शशि थरूर ने बीजेपी में शामिल होने की अटकलों को किया खारिज, कहा- 'मैं हमेशा क्लासिक लिबरल रहा हूं'
कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने कांग्रेस नेतृत्व के साथ मतभेदों की अफवाहों के बीच बीजेपी में शामिल होने की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह बीजेपी की विचारधारा से पूरी तरह असहमत हैं और हमेशा लिबरल और बहुलवादी मूल्यों में विश्वास करते रहे हैं।
नयी दिल्ली। कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने कांग्रेस नेतृत्व के साथ मतभेदों की अफवाहों के बीच बीजेपी में शामिल होने की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह बीजेपी की विचारधारा से पूरी तरह असहमत हैं और हमेशा लिबरल और बहुलवादी मूल्यों में विश्वास करते रहे हैं।
क्या कहा थरूर ने?
इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में थरूर ने कहा, "मैं हमेशा से एक क्लासिक लिबरल रहा हूं। मैं सांप्रदायिकता का विरोध करता हूं और सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक विकास में विश्वास रखता हूं।"
हाल ही में थरूर ने केरल की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार की औद्योगिक नीति की तारीफ की थी, जिससे कांग्रेस के भीतर ही उन्हें आलोचना झेलनी पड़ी। हालांकि, थरूर ने स्पष्ट किया कि वह अब भी कांग्रेस के प्रति वफादार हैं।
थरूर का भविष्य क्या होगा?
थरूर ने कहा कि अगर पार्टी उनकी सेवाओं का इस्तेमाल करना चाहती है, तो वह हमेशा तैयार हैं। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो उनके पास लेखन और वैश्विक मंचों पर व्याख्यान देने जैसे कई विकल्प मौजूद हैं।
केरल की राजनीति में थरूर क्यों हैं अलग-थलग?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, केरल की राजनीति में वो नेता सफल होते हैं जो स्थानीय मुद्दों से जुड़े होते हैं और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हैं।
थरूर का विदेशी शिक्षा और वैश्विक अनुभव उन्हें स्थानीय राजनीति में फिट नहीं बैठने देता।
कौन-कौन हैं थरूर के राजनीतिक विकल्प?
|
विकल्प |
संभावना |
|
कांग्रेस में बने रहना |
पार्टी भूमिका मिलने पर तैयार |
|
बीजेपी में शामिल होना |
विचारधारा में असहमति |
|
नई पार्टी बनाना |
केरल में राजनीतिक स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं |
|
एलडीएफ (वामपंथी मोर्चा) |
वामपंथी सरकार के कुछ फैसलों की तारीफ कर चुके हैं |
|
टीएमसी/आप |
राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं |
शशि थरूर का राजनीतिक भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। अगर कांग्रेस नेतृत्व उन्हें अहम भूमिका देता है, तो वह पार्टी के साथ रह सकते हैं। अन्यथा, वह केरल की राजनीति में कोई नई पार्टी बनाकर तीसरा विकल्प भी तलाश सकते हैं।
राजनीति में संभावनाओं की कला ही सबसे बड़ी ताकत होती है, और थरूर के लिए यह सफर अभी खत्म नहीं हुआ है।
What's Your Reaction?