‘आईएनएस जटायु’ से पहले ही बौखलाए मुइज्जू! मालदीव की सीमा की निगरानी का दिया आदेश
<p>मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने देश के सीमाओं की चैबीसों घंटे निगरानी का आदेश दिया है। मुइज्जू ने कहा है कि उन्होंने निगरानी प्रणाली की स्थापना के लिए काम शुरू करने का आदेश दिया है। मुइज्जू का यह आदेश लक्षद्वीप में भारतीय नौसैनिक बेस आईएनएस जटायु के उद्घाटन के ठीक पहले आया है।</p>
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत से लगती अपने देश की सीमा की चैबीसों घंटे निगरानी का आदेश दिया है। इसके लिए उन्होंने निगरानी प्रणाली को स्थापित करने के लिए काम शुरू करने का आदेश भी दे दिया है। उनका यह आदेश लक्षद्वीप के मिनिकाॅय द्वीप पर भारतीय नौसेना के बेस आईएनएस जटायु के उद्घाटन के कुछ दिनों पहले ही आया है। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने एक दिन पहले ही बयान जारी कर बताया है कि लक्षद्वीप के मिनिकोय द्वीप पर बने आईएनएस जटायु बेस का उद्घाटन 6 मार्च को किया जाएगा। इसे हिंद महासागर में भारत की बढ़ती रणनीतिक उपस्थिति के तौर पर देखा जा रहा है।
मालदीव की सीमा की निगरानी पर दिया जोर
मुइज्जू ने शनिवार को अपनी यात्रा के दौरान रा एटोल मीधू के स्थानीय लोगों से बात करते हुए कहा कि समुद्र का क्षेत्रफल मालदीव की पूरी भूमि से दोगुना बड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि मालदीव अपने विशाल क्षेत्र के बावजूद अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र पर नियंत्रण नहीं रख पाया है। उन्होंने कहा, ‘हालांकि ईईजेड (एक्सक्लूसिव इकनॉमिक जोन) हमारे क्षेत्र का हिस्सा है, लेकिन हमारे पास क्षेत्र की निगरानी करने की क्षमता नहीं है। जबकि इस क्षेत्र का उपयोग मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों में वृद्धि के माध्यम से अर्थव्यवस्था का विस्तार करने के लिए किया जा सकता है।’
मुइज्जू ने संप्रभुता का अलापा राग
उन्होंने कहा, ‘अल्लाह ने चाहा तो हमारा काम ख्मालदीव के पानी की निगरानी के लिए, मार्च में शुरू होगा। हम इस महीने के दौरान 24 गुणा 7 निगरानी प्रणाली स्थापित करेंगे।’ मुइज्जू ने यह भी कहा कि इस प्रणाली की स्थापना से मालदीव को सुरक्षा और संप्रभुता का एहसास होगा। मालदीव तटरक्षक वर्तमान में पड़ोसी देशों की सेनाओं से नियमित सहायता लेता है, और विदेशी सहयोगियों के साथ कुछ विशेष गश्ती अभियान चलाता है। मुइज्जू शुरू से ही संप्रभुता का राग अलापते रहते हैं। उन्होंने मालदीव की सेना के लिए आधुनिक हथियार और उपकरण की सुविधा प्रदान करने का वादा किया है।
चीनी निगरानी उपकरण तो नहीं लगा रहे मुइज्जू?
मालदीव के पास ऐसी क्षमता नहीं है कि वह चैबीसों घंटे समुद्री सीमा की निगरानी रखने वाले किसी उपकरण का निर्माण कर सके। पड़ोसी भारत के पास ऐसी क्षमता है, लेकिन मुइज्जू इससे बचना चाहेंगे। ऐसे में मुइज्जू के पास चीन के तौर पर एक विकल्प मौजूद है। आशंका है कि मुइज्जू के चीन दौरे पर मालदीव में ऐसा निगरानी उपकरण स्थापित करने पर सहमति बनी थी, जिसे मालदीव की सरकार ने गुप्त रखा है। अगर चीन का निगरानी उपकरण मालदीव में स्थापित होता है तो इससे भारत की भी जासूसी की जा सकती है।
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