‘ऑपरेशन सिंदूर’ संभवतः अब तक की सबसे लंबी बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) हवाई लड़ाई: IISS
सैन्य, राजनीतिक और सुरक्षा मामलों पर विश्व की प्रमुख संस्था International Institute for Strategic Studies (IISS) का मानना है कि पिछले वर्ष मई में भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ सैन्य टकराव, जिसे भारत में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम से जाना जाता है, “अब तक की दुनिया की सबसे लंबी बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) एयर-टू-एयर मुठभेड़ हो..
लंदन। सैन्य, राजनीतिक और सुरक्षा मामलों पर विश्व की प्रमुख संस्था International Institute for Strategic Studies (IISS) का मानना है कि पिछले वर्ष मई में भारत-पाकिस्तान के बीच हुआ सैन्य टकराव, जिसे भारत में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम से जाना जाता है, “अब तक की दुनिया की सबसे लंबी बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) एयर-टू-एयर मुठभेड़ हो सकती है।”
BVR का अर्थ है ऐसे हवाई अभियानों से, जिनमें विमान दूर स्थित, सामान्यतः नंगी आंखों से दिखाई न देने वाले, उड़ते लक्ष्यों पर रॉकेट या मिसाइलें दागते हैं।
यह आकलन IISS की वार्षिक रिपोर्ट The Military Balance 2026 में किया गया है, जिसे 24 फरवरी को जारी किया गया। रिपोर्ट में यह विश्लेषण भी प्रस्तुत किया गया है कि 7 मई 2024 को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान Indian Air Force (IAF) का एक Dassault Rafale लड़ाकू विमान नष्ट हुआ हो सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया, “ओपन-सोर्स तस्वीरों से एक राफेल EH (उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स से लैस) विमान के नुकसान की पुष्टि होती है।” हालांकि, भारत ने अब तक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी राफेल के नुकसान पर सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और यह कहते हुए सवालों से बचता रहा है कि अभियान के सभी उद्देश्य पूरे कर लिए गए थे।
रिपोर्ट में आगे कहा गया, “मुठभेड़ के दौरान वास्तव में क्या हुआ, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि राफेल विमानों में कौन-सी BVR मिसाइलें लगी थीं—MBDA की माइका (MICA) या मेटियोर—और क्या भारतीय विमानों ने पाकिस्तानी विमानों को निशाना बनाया। यह भी अनिश्चित है कि भारतीय विमानों के नियमों (रूल्स ऑफ एंगेजमेंट) में ऐसा करने की अनुमति थी या नहीं।”
रिपोर्ट में कथित विमान नुकसान को लेकर विभिन्न सिद्धांत भी पेश किए गए हैं।
IISS के अनुसार, “भारतीय विमानों के ज्ञात नुकसान के कारणों को लेकर भी रिपोर्टें अलग-अलग हैं। चीन की China Airborne Missile Academy की PL-15E (CH-AA-12 एबैडन) मिसाइल के मलबे की बरामदगी से संकेत मिलता है कि इस लंबी दूरी की मिसाइल ने नुकसान में भूमिका निभाई हो सकती है। Aviation Industry Corporation of China के अनुसार PL-15E की आधिकारिक मारक क्षमता 145 किलोमीटर है।”
भारत के हमले और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
IISS की समीक्षा में यह भी पुष्टि की गई कि भारतीय विमानों ने “आज़ाद जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तानी पंजाब में स्थित कथित नौ आतंकी ठिकानों या शिविरों पर हमले किए।”
रिपोर्ट में कहा गया, “हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि भारत ने किन विमानों और हथियारों का इस्तेमाल किया, लेकिन भारत का कहना है कि उसने MBDA की SCALP-EG लैंड-अटैक क्रूज़ मिसाइलें और Safran की AASM हैमर-250 गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया, जिन्हें राफेल DH/EH विमानों से दागा गया (DH दो-सीटर संस्करण है)।”
