यूपी POCSO कोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया..
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित एक अदालत ने शनिवार को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश POCSO कोर्ट द्वारा नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों के बाद दिया..
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित एक अदालत ने शनिवार को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश POCSO कोर्ट द्वारा नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों के बाद दिया गया।
अदालत के आदेश के बाद अब प्रयागराज के झूंसी थाना में मामला दर्ज किया जाएगा। यह शिकायत शकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(4) के तहत दाखिल की गई थी, जिसमें एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी।
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, प्रयागराज में एडीजे (रेप एवं POCSO विशेष अदालत) विनोद कुमार चौरसिया ने पुलिस को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों के संबंध में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ-साथ उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट ने पुलिस को मामला दर्ज कर विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। आदेश के अनुपालन में अब झूंसी थाने में केस दर्ज किया जाएगा।
नाबालिग शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज
13 फरवरी को इस मामले में दो नाबालिग शिकायतकर्ताओं के बयान वीडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से अदालत में दर्ज किए गए थे और अदालत ने पुलिस रिपोर्ट का औपचारिक संज्ञान लिया था। इन बयानों और रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
आशुतोष ब्रह्मचारी, जो श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट से जुड़े हैं और शकुंभरी पीठाधीश्वर भी हैं, ने 28 जनवरी को धारा 173(4) के तहत यह अर्जी दाखिल की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि झूंसी पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया, जबकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आश्रम में नाबालिग बच्चों का शोषण हुआ। उन्होंने अदालत में सबूत के तौर पर एक सीडी भी जमा करने का दावा किया।
कोर्ट के स्पष्ट निर्देश
अदालत ने आदेश में कहा कि “प्रयागराज जनपद के झूंसी थाना प्रभारी (SHO) को निर्देशित किया जाता है कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध जानकारी और सामग्री के आधार पर तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जाए। एफआईआर संबंधित विधिक धाराओं के तहत दर्ज हो तथा जांच पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप की जाए।”
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जांच निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से की जाए तथा POCSO अधिनियम के प्रावधानों, विशेषकर पीड़ितों की पहचान और गरिमा की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए।
अदालत ने आदेश के तत्काल अनुपालन और विधि द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा है। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि अदालत ने मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। सभी प्रश्न जांच के लिए खुले हैं और जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से तथा कानून के अनुसार ही कार्य करना होगा।
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