फॉरेंसिक साइंस से ही तेज़ जांच और बढ़ती सज़ा दर संभव: गृहमंत्री अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को "अखिल भारतीय फॉरेंसिक साइंस समिट 2025" में कहा कि आधुनिक फॉरेंसिक साइंस और तकनीक का उपयोग आज के बॉर्डरलेस अपराधों से निपटने में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है।..
नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को "अखिल भारतीय फॉरेंसिक साइंस समिट 2025" में कहा कि आधुनिक फॉरेंसिक साइंस और तकनीक का उपयोग आज के बॉर्डरलेस अपराधों से निपटने में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल जांच की रफ्तार बढ़ेगी बल्कि देश की वर्तमान दोषसिद्धि दर (Conviction Rate) जो 54% है, उसे आने वाले वर्षों में 94% तक ले जाया जा सकता है।
पीएम मोदी की दूरदर्शिता का उल्लेख
शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार साल पहले ही फॉरेंसिक साइंस की बढ़ती आवश्यकता को भांप लिया था। वर्ष 2020 में एनएफएसयू (NFSU) की स्थापना इसी सोच का परिणाम था, जो अब तीन नए आपराधिक कानूनों के साथ और भी प्रासंगिक हो गया है।
एनएफएसयू के विस्तार की जानकारी
- अब तक 7 एनएफएसयू कैंपस देशभर में खोले जा चुके हैं।
- अगले छह महीनों में 9 नए कैंपस शुरू होंगे।
- 10 और प्रस्तावित कैंपस पाइपलाइन में हैं।
- इन सबके माध्यम से हर साल 36,000 प्रशिक्षित फॉरेंसिक विशेषज्ञ तैयार किए जाएंगे, जो कानून व्यवस्था को आधुनिक आधार देंगे।
फॉरेंसिक साइंस: न्याय व्यवस्था की रीढ़
शाह ने कहा कि तकनीक और साइंस की मदद से अपराधियों को जल्दी पकड़ा जा सकता है और निर्दोषों को राहत मिल सकती है। उन्होंने कहा नयी आपराधिक संहिताएं (BNS, BNSS, BSA) भी अब फॉरेंसिक रिपोर्ट को जांच का अनिवार्य हिस्सा मानती हैं।
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