इसके जवाब में, रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन बुनयान-उल-मरसोस’ के तहत अपने लड़ाकू विमान—संभवतः Chengdu J-10CE और JF-17 Thunder ब्लॉक-III—हवा में उतारे।
हालांकि, रिपोर्ट ने यह निष्कर्ष भी निकाला कि “किसी भी देश का लड़ाकू विमान अपने-अपने हवाई क्षेत्र से बाहर नहीं गया।”
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत-पाक संघर्ष ने “चीनी सैन्य तकनीक की वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षा” का अवसर प्रदान किया।
ऑपरेशन के बाद भारत की सैन्य तैयारियां
ऑपरेशन के बाद, रिपोर्ट के अनुसार, “भारत ने अपनी क्षमताओं का विस्तार जारी रखा, सेनाओं का आधुनिकीकरण किया और घरेलू रक्षा-औद्योगिक आधार को मजबूत करने पर जोर दिया… 2035 तक रणनीतिक और नागरिक दोनों क्षेत्रों को कवर करने वाली एकीकृत वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने का लक्ष्य रखा गया।”
इसके साथ ही, भारत ने एक दशक में पहली बार नई समुद्री नीति (Maritime Doctrine) अपनाई और विशेष बलों पर संयुक्त सिद्धांत (Joint Doctrine on Special Forces) भी जारी किया।
हालांकि, IISS ने यह भी टिप्पणी की कि “भारत की सशस्त्र सेनाएं अब भी मुख्य रूप से पाकिस्तान के साथ क्षेत्रीय विवादों पर केंद्रित हैं। चीन के साथ भी लंबे समय से क्षेत्रीय विवाद हैं और भारत हिंद महासागर में बीजिंग से उत्पन्न सुरक्षा चिंताओं की ओर भी झुक रहा है।”
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत 2024 में Agni-V आईआरबीएम का परीक्षण कर चुका है, जिसमें MIRV (एकाधिक स्वतंत्र रूप से लक्ष्य साधने वाले री-एंट्री व्हीकल) तकनीक का उपयोग किया गया।
IISS के अनुसार, भारत के सैन्य उपकरणों का बड़ा हिस्सा अब भी सोवियत और रूसी मूल का है, विशेषकर वायु शक्ति के क्षेत्र में। भारत और रूस मिसाइल रक्षा में भी सहयोग कर रहे हैं, जिसमें S-400 की खरीद शामिल है। हाल के वर्षों में अमेरिका और फ्रांस से भी आयात बढ़ा है।
हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी कहा कि अपर्याप्त लॉजिस्टिक्स, गोला-बारूद और स्पेयर पार्ट्स की कमी, तथा विशेषज्ञ रखरखाव कर्मियों की कमी के कारण भारत की पारंपरिक सैन्य क्षमता सीमित रहती है। आधुनिकीकरण परियोजनाओं में देरी और लागत बढ़ोतरी भी हुई है। सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीति रक्षा-औद्योगिक आधार को मजबूत करने का प्रयास है, लेकिन इसमें प्रगति धीमी है और रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सीमित है।
एशिया में रक्षा खर्च
IISS के अनुसार, पिछले वर्ष भारत का रक्षा बजट 78.3 अरब डॉलर था, जो दुनिया में छठा सबसे बड़ा था। रूस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम क्रमशः तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर रहे। रिपोर्ट का अनुमान है कि मई 2025 में पाकिस्तान के साथ बड़े टकराव के बाद भारत के रक्षा बजट में और बढ़ोतरी हो सकती है।
सरकार का दावा है कि देश के 65% रक्षा उपकरण अब घरेलू स्तर पर बनाए जा रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार इसमें बड़ा हिस्सा लाइसेंस प्राप्त असेंबली और निर्माण का है।
पाकिस्तान पर IISS का आकलन
पाकिस्तान के संदर्भ में, IISS ने कहा कि देश ने एक आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड की स्थापना की और नई Fatah-IV ज़मीनी क्रूज़ मिसाइल का पहला परीक्षण किया।
नौसेना क्षेत्र में, पाकिस्तान ने चीनी डिज़ाइन की हंगोर-क्लास (टाइप-039B युआन) पनडुब्बियों की दूसरी और तीसरी इकाई लॉन्च की है, जिनमें एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम है। 2015 में ऑर्डर की गई आठ पनडुब्बियों में से पहली के 2026 में सेवा में आने की उम्मीद है।
