इंग्लैंड के खिलाफ 371 रन नहीं बचा पाने पर बोले भारतीय कप्तान शुभमन गिल, "ये कभी अच्छा संकेत नहीं होता…"

अंत में इंग्लैंड के कप्तान को अपनी टीम की अंतिम पारी में बल्लेबाज़ी की क्षमता पर भरोसा था। और यही हुआ — तीन साल में दूसरी बार इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ 370 से अधिक रन का लक्ष्य हासिल कर लिया, और शुभमन गिल के बतौर कप्तान पहले ही टेस्ट मैच को कड़वी याद बना दिया..

इंग्लैंड के खिलाफ 371 रन नहीं बचा पाने पर बोले भारतीय कप्तान शुभमन गिल, "ये कभी अच्छा संकेत नहीं होता…"
25-06-2025 - 09:28 AM

लंदन। जब आप टेस्ट मैच के आखिरी दिन 350 रन डिफेंड कर रहे होते हैं, तो 10 में से 9 बार मैच गेंदबाजी टीम के पक्ष में ही जाता है — बशर्ते विरोधी टीम ड्रा के लिए खेलने का फैसला न कर ले। लेकिन इंग्लैंड की यह टीम अलग है। ये मुश्किल समय में भी आक्रामक ‘बैज़बॉल’ अंदाज़ में खेलती है। आप चाहें तो बेन स्टोक्स को पहले बल्लेबाज़ी का फैसला लेने के लिए दोष दे सकते हैं, लेकिन अंत में इंग्लैंड के कप्तान को अपनी टीम की अंतिम पारी में बल्लेबाज़ी की क्षमता पर भरोसा था। और यही हुआ — तीन साल में दूसरी बार इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ 370 से अधिक रन का लक्ष्य हासिल कर लिया, और शुभमन गिल के बतौर कप्तान पहले ही टेस्ट मैच को कड़वी याद बना दिया।

भारत को खुद से ही शिकायत होनी चाहिए।
पाँच व्यक्तिगत शतकों के बावजूद भारत यह टेस्ट हार गया, दो बार निचले क्रम का बिखराव और कई कैच छोड़ने ने मैच हाथ से छीन लिया। इसके उलट इंग्लैंड की निचली क्रम की बल्लेबाज़ी ने जरूरी रन जोड़े और हर मौके को भुनाया। मैच के बाद कप्तान शुभमन गिल ने टीम की जुझारू भावना की तारीफ की, लेकिन ये भी माना कि इससे टीम की खामियां छुप नहीं सकतीं।

शुभमन गिल ने मैच के बाद माइकल एथर्टन से बातचीत में कहा, एक शानदार टेस्ट था, हमारे पास मौके थे। कैच छूटे और निचला क्रम योगदान नहीं दे सका, इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ा। कल हम सोच रहे थे कि इंग्लैंड को 430 का लक्ष्य देंगे, लेकिन आखिरी विकेट सिर्फ 25 रन जोड़ पाए। आज भी शुरुआत में एक शानदार विकेट के बाद हमें मौका मिला, लेकिन कैच हाथ में नहीं गया। पहली पारी में जो बिखराव हुआ उस पर हमने बात की, लेकिन आगे उसे सुधारना होगा। ये कभी अच्छा संकेत नहीं होता। ऐसी पिचों पर मौके आसानी से नहीं मिलते, लेकिन हमारी टीम युवा है, सीख रही है। उम्मीद है हम इसमें सुधार करेंगे। पहले सत्र में हमने एकदम सटीक गेंदबाज़ी की, रन नहीं दिए, लेकिन जैसे ही गेंद पुरानी होती है, रन रोकना मुश्किल हो जाता है। जब गेंद नरम हो जाती है, तब भी विकेट लेते रहना ज़रूरी है।”

अगर कैच पकड़े गए होते, तो शायद नतीजा कुछ और होता…
भारत ने पूरे मैच में छह से अधिक कैच छोड़े, जिनमें सबसे बड़ा दोषी यशस्वी जायसवाल रहे — उन्होंने पहले पारी में तीन और दूसरी में एक कैच छोड़ा। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया के एमसीजी टेस्ट में तीन और ड्रॉप कैच के साथ उनके नाम चिंता की लकीरें और गहरी हो गई हैं।

सिर्फ कैच ही नहीं, भारत की पहली पारी में अंतिम 7 विकेट 41 रन पर और दूसरी पारी में 6 विकेट 21 रन पर गिर गए। इन दोनों पारियों में भारत ने करीब 100 रन गंवा दिए जो बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकते थे। अगर भारत कैच पकड़ता और निचला क्रम धैर्य से खेलता, तो शायद कहानी कुछ और होती।

तीन सत्रों में मिला-जुला प्रदर्शन
भारत के लिए पहला सत्र बिना विकेट के बीता, जबकि मौसम बादलों से भरा था लेकिन पिच से गेंदबाज़ों को कोई मदद नहीं मिली। इसका फायदा डकेट और क्रॉली ने उठाया और आसानी से रन बनाए। जसप्रीत बुमराह, जिनसे भारत को सबसे ज़्यादा उम्मीद थी, एक भी विकेट नहीं ले सके। बादलों के खुलने के बाद ही भारत को पहला विकेट मिला, जब प्रसिद्ध कृष्णा ने क्रॉली को आउट किया। प्रसिद्ध और शार्दूल ठाकुर ने दो-दो विकेट लिए। रवींद्र जडेजा ने रफ से टर्न हासिल की, लेकिन उन्हें सिर्फ बेन स्टोक्स का विकेट मिला। अंत में जो रूट की हाफ सेंचुरी और जैमी स्मिथ की निर्भीक बल्लेबाज़ी ने इंग्लैंड को जीत दिला दी।

पहले सत्र में हम बहुत कसे हुए थे, रन नहीं दिए। लेकिन जैसे ही गेंद पुरानी होती है, रन रोकना मुश्किल हो जाता है। जब गेंद नरम हो जाती है, तब भी विकेट लेते रहना ज़रूरी होता है। रवींद्र जडेजा ने बेहतरीन गेंदबाज़ी की और मौके भी बनाए।” — शुभमन गिल
शुभमन गिल का बतौर कप्तान पहला टेस्ट मैच निराशाजनक रहा। भारत ने कई मौके गवाएं, खासतौर पर फील्डिंग और निचले क्रम की बल्लेबाज़ी में, जिन पर सुधार ज़रूरी है। कप्तान के रूप में गिल का आत्मनिरीक्षण और ईमानदारी उम्मीद जगाते हैं कि आने वाले समय में यह युवा टीम इन गलतियों से सीखेगी।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।