भारत पर ट्रंप का दावा निकला झूठा: अमेरिकी दूतावास ने 21 मिलियन डॉलर के USAID फंडिंग दावे को नकारा; राज्यसभा में विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी
विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को राज्यसभा को बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए गए उस दावे का अमेरिकी दूतावास ने खंडन किया है, जिसमें कहा गया था कि USAID ने भारत में मतदाता भागीदारी बढ़ाने के लिए 21 मिलियन डॉलर आवंटित..
नयी दिल्ली। विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को राज्यसभा को बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए गए उस दावे का अमेरिकी दूतावास ने खंडन किया है, जिसमें कहा गया था कि USAID ने भारत में मतदाता भागीदारी बढ़ाने के लिए 21 मिलियन डॉलर आवंटित किए थे।
राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में विदेश राज्य मंत्री किर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने भारत सरकार को औपचारिक रूप से सूचित किया है कि “USAID/India को 2014 से 2024 के बीच भारत में मतदाता भागीदारी बढ़ाने के लिए 21 मिलियन डॉलर की कोई फंडिंग न तो मिली और न ही प्रदान की गई। न ही इस अवधि में भारत में मतदाता भागीदारी से संबंधित कोई गतिविधि लागू की गई।”
यह स्पष्टीकरण तब सामने आया जब फरवरी 2025 में अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि उसने USAID की वैश्विक स्तर पर 486 मिलियन डॉलर की फंडिंग रद्द कर दी है, जिसमें कथित तौर पर भारत में “मतदाता भागीदारी बढ़ाने” के लिए 21 मिलियन डॉलर का प्रावधान भी शामिल बताया गया था। ट्रंप ने खुद इसे अमेरिकी सहायता के दुरुपयोग का उदाहरण बताया था।
विदेश मंत्रालय ने यह भी पुष्टि की कि भारत में USAID का संचालन बंद कर दिया गया है। 11 अगस्त को अमेरिकी दूतावास ने भारत सरकार को सूचित किया कि सरकार के साथ उसकी सभी 7 साझेदारी समझौते (Partnership Agreements) वाशिंगटन के USAID को विश्व स्तर पर समाप्त करने के फैसले के तहत बंद कर दिए गए हैं।
संसद में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 2024 के बीच भारत में USAID फंडिंग का उपयोग तिब्बती समुदायों के समर्थन, वंचित बच्चों की शिक्षा, वायु प्रदूषण कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और एचआईवी/एड्स रोकथाम जैसे कार्यक्रमों में हुआ। लेकिन चुनाव या मतदाता भागीदारी से जुड़े किसी कार्यक्रम के लिए कोई फंडिंग नहीं दी गई।
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