भारत-पाक सीज़फायर पर डोनाल्ड ट्रंप के दावे से 'रणनीतिक विश्वास' को खतरा: पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम को अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश करना चाह रहे हों, लेकिन पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन के अनुसार, ट्रंप के इस घमंड की कीमत अरबों डॉलर और वर्षों की रणनीतिक विश्वसनीयता में चुकानी पड़ सकती है..
वॉशिंग्टन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम को अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश करना चाह रहे हों, लेकिन पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन के अनुसार, ट्रंप के इस घमंड की कीमत अरबों डॉलर और वर्षों की रणनीतिक विश्वसनीयता में चुकानी पड़ सकती है।
रुबिन ने वॉशिंगटन एग्ज़ामिनर में लिखा, "यह कहते हुए कि वह व्यापार का इस्तेमाल करके लड़ाई रुकवा सकते हैं, ट्रंप ने न सिर्फ आतंक का समर्थन करने वाले पाकिस्तान और आतंक का शिकार भारत के बीच नैतिक समानता स्थापित कर दी, बल्कि भारत को यह संकेत भी दे दिया कि भविष्य में अमेरिकी नेताओं की मनमर्जी उसके रक्षा आपूर्ति तंत्र को खतरे में डाल सकती है।"
रुबिन की यह आलोचना उस समय सामने आई है जब ट्रंप बार-बार यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभाई। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने दोनों देशों को व्यापार लाभ रोकने की धमकी देकर संघर्ष रोकने को कहा।
ट्रंप ने कहा, "मैंने कहा – इसे रोकिए। अगर आप रुकते हैं, तो हम व्यापार करेंगे। अगर आप नहीं रुकते, तो कोई व्यापार नहीं होगा।" उन्होंने कहा, "लोगों ने कभी व्यापार का इस्तेमाल वैसे नहीं किया जैसे मैंने किया।" लेकिन, रुबिन का मानना है कि इस तरह की बातें भारत और अमेरिका के बीच दशकों से बनते जा रहे रणनीतिक संबंधों को नुकसान पहुंचाती हैं।
उन्होंने लिखा, "राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश से लेकर जो बाइडन तक, हर प्रशासन के साथ भारत-अमेरिका संबंध और मज़बूत हुए हैं। दोनों देशों की साझेदारी 21वीं सदी की रणनीतिक धुरी बनती दिख रही थी।"
रुबिन के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से गुटनिरपेक्ष और रूस पर रक्षा निर्भरता रखने वाला भारत अब अमेरिका की ओर झुक रहा है। भारत अमेरिकी एफ-35 स्टेल्थ फाइटर जैसे हथियारों की खरीद पर बातचीत कर रहा है।
रुबिन ने बताया, "रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के बाद भारत को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ा। यूक्रेन युद्ध में फंसे रूस ने भारत को विमान इंजन और हथियारों की डिलीवरी में कई अरब डॉलर की आपूर्ति रोक दी है।"
ट्रंप ने भी फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि भविष्य में "कई अरब डॉलर" के रक्षा सौदे होंगे।
लेकिन अब रुबिन का कहना है कि ट्रंप के व्यापार को 'हथियार' बनाने की धमकी से भारत का विश्वास कमजोर हुआ है।
रुबिन ने लिखा, "ट्रंप ने अमेरिकी रक्षा कर्मियों को नीचा दिखाकर फ्रांस को महान बनाने की कोशिश की है। कभी-कभी घमंड की कीमत अरबों डॉलर हो सकती है।"
ट्रंप ने संघर्षविराम को अपनी कूटनीतिक जीत बताया था। "कुछ दिन पहले ही मेरे प्रशासन ने ऐतिहासिक संघर्षविराम करवाया।"
हालांकि भारत ने स्पष्ट रूप से इस दावे को नकार दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में अमेरिका की किसी भी भूमिका का कोई ज़िक्र नहीं किया।
इस बीच, अमेरिकी विदेश विभाग ने ट्रंप के बयानों को संयमित करने की कोशिश की और दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष वार्ता की वकालत की।
विदेश विभाग के प्रमुख उप प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा, "हम संघर्षविराम को देखकर खुश हैं। हम चाहते हैं कि दोनों पक्ष आपसी बातचीत करें। राष्ट्रपति एक शांति-दूत हैं और हम शांति की इस प्रगति का स्वागत करते हैं। हमें उम्मीद है कि यह संघर्षविराम बना रहेगा।"
भारत ने फिर से दोहराया कि किसी तीसरे पक्ष की भूमिका, चाहे वह बयानबाज़ी ही क्यों न हो, स्वीकार्य नहीं है।
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