MALE ड्रोन: अमेरिका के प्रिडेटर के मुकाबले भारत के नए कॉम्बैट UAV कितने दमदार..?
भारत अब अपनी ड्रोन क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है और इस बार फोकस ‘स्थानीय निर्माण’ पर है। रक्षा मंत्रालय ने 87 सशस्त्र मीडियम ऑल्टिट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE) ड्रोन खरीदने के बड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी..
नयी दिल्ली। भारत अब अपनी ड्रोन क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है और इस बार फोकस ‘स्थानीय निर्माण’ पर है। रक्षा मंत्रालय ने 87 सशस्त्र मीडियम ऑल्टिट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE) ड्रोन खरीदने के बड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह फैसला रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) द्वारा मंजूर किए गए 67,000 करोड़ रुपये के रक्षा पैकेज का हिस्सा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मई में पहलगाम आतंकी हमले के बाद की गई ऑपरेशन सिंदूर (सीमा पार जवाबी कार्रवाई) के दौरान ऐसे ड्रोन की जरूरत महसूस की गई।
अमेरिका से मंगाए गए प्रिडेटर ड्रोन, जिनकी डिलीवरी 2029 में अपेक्षित है, के विपरीत ये नए MALE ड्रोन भारत में 60% स्वदेशी तकनीक के साथ बनाए जाएंगे और काफी जल्द तैनात हो सकेंगे।
20,000 करोड़ रुपये का यह ड्रोन सौदा सिर्फ एक और बड़ी रक्षा खरीद नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक बदलाव का संकेत है। भारत अब केवल कॉम्बैट ड्रोन खरीद नहीं रहा, बल्कि बदलते सुरक्षा हालात के अनुरूप भविष्य की युद्धक क्षमता भी तैयार कर रहा है।
MALE ड्रोन क्या हैं और भारत को इनकी क्यों जरूरत है?
मीडियम ऑल्टिट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE) ड्रोन ऐसे मानव रहित हवाई वाहन (UAV) होते हैं जो लगभग 30,000 से 35,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ सकते हैं और 30 घंटे से अधिक समय तक हवा में रह सकते हैं। छोटे टैक्टिकल ड्रोन के विपरीत, ये निगरानी के साथ-साथ लड़ाकू (कॉम्बैट) भूमिकाएं भी निभा सकते हैं।
इनकी मुख्य ताकत है — लंबे समय तक खुफिया जानकारी जुटाना, निगरानी करना और लक्ष्य पर सटीक हमला करना।
आधुनिक युद्धों (जैसे यूक्रेन और गाज़ा संघर्ष) में एयर सुपीरियरिटी और रीयल-टाइम डेटा की अहमियत के कारण ऐसे ड्रोन अब सीमा सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियानों और पारंपरिक युद्ध—तीनों में अनिवार्य हो गए हैं।
रक्षा मंत्रालय ने क्या मंजूरी दी है?
5 अगस्त 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में DAC ने 67,000 करोड़ रुपये के आधुनिकीकरण पैकेज को मंजूरी दी। इसमें से 20,000 करोड़ रुपये 87 सशस्त्र MALE ड्रोन खरीदने पर खर्च होंगे।
एक अधिकारी ने बताया, "तीनों सेनाओं को ऐसे ड्रोन की जरूरत है जो खुफिया, निगरानी, टोही (ISR) और हथियार ले जाने की क्षमता रखते हों।"
अगले 10 वर्षों के लिए 11,000 करोड़ रुपये लॉजिस्टिक और मूल उपकरण निर्माता (OEM) सपोर्ट पर खर्च किए जाएंगे।
ड्रोन का निर्माण भारतीय और विदेशी कंपनियों के संयुक्त उद्यम के तहत होगा, जिसमें कम से कम 60% स्वदेशी सामग्री होगी।
इन ड्रोन की क्षमताओं में शामिल होंगे
- बहु-प्रकार के पेलोड ले जाना
- विभिन्न भूभागों में ऑपरेशन
- रीयल-टाइम ISR मिशन
- 35,000 फीट से ऊपर लंबी उड़ान और सटीक हमले
क्यों बढ़ी है तत्काल जरूरत? — ऑपरेशन सिंदूर से सीख
ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) में पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर जवाबी हमलों के दौरान भारत ने लोइटरिंग म्युनिशन और ‘कामिकाज़े’ ड्रोन का इस्तेमाल किया। ये प्रभावी थे, लेकिन एक-बारगी इस्तेमाल के बाद नष्ट हो जाते हैं।
इसके विपरीत, MALE ड्रोन हमले के बाद लौट सकते हैं, जिससे वे लंबे समय में ज्यादा किफायती साबित होते हैं।
प्रिडेटर MQ-9B से तुलना
भारत पहले ही 31 MQ-9B प्रिडेटर ड्रोन खरीदने के लिए 32,000 करोड़ रुपये का सौदा कर चुका है। ये हाई ऑल्टिट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) ड्रोन हैं, लेकिन इनकी डिलीवरी 2029-30 से पहले नहीं होगी।
स्वदेशी MALE ड्रोन
- जल्दी डिलीवर होंगे
- भारत की सीमाओं के अनुरूप डिज़ाइन होंगे
- लागत में सस्ते होंगे
- तेजी से तैनाती संभव होगी
प्रिडेटर के फायदे:
- लंबी रेंज
- उपग्रह नेटवर्क से व्यापक कनेक्टिविटी
क्या भारत तैयार है?
भारत ने पहले ही अनुभव जुटा लिया है। जनवरी 2024 में नौसेना और थलसेना ने दृष्टि-10 स्टारलाइनर ड्रोन को शामिल किया, जिसे अदानी डिफेंस और इजराइली एल्बिट सिस्टम्स ने विकसित किया। यह 36 घंटे तक उड़ान भर सकता है, 450 किलो पेलोड ले सकता है और 70% स्वदेशी तकनीक से बना है।
नए 87 ड्रोन प्रोजेक्ट में HAL, भारत फोर्ज, L&T, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और अदानी जैसे भारतीय उद्योग दावेदार हो सकते हैं।
67,000 करोड़ रुपये पैकेज के अन्य फैसले
- वायुसेना के सुखोई-30 के लिए 110 से अधिक ब्रह्मोस एयर-लॉन्च मिसाइलें (10,800 करोड़ रुपये)
- नौसेना के पुराने जहाजों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम व लॉन्चर अपग्रेड
- बराक-1 मिसाइल सिस्टम का उन्नयन
- थलसेना के BMP वाहनों के लिए नाइट साइट्स
- नौसेना के लिए एंटी-सबमरीन युद्ध हेतु कॉम्पैक्ट ऑटोनॉमस सरफेस क्राफ्ट
- वायुसेना के लिए पर्वतीय रडार और ‘सक्षम’ स्पाइडर एयर डिफेंस सिस्टम अपग्रेड
- S-400, C-17, और C-130J प्लेटफॉर्म्स के लिए लंबी अवधि के रखरखाव अनुबंध
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