार और सेवा प्रदाता को अपने नाम, पहचान, लाइसेंस/पंजीकरण नंबर, मोबाइल नंबर आदि को स्पष्ट रूप से दुकान पर लगाना अनिवार्य किया जाए।
- यह उपभोक्ताओं के 'जानने के अधिकार' (Right to Know) का हिस्सा है।
- इस कदम से ईमानदारी से व्यापार करने वालों को बढ़ावा मिलेगा और धोखेबाजों पर लगाम लगेगी।
आगे क्या?
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और याचिका पर आगे की सुनवाई निर्धारित की जाएगी।
यदि यह याचिका स्वीकार होती है, तो पूरे देश में दुकानों और सेवा प्रतिष्ठानों पर पहचान संबंधी जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करनी पड़ सकती है।
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