रक्षा बजट पर रिपोर्ट ने कहा कि 2025 में 17.8% बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान का रक्षा खर्च 10 अरब डॉलर पहुंचा, लेकिन उच्च मुद्रास्फीति के कारण वास्तविक रूप से यह 2019 की तुलना में 11% कम है।
बांग्लादेश और क्षेत्रीय परिदृश्य
भारत-बांग्लादेश संबंधों में हालिया तनाव के मद्देनज़र, रिपोर्ट में बांग्लादेश पर भी टिप्पणी की गई। IISS के अनुसार, “बांग्लादेश के भारत के साथ घनिष्ठ रक्षा संबंध हैं और भारत उसका सबसे पुराना रक्षा साझेदार है, लेकिन मई 2025 में उसने 21 मिलियन डॉलर का जहाज़ निर्माण अनुबंध रद्द कर दिया।”
2026 के लिए बांग्लादेश का रक्षा बजट 3.25 अरब डॉलर रहा। वहीं, म्यांमार का 2025 का सैन्य खर्च लगभग 2.47 अरब डॉलर आंका गया, जिसका अधिकांश हिस्सा आंतरिक सुरक्षा और उग्रवाद-रोधी अभियानों पर खर्च हुआ।
एशिया में चीन की सैन्य बढ़त
IISS की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया में चीन सबसे बड़ा सैन्य शक्ति केंद्र है। पिछले वर्ष चीन का रक्षा खर्च 251.29 अरब डॉलर था, जो एशिया के कुल सैन्य खर्च का लगभग 44% है। यह अमेरिका (921 अरब डॉलर) के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा रक्षा बजट है और भारत से तीन गुना से अधिक है।
जापान (58.9 अरब डॉलर) और दक्षिण कोरिया (43.8 अरब डॉलर) इसके बाद आते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि चीन अपने पड़ोसियों के साथ क्षेत्रीय विवादों में लगातार सैन्य दबाव बनाता रहता है। ट्रंप-नेतृत्व वाले अमेरिका के नए माहौल में, पूर्वी एशिया के अमेरिकी सहयोगी अपनी सुरक्षा गारंटियों को लेकर अनिश्चित हैं, जिसके चलते जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान अपने रक्षा खर्च में बढ़ोतरी कर सकते हैं।
‘द मिलिट्री बैलेंस 2026’ के अनुसार, जापान ने स्टैंड-ऑफ मिसाइल क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है। चीन की विमानवाहक पोत क्षमताओं में विकास को उसकी बढ़ती सैन्य पहुंच का स्पष्ट उदाहरण बताया गया है। 2025 में People’s Liberation Army (PLA) में बड़े पैमाने पर कर्मियों में बदलाव हुए, जो भ्रष्टाचार-रोधी अभियान का हिस्सा थे। इससे विदेशी विश्लेषकों ने चीन की परिचालन तत्परता और रक्षा-औद्योगिक क्षमताओं पर सवाल उठाए।
हालांकि, दिसंबर 2025 में जारी चीनी श्वेत पत्र ने परमाणु हथियारों के उपयोग में “नो फर्स्ट यूज़” नीति की फिर से पुष्टि की।
IISS के अनुसार, PLA दुनिया की सबसे बड़ी सशस्त्र शक्ति है। चीन के पास 20,35,000 सैन्यकर्मी हैं (स्थल सेना 9,50,000; नौसेना 2,62,000; वायुसेना 4,03,000)। इसके मुकाबले भारत की कुल सैन्य शक्ति 15,00,700 है (थलसेना 12,48,000; नौसेना 84,350; वायुसेना 1,51,800)।
चीन के पास 275 उपग्रह, 62 पनडुब्बियां, तीन विमानवाहक पोत और 2,880 युद्ध-सक्षम विमान हैं, जबकि भारत के पास 27 उपग्रह, 19 पनडुब्बियां, दो विमानवाहक पोत और 636 युद्ध-सक्षम विमान हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन असमान आंकड़ों के कारण भारत को संख्या के बजाय गुणवत्ता, और ड्रोन जैसी नई युद्ध तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर ध्यान देना होगा।
पाकिस्तान के संदर्भ में रिपोर्ट में कहा गया कि उसके सशस्त्र बलों में कुल 6,60,000 सैनिक हैं—थलसेना में 5,60,000, नौसेना में 30,000 और वायुसेना में 70,000। IISS ने निष्कर्ष निकाला कि “पाकिस्तान की परमाणु और पारंपरिक सैन्य क्षमताएं मुख्य रूप से भारत से उत्पन्न खतरे पर केंद्रित हैं।”
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