Delhi High Court की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने Karti Chidambaram की याचिका की सुनवाई से खुद को अलग किया

Delhi High Court की न्यायाधीश जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने मंगलवार को कांग्रेस सांसद Karti Chidambaram द्वारा दायर उस याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें उन्होंने Central Bureau of Investigation (CBI) द्वारा दर्ज एक मामले को रद्द करने की मांग..

Delhi High Court की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने Karti Chidambaram की याचिका की सुनवाई से खुद को अलग किया
30-04-2026 - 10:17 AM

नयी दिल्ली। Delhi High Court की न्यायाधीश जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने मंगलवार को कांग्रेस सांसद Karti Chidambaram द्वारा दायर उस याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें उन्होंने Central Bureau of Investigation (CBI) द्वारा दर्ज एक मामले को रद्द करने की मांग की है। यह मामला कथित रूप से Diageo स्कॉटलैंड से जुड़े रिश्वत प्रकरण से संबंधित है।

जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने संक्षिप्त आदेश में कहा, “मामले को दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए,” और सुनवाई से अलग हो गईं।

यह याचिका Central Bureau of Investigation (CBI) द्वारा दर्ज एफआईआर को चुनौती देती है, जिसमें आरोप है कि चिदंबरम ने शुल्क-मुक्त बिक्री पर लगे प्रतिबंध के बाद एक शराब कंपनी को राहत दिलाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया। इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित है।

अपनी याचिका में Karti Chidambaram ने तर्क दिया है कि एफआईआर पूरी तरह त्रुटिपूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित है। उन्होंने इसे “अत्यधिक देरी” का मामला बताते हुए 1 जनवरी 2025 को दर्ज एफआईआर को “अवैध” करार दिया और आरोप लगाया कि यह “राजनीतिक बदले की भावना” से प्रेरित है।

याचिका के अनुसार, आरोप 2004 से 2010 के बीच की अवधि से जुड़े हैं, जबकि एफआईआर लगभग दो दशक बाद दर्ज की गई। याचिका में कहा गया है, “विवादित एफआईआर दर्ज करने में अत्यधिक देरी हुई है… जबकि इसे 2025 में, यानी लगभग 20 साल बाद दर्ज किया गया।”

यह मामला 2018 में शुरू की गई प्रारंभिक जांच से जुड़ा है, जो पूर्व वित्त मंत्री P. Chidambaram (याचिकाकर्ता के पिता) के कार्यकाल के दौरान विदेशी निवेश मंजूरी में कथित अनियमितताओं से संबंधित था। एफआईआर में कटरा होल्डिंग्स, एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (ASCPL), चिदंबरम और अन्य के नाम शामिल हैं।

CBI का आरोप है कि संदिग्ध भुगतान ASCPL को भेजे गए, जिसे एफआईआर में चिदंबरम और उनके सहयोगी के नियंत्रण वाली इकाई बताया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, ये लेन-देन 2005 में India Tourism Development Corporation (ITDC) द्वारा कुछ आयातित शराब ब्रांड्स की ड्यूटी-फ्री बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को हटवाने के प्रयासों से जुड़े थे। इस प्रतिबंध का Diageo के भारत में कारोबार, विशेषकर जॉनी वॉकर व्हिस्की की बिक्री पर बड़ा असर पड़ा था।

चिदंबरम की कानूनी टीम ने जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। याचिका में कहा गया है कि बिना सक्षम प्राधिकरण की पूर्व अनुमति के अज्ञात सरकारी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जो कानूनन गलत है। साथ ही, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत आवश्यक मंजूरी भी जांच शुरू करने से पहले नहीं ली गई।

इसके अलावा, याचिका में दावा किया गया है कि प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता और आरोपों में स्पष्टता का अभाव है। इसमें कहा गया है कि याचिकाकर्ता किसी भी प्रारंभिक जांच का हिस्सा नहीं थे और न ही किसी ऐसे सरकारी अधिकारी का नाम बताया गया है, जिसे उन्होंने प्रभावित किया हो।

हालांकि, Central Bureau of Investigation (CBI) का कहना है कि उसकी जांच से व्यापक साजिश के संकेत मिलते हैं, जिसमें वित्तीय लेन-देन को कंसल्टेंसी व्यवस्था के रूप में छिपाया गया था।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।