“सैन्य संघर्ष समाधान नहीं”.. ऑस्ट्रिया के चांसलर के साथ बैठक में पीएम मोदी का शांति पर जोर
नरेंद्र मोदी ने गुरुवार, 16 अप्रैल को क्रिश्चियन स्टॉकर के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान सैन्य संघर्ष नहीं हो सकता। उन्होंने जोर दिया कि मौजूदा समय में दुनिया एक “गंभीर और तनावपूर्ण दौर” से गुजर रही है, जहां संवाद और कूटनीति ही स्थायी शांति का रास्ता..
नरेंद्र मोदी ने गुरुवार, 16 अप्रैल को क्रिश्चियन स्टॉकर के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान सैन्य संघर्ष नहीं हो सकता। उन्होंने जोर दिया कि मौजूदा समय में दुनिया एक “गंभीर और तनावपूर्ण दौर” से गुजर रही है, जहां संवाद और कूटनीति ही स्थायी शांति का रास्ता है।
वैश्विक तनाव पर भारत-ऑस्ट्रिया एकमत
पीएम मोदी ने कहा कि चाहे यूक्रेन का मुद्दा हो या पश्चिम एशिया की स्थिति—भारत और ऑस्ट्रिया दोनों ही स्थायी, टिकाऊ और शांतिपूर्ण समाधान के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि टकराव के बजाय बातचीत से ही समस्याओं का हल संभव है।
चार दशक बाद ऐतिहासिक दौरा
प्रधानमंत्री ने चांसलर स्टॉकर के साथ बातचीत को “उत्पादक” बताया और कहा कि यह दौरा कई मायनों में खास है।
- यह किसी ऑस्ट्रियाई चांसलर की 40 वर्षों में पहली भारत यात्रा है
- स्टॉकर ने पद संभालने के बाद यूरोप के बाहर भारत को अपनी पहली यात्रा के लिए चुना
यह कदम दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हैदराबाद हाउस में बैठक, कई समझौते
दोनों नेताओं के बीच हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसके बाद कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया गया।
राजघाट पर गांधी को श्रद्धांजलि
भारत यात्रा के दौरान चांसलर स्टॉकर ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह उनका भारत का पहला आधिकारिक दौरा है, और 2025 में पद संभालने के बाद एशिया की भी पहली यात्रा है।
आर्थिक सहयोग पर विशेष जोर
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की:
- ग्रीन टेक्नोलॉजी
- डिजिटल इनोवेशन
- एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग
इसके अलावा व्यापार और निवेश को बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया गया।
जयशंकर ने जताया भरोसा
एस. जयशंकर ने चांसलर स्टॉकर से मुलाकात के बाद विश्वास जताया कि यह दौरा भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों को नई दिशा देगा और सहयोग के नए अवसर खोलेगा।
संबंधों को मिलेगी नई गति
भारत और ऑस्ट्रिया के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं। यह दौरा पिछले वर्ष पीएम मोदी की ऑस्ट्रिया यात्रा के बाद संबंधों को और गति देने वाला माना जा रहा है।
निष्कर्ष:
वैश्विक तनाव के बीच भारत और ऑस्ट्रिया ने स्पष्ट संदेश दिया है कि युद्ध नहीं, बल्कि संवाद ही समाधान है। साथ ही यह दौरा दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
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