"अनावश्यक हमले": भारत-पाक संघर्षविराम के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री पर ट्रोलिंग की संसदीय समिति ने निंदा की
भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम समझौते के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर हो रहे ऑनलाइन हमलों की संसदीय स्थायी समिति (विदेश मामलों पर) ने सोमवार को सर्वसम्मति से निंदा की..
नयी दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम समझौते के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर हो रहे ऑनलाइन हमलों की संसदीय स्थायी समिति (विदेश मामलों पर) ने सोमवार को सर्वसम्मति से निंदा की।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भाजपा, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, AIMIM सहित विभिन्न दलों के 23 सांसदों की रिकॉर्ड उपस्थिति रही।
बैठक में क्या हुआ?
बैठक में विदेश सचिव मिस्री ने समिति को पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ हुए सैन्य टकराव, भारत की "ऑपरेशन सिन्दूर" के तहत की गई जवाबी कार्रवाई और 10 मई को हुए संघर्षविराम समझौते के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह संघर्ष थल, वायु और समुद्र—तीनों क्षेत्रों में हुआ, लेकिन यह पारंपरिक सैन्य सीमा के भीतर रहा।
बैठक के बाद शशि थरूर ने पत्रकारों से कहा, "यह बहुत ही विस्तृत और गंभीर चर्चा थी। समिति के कई सदस्यों ने यह प्रस्ताव भी रखा कि विदेश सचिव के समर्थन में एक प्रस्ताव पारित किया जाए, लेकिन खुद मिस्री जी ने यह कहकर मना कर दिया कि इसकी आवश्यकता नहीं है। फिर भी समिति में सर्वसम्मति से यह भावना रही कि उन्होंने राष्ट्र के लिए उत्कृष्ट सेवा की है और हम सभी उनके साथ खड़े हैं।"
ट्रोलिंग और समर्थन
संघर्षविराम की घोषणा के बाद विक्रम मिस्री और उनके परिवार को सोशल मीडिया पर निजी हमलों और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा।
इसके बाद IAS, IRS (C&IT), और IRTS एसोसिएशन जैसे कई सिविल सेवा संगठनों ने उनके समर्थन में बयान दिए।
IAS एसोसिएशन ने "X" (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, "कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदारी से काम करने वाले सिविल सेवकों पर व्यक्तिगत हमले बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं... हम लोक सेवा की गरिमा की रक्षा करने के अपने संकल्प को दोहराते हैं।"
समिति में और क्या मुद्दे उठे?
- पाकिस्तान द्वारा चीनी सैन्य प्लेटफॉर्मों के उपयोग पर सवाल पूछे गए, जिनके जवाब में मिस्री ने कहा, "इससे फर्क नहीं पड़ता, भारत ने पाकिस्तान के एयरबेस को कुचल दिया।"
- तुर्की की विरोधात्मक भूमिका पर भी चर्चा हुई। इस पर मिस्री ने कहा कि तुर्की परंपरागत रूप से भारत का समर्थन नहीं करता रहा है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कथित हस्तक्षेप पर भी बात हुई, जिस पर मिस्री ने विपक्ष की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा, "अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस मामले में मुझसे अनुमति नहीं ली थी।"
समिति ने स्पष्ट रूप से कहा कि विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने राष्ट्रीय हित में निष्पक्ष और निर्णायक भूमिका निभाई है, और उनके खिलाफ हो रही ट्रोलिंग अनुचित और निंदनीय है।
देश की सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने इस संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर देखा और विदेश सचिव के साथ एकजुटता दिखाई।
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