'रिडिक्यूलस राहुल': सलमान खुर्शीद के अनुच्छेद 370 और ऑपरेशन सिंदूर पर समर्थन के बाद BJP का कांग्रेस पर हमला
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान को लेकर भाजपा सरकार की नीतियों जिसमें अनुच्छेद 370 का हटाया जाना और ऑपरेशन सिंदूर शामिल है..
नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान को लेकर भाजपा सरकार की नीतियों जिसमें अनुच्छेद 370 का हटाया जाना और ऑपरेशन सिंदूर शामिल है, का समर्थन किया।
BJP प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने सलमान खुर्शीद की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी पर पाकिस्तानी प्रचार को दोहराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “अब RR यानी ‘रिडिक्यूलस राहुल’ को बोलना पड़ेगा। वह नेता प्रतिपक्ष हैं, लेकिन काम पाकिस्तान के प्रचार प्रमुख का कर रहे हैं… अब सब कुछ साफ हो गया है। उनके अपने ही मंत्री यह कह रहे हैं।”
पूनावाला ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कांग्रेस नेताओं जयराम रमेश और पवन खेड़ा की सलाह पर निर्णय ले रहे हैं, न कि खुर्शीद जैसे वरिष्ठ नेताओं की बात सुन रहे हैं। उन्होंने कहा:
“सलमान खुर्शीद ने जो तथ्य बताए, उससे साफ है कि राहुल गांधी को अब खुर्शीद की सलाह माननी पड़ेगी, न कि जयराम रमेश और पवन खेड़ा की।”
सलमान खुर्शीद, जो इस समय दक्षिण-पूर्व एशिया के दौरे पर जा रही सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, ने कहा कि भारत ने सीमा पार संघर्ष के दौरान संयम दिखाया। उन्होंने खुलासा किया कि संघर्षविराम की पहल भारत की नहीं, बल्कि पाकिस्तान की ओर से हुई थी।
उन्होंने कहा, “यह हर किसी को स्पष्ट है कि फोन पाकिस्तान के DGMO ने भारत के DGMO को किया था। जब उन्होंने कहा कि 'अब रुकें', तभी हम रुके… हमने आगे कोई हमला नहीं किया।”
खुर्शीद ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की सेना और सरकार के बीच तालमेल की कमी है, और सेना के अंदर कई धड़े हैं जो सत्ता की होड़ में लगे हैं। उन्होने कहा, “हमने धैर्य और संयम दिखाया।”
जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत की नीति का समर्थन करते हुए खुर्शीद बोले, “अनुच्छेद 370 को हटाया गया और इसे समाप्त करना जरूरी हो गया था क्योंकि बहुत समय बीत चुका था… उसके बाद चुनाव हुए और जम्मू-कश्मीर में 65% मतदान हुआ। आज वहां एक निर्वाचित सरकार है।”
उन्होंने कहा, “किसी को यह नहीं कहा जा सकता कि वह अपने देश का कोई हिस्सा छोड़ दे। कश्मीर हमारा परिवार है और कोई हमारे परिवार को तोड़ नहीं सकता।”
खुर्शीद ने कहा कि पाकिस्तान से बातचीत केवल तभी संभव है जब शांति और आतंकवाद पर रोक को लेकर ठोस और विश्वसनीय प्रतिबद्धता हो। उन्होंने संसद के एक पुराने सर्वसम्मत प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा, “भारत की संसद का पुराना प्रस्ताव है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) वापस लिया जाना चाहिए।”
उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान ने भारत की शांति पहलों के साथ बार-बार धोखा किया है।
“जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर रोक नहीं लगाता, तब तक सिंधु जल संधि भी निलंबित रहेगी।”
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी) के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा, “हम कई कदम उठा रहे हैं… पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी अड्डों को खत्म करने की कोशिश हो रही है। जब हमने जवाब दिया तो उसे और नहीं बढ़ाया, बल्कि हम सिर्फ उन ठिकानों को निशाना बना रहे थे जहां से हम पर हमला हुआ था।”
खुर्शीद ने इंडोनेशिया की प्रतिक्रिया की तारीफ की और कहा, “मुझे लगता है कि इंडोनेशिया ने हमारी अपेक्षा से भी अधिक समर्थन दिया। ASEAN भी इस मुद्दे को अपनी आगामी बैठकों में उठा सकता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान द्वारा फैलाई गई कहानी को इंडोनेशिया और अन्य देशों ने पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के सेना प्रमुख द्वारा जो कहानी पेश की गई, उसे हमारी बातचीत में पूरी तरह नकारा गया।”
सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व JDU सांसद संजय कुमार झा कर रहे हैं। अन्य सदस्यों में अपराजिता सारंगी (BJP), अभिषेक बनर्जी (TMC), बृजलाल (BJP), जॉन ब्रिटास (CPM), प्रदन बरुआ (BJP), हेमांग जोशी (BJP), सलमान खुर्शीद और मोहन कुमार शामिल हैं।
ये प्रतिनिधिमंडल ऑपरेशन सिंदूर के बाद वैश्विक कूटनीतिक अभियान का हिस्सा हैं। यह ऑपरेशन 7 मई को पाकिस्तान और पाक-अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर चलाया गया था। इसमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज़्बुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों से जुड़े 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की रिपोर्ट है।
भारत की आतंकवाद के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस नीति को सामने रखने और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को चुनौती देने के लिए ऐसे सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल दुनिया के 30 से अधिक देशों जैसे फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, सऊदी अरब, जापान, ब्राज़ील, रूस और दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर हैं।
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