‘कुछ तो गड़बड़ है’: बिहार में असामान्य आधार डेटा को लेकर भाजपा नेता अमित मालवीय ने उठाए सवाल
भाजपा नेता अमित मालवीय ने गुरुवार को कहा कि बिहार के कुछ मुस्लिम-बहुल जिलों में आधार की संतृप्ति (Aadhaar saturation) 100 प्रतिशत से भी अधिक है, जो संभवत: 12 अंकों वाली व्यक्तिगत पहचान संख्या (आधार) से जुड़ी गड़बड़ियों की ओर इशारा करता..
नयी दिल्ली। भाजपा नेता अमित मालवीय ने गुरुवार को कहा कि बिहार के कुछ मुस्लिम-बहुल जिलों में आधार की संतृप्ति (Aadhaar saturation) 100 प्रतिशत से भी अधिक है, जो संभवत: 12 अंकों वाली व्यक्तिगत पहचान संख्या (आधार) से जुड़ी गड़बड़ियों की ओर इशारा करता है। यह पहचान संख्या भारत के निवासियों के लिए पहचान और पते का प्रमाण होती है।
भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया मंच X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "कुछ तो गड़बड़ है..."
यह टिप्पणी उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) के उस निर्णय का समर्थन करते हुए की, जिसमें बिहार में विशेष पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision - SIR) के दौरान लगभग आठ करोड़ मतदाताओं के लिए आधार को जन्म और निवास का प्रमाण मानने से इनकार किया गया है।
मालवीय ने दावा किया कि बिहार के जिन जिलों में मुस्लिम आबादी अधिक है, वहां आधार कार्ड की संख्या आबादी से भी अधिक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया..
- किशनगंज में आधार संतृप्ति – 126%
- कटिहार में – 123%
- अररिया में – 123%
- पूर्णिया में – 121%
जबकि पूरे बिहार की औसत आधार संतृप्ति 94 प्रतिशत है।
मालवीय ने कहा कि इन जिलों में मुस्लिम आबादी इस प्रकार है..
- किशनगंज – 68%
- कटिहार – 44%
- अररिया – 43%
- पूर्णिया – 38%
"अब सवाल उठता है कि ये अतिरिक्त आधार कार्ड किसके लिए बनाए गए और क्यों?", मालवीय ने पूछा। उन्होंने संकेत दिया कि ये फर्जी या अवैध आधार कार्ड हो सकते हैं।
भाजपा के पश्चिम बंगाल सह-प्रभारी मालवीय ने यह भी चिंता जताई कि ऐसा ही कुछ पश्चिम बंगाल में भी हो सकता है, जहां तृणमूल कांग्रेस की सरकार है।
उन्होंने लिखा, "अब सोचिए, पश्चिम बंगाल में क्या हालात होंगे। ममता बनर्जी तो पहले से ही परेशान हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "ये अतिरिक्त आधार कार्ड किसे और क्यों जारी किए जा रहे हैं? यही कारण है कि विपक्ष और वामपंथी लॉबी आधार को नागरिकता का प्रमाण बनाने के लिए इतनी बेताब है!"
हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर बांग्लादेशी घुसपैठियों का जिक्र नहीं किया, पर उनका इशारा इसी ओर था।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और SIR का उद्देश्य
चुनाव आयोग द्वारा 24 जून से शुरू किए गए विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) के दौरान, यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि..
- योग्य नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में जोड़े जाएं, और
- अयोग्य नाम हटाए जाएं।
विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे खारिज करते हुए भरोसा दिलाया है कि यह अभियान समय पर और पारदर्शी तरीके से पूरा होगा।
पिछली बार बिहार में ऐसा अभियान साल 2003 में चला था। इस बार लगभग 7.90 करोड़ मतदाताओं की जांच हो रही है।
चुनाव आयोग के अनुसार, मतदाता सूची में नाम की पुष्टि के लिए कम से कम 11 दस्तावेजों में से एक अनिवार्य है लेकिन आधार उनमें शामिल नहीं है।
बिहार में अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों में 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए नए प्रतिनिधि चुने जाएंगे।
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