‘लापरवाह निर्णय’: फिलिस्तीन को मान्यता देने की फ्रांस की कोशिश पर अमेरिका का विरोध, कहा- इससे हमास की प्रोपेगेंडा को बल मिलेगा

अमेरिका ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में सितंबर में फिलिस्तीन को मान्यता देने की फ्रांस की योजना का कड़ा विरोध किया..

‘लापरवाह निर्णय’: फिलिस्तीन को मान्यता देने की फ्रांस की कोशिश पर अमेरिका का विरोध, कहा- इससे हमास की प्रोपेगेंडा को बल मिलेगा
25-07-2025 - 10:55 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

वॉशिंगटन। अमेरिका ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में सितंबर में फिलिस्तीन को मान्यता देने की फ्रांस की योजना का कड़ा विरोध किया।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फ्रांस के इस फैसले को नकारते हुए इसे 'हमास की प्रोपेगेंडा' करार दिया और कहा कि यह पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचाएगा।

रुबियो ने एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा, संयुक्त राज्य अमेरिका, इमैनुएल मैक्रों की उस योजना का कड़ा विरोध करता है जिसमें वे संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीन को मान्यता देने जा रहे हैं। यह लापरवाह निर्णय केवल हमास की प्रचार रणनीति को बल देता है और शांति को पीछे धकेलता है। यह 7 अक्टूबर के पीड़ितों के मुंह पर तमाचा है।”

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पहले ही यह ऐलान कर दिया था कि फ्रांस सितंबर की यूएन महासभा सत्र के दौरान औपचारिक रूप से फिलिस्तीन को मान्यता देगा।

मैक्रों ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, मध्य पूर्व में न्यायसंगत और स्थायी शांति की अपनी ऐतिहासिक प्रतिबद्धता के प्रति सच्चे रहते हुए, मैंने निर्णय लिया है कि फ्रांस फिलिस्तीन राज्य को मान्यता देगा।”

फ्रांस लंबे समय से दो-राज्य समाधान (Two-State Solution) का समर्थक रहा है, लेकिन अब तक उसने औपचारिक मान्यता नहीं दी थी। मैक्रों ने यह स्पष्ट किया कि फ्रांस हमास रहित फिलिस्तीनी राज्य का समर्थन करता है और साथ ही इज़राइल के शांति और सुरक्षा के अधिकार को भी मान्यता देता है।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि फ्रांस का यह कदम एक "सामूहिक गति" उत्पन्न करेगा जिससे अरब देश भी इज़राइल को मान्यता देने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।


उनकी यह घोषणा आयरलैंड, स्पेन, नॉर्वे और स्लोवेनिया द्वारा फिलिस्तीन को मान्यता देने के बाद आई है।

नेटन्याहू बोले- यह एक गंभीर गलती है

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मैक्रों के इस फैसले को गंभीर गलती” बताया। उन्होंने फ्रांसीसी राष्ट्रपति की आलोचना करते हुए कहा कि वह हमास और अन्य सशस्त्र समूहों से उत्पन्न खतरे की अनदेखी कर रहे हैं।

इज़राइल ऐसे देशों से राष्ट्र की स्वतंत्रता पर नैतिक उपदेश नहीं स्वीकार करेगा जो अपने ही क्षेत्रों में स्वतंत्रता देने से इनकार करते हैं,” नेतन्याहू ने कहा।

इस बीच गाजा संघर्षविराम वार्ता असफल

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब गाजा में संघर्षविराम को लेकर दोहा में चल रही वार्ताएं विफल हो गई हैं। अमेरिका और इज़राइल इस हफ्ते वार्ताओं से पीछे हट गए क्योंकि कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई।

अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने आरोप लगाया कि हमास ईमानदारी से बातचीत नहीं कर रहा है” और कहा कि अब अमेरिका विकल्पों की खोज” करेगा।

उन्होंने कहा, “हमास की प्रतिक्रिया यह स्पष्ट दिखाती है कि वह गाजा में संघर्षविराम की दिशा में इच्छुक नहीं है।”
विटकॉफ ने पुष्टि की कि अमेरिकी दल अब लौट रहा है और बंधकों की वापसी व गाजा की स्थिरता के लिए अन्य रास्ते तलाशे जाएंगे।

संघर्षविराम वार्ता की स्थिति

कतार की मध्यस्थता में चल रही यह वार्ता इस उद्देश्य से हो रही थी कि हिंसा को रोका जाए और इज़राइली बंधकों की रिहाई सुनिश्चित हो।
हालांकि हमास के ताजा प्रस्ताव में सहायता मार्गों में बदलाव, सैन्य वापसी क्षेत्रों की शर्तें और स्थायी संघर्षविराम की स्थितियां शामिल थीं, जिसे इज़राइल ने स्वीकार नहीं किया।

नेतन्याहू ने इस गतिरोध के लिए हमास को जिम्मेदार ठहराया और चेतावनी दी कि इज़राइल की समझौते की इच्छा को कमजोरी न समझा जाए।

हम अपने बंधकों की रिहाई के लिए एक और समझौते की कोशिश कर रहे हैं,” उन्होंने कहा।
लेकिन यदि हमास इसे हमारी कमजोरी समझे और ऐसे आत्मसमर्पण की शर्तें थोपने की कोशिश करे जो इज़राइल को खतरे में डालें, तो वह गंभीर भ्रम में है।”

मानवता संकट पर चिंता

गाजा में मानवीय संकट को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता लगातार बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मानव-निर्मित अकाल”  की चेतावनी दी है, जहां दो मिलियन से अधिक फिलिस्तीनियों को भोजन और सहायता की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।

फ्रांस ने इस संकट के लिए इज़राइल के प्रतिबंध (ब्लॉकेड) को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन इज़राइल ने इसे खारिज करते हुए हमास पर सहायता में बाधा डालने का आरोप लगाया।

राहत समूहों का कहना है कि उन्हें इज़राइल की सीमित अनुमति और लगातार चल रही लड़ाई के कारण भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, जमीनी स्तर पर कई आवाजें इस रक्तपात को समाप्त करने की मांग कर रही हैं।

140 से अधिक देश पहले ही कर चुके हैं मान्यता

फिलहाल 140 से अधिक देश पहले ही फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दे चुके हैं, और फ्रांस की मान्यता अब तक की सबसे प्रमुख पश्चिमी स्वीकृति में से एक मानी जा रही है।

गाजा युद्ध की पृष्ठभूमि

गाजा में यह युद्ध 7 अक्टूबर को हमास द्वारा इज़राइल पर किए गए हमले के बाद शुरू हुआ था, जिसमें 1,219 लोगों की मौत हुई थी। यह युद्ध अब 21 महीनों से जारी है।

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस दौरान अब तक 59,587 फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकांश नागरिक हैं।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।