वक्फ संशोधन 'संविधान पर हमला' है: कांग्रेस

कांग्रेस ने रविवार को विवादास्पद वक्फ कानून संशोधनों को संविधान पर हमला बताया और आरोप लगाया कि यह भारत में सदियों पुराने सामाजिक सौहार्द के संबंधों को क्षति पहुंचाने का प्रयास है।

वक्फ संशोधन 'संविधान पर हमला' है: कांग्रेस
24-03-2025 - 02:41 PM

नयी दिल्ली। कांग्रेस ने रविवार को विवादास्पद वक्फ कानून संशोधनों को संविधान पर हमला बताया और आरोप लगाया कि यह भारत में सदियों पुराने सामाजिक सौहार्द के संबंधों को क्षति पहुंचाने का प्रयास है।

पार्टी के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने एक प्रेस बयान में कहा कि यह विधेयक "गंभीर रूप से दोषपूर्ण" है और यह भारतीय जनता पार्टी की अल्पसंख्यक समुदायों को बदनाम करने की रणनीति का हिस्सा है, जिसमें "झूठा प्रचार फैलाकर और पूर्वाग्रह पैदा कर" उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हमारी बहुधार्मिक समाज व्यवस्था में सदियों पुराने सामाजिक सौहार्द को खत्म करना है।

'धार्मिक मामलों के प्रबंधन का अधिकार छीनने की कोशिश'

रमेश ने कहा कि पिछले कानूनों द्वारा स्थापित संस्थाएंजैसे कि राष्ट्रीय परिषद, राज्य बोर्ड और अधिकरण (ट्रिब्यूनल)—जो वक्फ की निगरानी करती थीं, उनकी संरचना, अधिकार और प्रतिष्ठा को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि समुदाय से अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार छीन लिया जाए।

उन्होंने यह भी दावा किया कि विधेयक में जानबूझकर "स्पष्टता की कमी" रखी गई है कि कौन वक्फ उद्देश्य के लिए भूमि दान कर सकता है, जिससे वक्फ की मूल परिभाषा ही बदल दी गई है

उन्होंने कहा, न्यायपालिका द्वारा विकसित 'वक्फ बाय यूजर' (Waqf by User) की अवधारणा, जो लंबे, निरंतर और बिना बाधा के धार्मिक उपयोग पर आधारित थी, अब समाप्त की जा रही है। मौजूदा कानूनों की कई धाराओं को बिना किसी कारण के हटाया जा रहा है, ताकि वक्फ प्रबंधन को कमजोर किया जा सके।

रमेश ने आगे आरोप लगाया कि नए कानून में अब ऐसे कानूनी प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं जो वक्फ की ज़मीन पर कब्ज़ा करने वालों को बचाव देने का काम करेंगे।

कलेक्टर को 'बहुपरिभाषित अधिकार' दिए गए: कांग्रेस

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि विधेयक में राज्य सरकार के कलेक्टर व अन्य अधिकारियों को विवादों के मामलों में व्यापक अधिकार दिए गए हैं, चाहे वह वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण से जुड़ा मामला हो या उन्हें अमान्य घोषित करने का अधिकार।

रमेश ने कहा, अब कोई भी व्यक्ति, केवल शिकायत या यह आरोप लगाकर कि संबंधित वक्फ संपत्ति सरकारी है, कलेक्टर से उसे अमान्य घोषित करा सकता है। अंतिम निर्णय तक वक्फ की स्थिति अनिश्चित रहेगी।

JPC की रिपोर्ट पर भी उठाए सवाल

रमेश का यह बयान तब आया है जब संसदीय संयुक्त समिति (JPC) ने वक्फ संशोधन विधेयक पर अपनी रिपोर्ट हाल ही में संसद के दोनों सदनों में सौंपी है। यह 31-सदस्यीय समिति 9 अगस्त 2023 को लोकसभा में विधेयक पेश होने के एक दिन बाद गठित की गई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि JPC की 428-पृष्ठीय रिपोर्ट बिना किसी विस्तृत चर्चा के जबरन पारित कर दी गई, और इसमें संसदीय प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ है।

उन्होंने कहा, “JPC की रिपोर्ट में विपक्ष द्वारा दिए गए सभी संशोधनों को खारिज कर दिया गया, और भाजपा व उसकी सहयोगी पार्टियों द्वारा दिए गए संशोधन स्वीकार कर लिए गए।”

'वक्फ बाय यूजर' को लेकर भाजपा का संशोधन

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा प्रस्तुत एक संशोधन में स्पष्ट किया गया कि 'वक्फ बाय यूजर' की अवधारणा वर्तमान वक्फ संपत्तियों पर लागू रहेगी और नए कानून के तहत इसे चुनौती नहीं दी जा सकेगी

वक्फ बाय यूजर’ का तात्पर्य उस संपत्ति से है जिसका कोई औपचारिक घोषणा या पंजीकरण वक्फ के रूप में नहीं हुआ, लेकिन धार्मिक उपयोग के कारण वह वक्फ मानी जाती है।

हालांकि, स्पष्ट कर दें कि JPC की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होतीं

सरकार बनाम विपक्ष: कानून का उद्देश्य

विधेयक, जो पिछले मानसून सत्र में सरकार द्वारा पेश किया गया था, वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन कर राज्य वक्फ बोर्डों की शक्तियों, वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण और अवैध कब्जे हटाने से जुड़े प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव करता है।

सरकार का कहना है कि यह विधेयक नियमों को आधुनिक और एकरूप बनाने के उद्देश्य से लाया गया है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि यह धार्मिक अधिकारों और संविधान पर हमला है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।