ईरान युद्ध के बीच रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका ने भारत को दी अस्थायी छूट..कहा, भारत ‘जिम्मेदार भागीदार’
संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए अस्थायी छूट दी है। अमेरिका ने कहा कि भारत को यह छूट इसलिए दी गई क्योंकि वह एक “जिम्मेदार भागीदार (Good Actor)” रहा है और पहले वॉशिंगटन के अनुरोध पर प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीद कम..
वॉशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए अस्थायी छूट दी है। अमेरिका ने कहा कि भारत को यह छूट इसलिए दी गई क्योंकि वह एक “जिम्मेदार भागीदार (Good Actor)” रहा है और पहले वॉशिंगटन के अनुरोध पर प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीद कम कर चुका है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव करोलिन लेविट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, ट्रेजरी विभाग और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि भारत पहले भी प्रतिबंधित रूसी तेल की खरीद रोक चुका है और अमेरिका के साथ सहयोग करता रहा है।
ईरान युद्ध के बाद बढ़े तेल और गैस के दाम
ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित कर लिया, जहां से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है।
इस स्थिति के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और एलएनजी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है।
लेविट ने कहा कि अमेरिका ने भारत को उस रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी है जो पहले से समुद्र में था, ताकि वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतों पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके।
उन्होंने कहा, “ईरान की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति में जो अस्थायी कमी आई है, उसे संतुलित करने के लिए भारत को सीमित समय के लिए रूसी तेल स्वीकार करने की अनुमति दी गई है।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम अल्पकालिक है और इससे रूस सरकार को कोई बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की संभावना नहीं है।
30 दिन की अस्थायी छूट
पिछले सप्ताह अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने घोषणा की थी कि भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की ऊर्जा नीति के कारण अमेरिका में तेल और गैस उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारतीय रिफाइनरियों को यह अस्थायी छूट दी गई है।
बेसेंट ने भारत को अमेरिका का “महत्वपूर्ण साझेदार” बताते हुए उम्मीद जताई कि नई दिल्ली भविष्य में अमेरिकी तेल की खरीद भी बढ़ाएगा।
खाड़ी देशों में हमलों से प्रभावित हुई तेल आपूर्ति
यह छूट ऐसे समय में दी गई है जब खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल हमलों के कारण कई बड़े तेल उत्पादन केंद्र प्रभावित हुए हैं। इनमें सऊदी अरामको की रस तनूरा रिफाइनरी और रुमैला तेल क्षेत्र भी शामिल हैं।
ये हमले पिछले सप्ताह शुरू हुए उस संघर्ष के दौरान हुए जिसमें ईरान, इज़राइल और अमेरिका आमने-सामने आ गए हैं।
रूस से तेल खरीदने वाला बड़ा देश है भारत
रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। हालांकि इस साल की शुरुआत में वॉशिंगटन के दबाव के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी थी।
इसके बाद अमेरिका ने भारत पर लगाए गए कुछ टैरिफ भी कम किए। साथ ही दोनों देशों के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौता भी हुआ है, जिसके तहत रूस पर ऊर्जा निर्भरता कम करने की शर्त शामिल है।
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