सिख विरोधी दंगों में सज्जन कुमार को उम्रकैद..!

1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इससे पहले 21 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इस दौरान पीड़ित पक्ष ने सज्जन कुमार के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।

सिख विरोधी दंगों में सज्जन कुमार को उम्रकैद..!
26-02-2025 - 09:38 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

नयी दिल्ली। 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इससे पहले 21 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इस दौरान पीड़ित पक्ष ने सज्जन कुमार के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।

दोषी करार और सजा प्रक्रिया

इस मामले में अदालत ने 12 फरवरी को सज्जन कुमार को दोषी ठहराया था। इसके बाद तिहाड़ जेल प्रशासन से उनकी मानसिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति पर रिपोर्ट मांगी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, मृत्युदंड से जुड़े मामलों में इस तरह की रिपोर्ट आवश्यक होती है। भारतीय कानून के तहत हत्या के मामले में न्यूनतम सजा उम्रकैद और अधिकतम सजा मृत्युदंड हो सकती है।

क्या है पूरा मामला?

यह केस 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या से जुड़ा है। उस समय सज्जन कुमार बाहरी दिल्ली से कांग्रेस सांसद थे। इससे पहले भी वह सिख दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं और वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद हैं।

पीड़ित पक्ष की मांग

पीड़ित परिवार ने अदालत से सज्जन कुमार को मृत्युदंड देने की अपील की। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 1984 के दंगों के दौरान सज्जन कुमार ने भीड़ को भड़काया, जिससे उनके पति और बेटे की हत्या हुई। वरिष्ठ वकील एचएस फुल्का ने कहा कि सज्जन कुमार ने हिंसा और नरसंहार में भीड़ का नेतृत्व किया था, इसलिए उन्हें मृत्युदंड से कम कोई सजा नहीं मिलनी चाहिए।

हत्या और अन्य मामलों में दोष सिद्ध

जसवंत सिंह और उनके बेटे की हत्या 1 नवंबर 1984 को हुई थी। दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही सज्जन कुमार को दिल्ली कैंट के राज नगर इलाके में पांच अन्य सिखों की हत्या के लिए दोषी ठहरा चुका है। यह सभी हत्याएं सिख नरसंहार का हिस्सा थीं।

1984 दंगों की जांच और अब तक की कार्रवाई

1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए गठित नानावटी आयोग की रिपोर्ट के अनुसार,

  • दिल्ली में 587 एफआईआर दर्ज की गईं और 2,733 लोग मारे गए।
  • 240 मामले "अज्ञात" बताकर बंद कर दिए गए, जबकि 250 मामलों में आरोपी बरी हो गए।
  • सिर्फ 28 मामलों में दोष सिद्ध हुआ, जिसमें लगभग 400 लोगों को दोषी ठहराया गया और 50 लोगों को हत्या के मामले में सजा मिली।

सज्जन कुमार पर पहले भी 1 और 2 नवंबर 1984 को पालम कॉलोनी में पांच सिखों की हत्या का आरोप लगा था, जिसके लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा दी थी। इस फैसले के खिलाफ उनकी अपील अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।