हिजाब मामले पर बंटी हुई है सर्वोच्च न्यायालय की राय, मामला भेजा बड़ी बेंच के पास

हिजाब मामले पर बंटी हुई है सर्वोच्च न्यायालय की राय, मामला भेजा बड़ी बेंच के पास
13-10-2022 - 04:39 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

हिजाब विवाद पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने अलग-अलग राय के चलते मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने की सिफारिश की है। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया ने इस मामले पर बंटा हुआ फैसला दिया। इस कारण अंतिम निर्णय पर एकमत ना होने के कारण उन्होंने यह केस चीफ जस्टिस यूयू ललित के पास भेजा है, जो अब इस पर सुनवाई के लिए बड़ी बेंच का गठन करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब है कि अब,जब तक कि सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच इस मामले पर निर्णय नहीं देती, तब तक कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला मान्य रहेगा यानी स्कूल-कॉलेज में हिजाब ना पहनने की यथास्थिति बनी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के इस विभाजित फैसले के बाद,अब नई बेंच, नये सिरे से हिजाब मामले की सुनवाई करेगी।

हिजाब मामले पर किसने क्या कहा

जस्टिस गुप्ता ने छात्रों की याचिकाओं को खारिज किया और कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा ," यह मामला हम चीफ जस्टिस को भेज रहे हैं ताकि इसकी सुनवाई के लिए बड़ी बेंच का गठन किया जाए।"
वही दूसरी तरफ बेंच के दूसरे जज जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए कहा," हिजाब पहनना व्यक्तिगत पसंद का मुद्दा है। मेरे दिमाग में सबसे ज्यादा यह बात आ रही है कि क्या हम इस तरह के प्रतिबंध लगाकर एक छात्रा के जीवन को बेहतर बना रहे हैं?"

हिजाब मामले में याचिकाकर्ता के वकील निजामुद्दीन पाशा ने न्यूज एजेंसियों से कहा कि अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का एक नया दौर शुरू होगा। संभव है कि सुनवाई के लिए तीन या फिर पांच जजों की बेंच गठित हो क्योंकि ये मामला बेहद संजीदा है। कर्नाटक सरकार ने तर्क दिया था कि उसके पास शिक्षण संस्थानों के लिए स्कूल यूनिफॉर्म तय करने और अनुशासन का पालन करने का आदेश जारी करने का अधिकार है।

याचिकाकर्ता विद्यार्थियों की ओर से अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने तर्क दिया कि मौलिक अधिकार यानी क्या पहनना है यह चुनने की स्वतंत्रता और और आस्था की स्वतंत्रता एक क्लास के भीतर कम नहीं हो जाते। विद्यार्थियों का पक्ष रख रहे देवदत्त कामत, डॉ राजीव धवन और दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कर्नाटक सरकार ने अपने दावे का समर्थन करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किए।

वकीलों का कहना था कि राज्य सरकार ये साफ नही किया कि कैसे कुछ छात्राओं के कक्षाओं में यूनिफार्म के साथ हिजाब पहनने से सार्वजनिक व्यवस्था का उल्लंघन हुआ? बता दें कि जस्टिस हेमंत गुप्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने 26 सितंबर को अपने सभी पक्षों यानी 23 याचिकाकर्ताओं के वकीलों और कर्नाटक सरकार की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। 10 दिन तक इस मामले पर सुनवाई चली थी ।

यह था हाई कोर्ट का फैसला

कर्नाटक हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस ऋतुराज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा दीक्षित और जस्टिस जे एम खाजी की बेंच ने इस साल 15 मार्च को अपने फैसले में कहा था कि महिलाओं का हिजाब पहनना इस्लाम में अनिवार्य प्रथा नहीं है इसलिए यह संविधान के अनुच्छेद 25(धार्मिक मान्यताओं को मानने की आजादी) के अंतर्गत नहीं आता। कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि स्कूल की यूनिफार्म एक उचित व्यवस्था है जो संविधान सम्मत है। इस पर विद्यार्थी आपत्ति नहीं कर सकते। साथ ही राज्य सरकार के पास ऐसी अधिसूचना जारी करने की शक्ति है और सरकारी सूचना के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।