रॉबर्ट वाड्रा को 3.5 एकड़ गुरुग्राम की ज़मीन रिश्वत में मिली, ईडी ने अदालत को बताया
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 17 जुलाई को दाखिल अपने आरोपपत्र (चार्जशीट) में दावा किया है कि रॉबर्ट वाड्रा को गुरुग्राम में 3.5 एकड़ का एक भूखंड रिश्वत के तौर पर मिला था, जबकि वाड्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए ₹7.5 करोड़ का भुगतान किया..
नयी दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 17 जुलाई को दाखिल अपने आरोपपत्र (चार्जशीट) में दावा किया है कि रॉबर्ट वाड्रा को गुरुग्राम में 3.5 एकड़ का एक भूखंड रिश्वत के तौर पर मिला था, जबकि वाड्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए ₹7.5 करोड़ का भुगतान किया था। सेक्टर 83 में स्थित यह ज़मीन बाद में वाड्रा ने डीएलएफ को ₹58 करोड़ में बेच दी।
ईडी ने अपने अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट — मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट) में आरोप लगाया है, “ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड (OPPL) ने यह ज़मीन स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (SLHPL) को बिना भुगतान के रिश्वत के रूप में दी, ताकि रॉबर्ट वाड्रा — जो SLHPL के निदेशक थे, अपनी व्यक्तिगत पहुंच का इस्तेमाल करते हुए OPPL को उसी गांव में हाउसिंग लाइसेंस दिलाने में मदद कर सकें। यह लाइसेंस तत्कालीन नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा से दिलाया जाना था क्योंकि वाड्रा (तत्कालीन) कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद हैं और भूपिंदर सिंह हुड्डा भी कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री थे।”
ईडी ने कहा, “इसलिए वाड्रा का भूपिंदर हुड्डा पर व्यक्तिगत प्रभाव था।” विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत ने वाड्रा को 28 अगस्त के लिए नोटिस जारी किया है ताकि शिकायत पर संज्ञान लेकर यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू की जा सके। वाड्रा के वकील से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गयी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
चार्जशीट का असर वाड्रा की पत्नी प्रियंका गांधी पर भी पड़ सकता है, जो नवंबर में वायनाड से लोकसभा के लिए चुनी गईं। अभियोजन शिकायत में कम-से-कम तीन महंगी संपत्तियों (कुल 39.7 एकड़, अमीपुर गांव, फरीदाबाद) का ज़िक्र है, जो कथित तौर पर वाड्रा की हैं, लेकिन प्रियंका गांधी ने इन्हें अपने चुनावी हलफ़नामे में घोषित नहीं किया।
इस कथित गैर-घोषणा को केरल हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसने उन्हें नोटिस जारी किया है। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत हलफ़नामे में झूठी या अधूरी जानकारी देना भ्रष्ट आचरण माना जाता है, जो अयोग्यता और यहां तक कि कारावास से दंडनीय है।
16 जुलाई को ईडी ने वाड्रा से जुड़ी ₹37 करोड़ से अधिक की संपत्तियां कुर्क करने की घोषणा की थी। अगले दिन, उसने गुरुग्राम ज़मीन सौदे के मामले में चार्जशीट दाखिल की। वाड्रा और 10 अन्य, जिनमें OPPL के प्रवर्तक-निदेशक सत्यानंद याजी और केवल सिंह विरक शामिल हैं, पर ₹58 करोड़ के “अपराध की आय” को मनी लॉन्ड्रिंग के ज़रिए छिपाने का आरोप है।
ईडी ने कम से कम 20 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें हरियाणा सरकार के अधिकारी और OPPL के प्रवर्तक शामिल हैं। इन गवाहों ने शुरू में दावा किया था कि वाड्रा ने ₹7.5 करोड़ का भुगतान किया, लेकिन ईडी ने इसे झूठा करार दिया।
ईडी ने गुरुग्राम पुलिस से वाड्रा के भुगतान दावे की जांच कराई। एक डीसीपी ने पाया कि 12 फरवरी 2008 को बिक्री विलेख संख्या 4928 के ज़रिए OPPL से SLHPL ने 3.53 एकड़ ज़मीन खरीदी। भुगतान चेक संख्या 607251 से दिखाया गया था, लेकिन यह चेक कभी नकद नहीं हुआ और छह महीने बाद किसी अन्य चेक से भुगतान किया गया।
डीसीपी ने कहा, “इस तरह, खरीदार कंपनी ने बिक्री विलेख में भुगतान को लेकर झूठा बयान दिया।”
ईडी के आरोपपत्र के अनुसार, यह बिक्री विलेख झूठे बयान पर आधारित था और बिक्री बेनामी थी। इस्तेमाल किया गया चेक स्काईलाइट रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड (SLRPL) का था, न कि खरीदार कंपनी SLHPL का, जिसकी पूंजी केवल ₹1 लाख थी। SLRPL के खाते में भी ₹7.5 करोड़ नहीं थे।
ईडी ने यह भी दावा किया कि ₹45 लाख की स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान विक्रेता (OPPL) ने किया, SLHPL ने नहीं।
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