जलजले के बाद तुर्की और सीरिया में अब तक दर्द, चीखें, दुःख.. और मदद की पुकार

<p><em><strong>तुर्की और सीरिया में भूकंप के कारण अब तक 4800 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। आपदा प्रबंधन एजेंसी का कहना है कि तुर्की में ही करीब 3381 लोगों की मौत हुई। भारतीय विदेश मंत्रालय ने मेडिकल सप्लाई, डॉग स्क्वॉड, ड्रिल मशीन और कई जरूरी उपकरण तुर्की भेजे हैं।</strong></em></p>

जलजले के बाद तुर्की और सीरिया में अब तक दर्द, चीखें, दुःख.. और मदद की पुकार
07-02-2023 - 08:55 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

भूकंप के बाद तुर्की और सीरिया में प्रभावित जगहों पर तबाही का मंजर पसरा है। हालात इतने खराब हैं कि प्रभावितों की संख्या एक लाख से अधिक हो सकती है। इसबीच, भारत समेत कई देश तुर्की की मदद के लिए आगे आए हैं। बचाव कार्य तेजी से चल रहा है लेकिन इसमें तेज बारिश और बर्फबारी बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही है। भूकंप की चपेट में आई इमारतों के नीचे लोग दबे हुए हैं या फिर मलबे में फंसे हुए हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने आशंका जताई है कि मरने वालों का आंकड़ा काफी ज्यादा हो सकता है। तुर्की की मदद के लिए भारत सरकार ने राहत सामग्री में काम आने वाली कई चीजें भेजी हैं। इस मदद के लिए तुर्की के राजदूत फिरत सुनेल ने भारत का आभार जताया है और कहा है कि मुश्किल वक्त में दोस्त ही काम आता है।
घरों में लौटने से डर रहे
भूकंप की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, उसके बाद कई लोग अपने घरों में लौटने से डर रहे हैं। इन सबके बीच राहत कार्य जारी हैं। कई इमारतों से घंटों बाद मदद मांगने की आवाजें आ रहीं हैं।
तुर्की, सीरिया में अब राहत में जुटी दुनिया
तुर्की की इमरजेंसी एजेंसी के मुताबिक 65 देशों से 2600 से ज्यादा बचावकर्मी मदद के लिए आगे आए हैं। तुर्की में बचावकर्मी 629 क्रेन और 360 गाड़ियां इस्तेमाल कर रहे हैं। अब तक तीन लाख से ज्यादा कंबल और 41 हजार से ज्यादा फैमिली टेंट मुहैया करवाए गए हैं। भूकंप से प्रभावित लोगों को रसोई से जुड़ा सामान भी मुहैया करवाया जा रहा है।
एक लाख के पार प्रभावितों की संख्या
भूकंप के कारण हजारों इमारतें ढह चुकी हैं और आशंका है कि प्रभावित लोगों की संख्या लाख को पार कर सकती है। सीरिया की मदद के लिए ईरान और इराक भी आगे आए हैं।
सीरिया के हाल और भी खराब

सीरिया के कुछ शहरों में भयंकर तबाही छाई हुई है। लोग दर्द से कराह रहे हैं और मदद के लिए चिल्ला रहे हैं लेकिन कोई नहीं है, जो मदद के लिए आगे आए। यह ऐसा इलाका है, जहां एक दशक से ज्यादा समय तक चले युद्ध के कारण पहले ही काफी तबाही का माहौल था। ऐसे में जब भूकंप आया तो यह और डरा देने वाला मंजर और दर्द लोगों को दे गया।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।