ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहले 'मन की बात' में PM मोदी ने दिखाईं ध्वस्त किए गए लश्कर कैंपों की तस्वीरें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में ध्वस्त किए गए आतंकवादी ठिकानों की तस्वीरें देश के सामने प्रस्तुत कीं..
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में ध्वस्त किए गए आतंकवादी ठिकानों की तस्वीरें देश के सामने प्रस्तुत कीं।
ये तस्वीरें उनके मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 122वें संस्करण के दौरान दिखाई गईं — जो ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद पहली बार प्रसारित हुआ।
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में सीमा पार से संबंधों के ठोस सबूत मिलने के बाद, भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सटीक हमले किए और पाकिस्तान व पीओके में स्थित 9 आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया।
इन हमलों में लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी संगठनों के कई अड्डों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय सशस्त्र बलों की सटीकता और पराक्रम की सराहना की और पीओके में तबाह किए गए ठिकानों — कोटली स्थित गुलपुर और अब्बास कैंप तथा भीमबर का बरनाला कैंप — की तस्वीरें भी दिखाई।
- गुलपुर कैंप, लश्कर-ए-तैयबा के उन आतंकियों का प्रमुख अड्डा था जो जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ क्षेत्रों में सक्रिय थे।
- अब्बास कैंप, लश्कर के फिदायीन हमलावरों को ट्रेनिंग देने का केंद्रीय केंद्र था।
- वहीं, बरनाला कैंप में आतंकवादियों को हथियार चलाने, आईईडी (विस्फोटक उपकरण) बनाने और जंगल में जीवित रहने की तकनीकें सिखाई जाती थीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “सीमा पार आतंकवादी ठिकानों को हमारी सेनाओं ने जिस सटीकता और दक्षता के साथ ध्वस्त किया, वह असाधारण है। ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य मिशन नहीं है; यह हमारी दृढ़ इच्छाशक्ति, साहस और बदलते भारत की तस्वीर है। इस तस्वीर ने पूरे देश को देशभक्ति की भावना से भर दिया है और तिरंगे के रंग में रंग दिया है।”
उन्होंने आगे कहा, “आज पूरा देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है, गुस्से और संकल्प से भरा हुआ है।”प्रधानमंत्री ने इस मिशन की सफलता का श्रेय ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना के तहत विकसित स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को दिया।
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