एयर इंडिया तोड़ेगा विदेशी एयरलाइंस का एकछत्र राज..! भारत से होगी दुनिया के हर शहर की नॉन स्टॉप उड़ान
<p><em><strong>एयर इंडिया कभी दुनिया के सबसे बेहतर एयरलाइन कंपनियों में शामिल थी लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसकी हालत खस्ता हो गई। अब टाटा ग्रुप में वापसी के बाद उसके दिन फिरने लगे हैं। एयर इंडिया ने 870 एयरक्राफ्ट्स का ऑर्डर दिया है, जो एविएशन के इतिहास का सबसे बड़ा ऑर्डर था।</strong></em></p>
देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा ग्रुप में वापसी के बाद एयर इंडिया का कायापलट होने लगा है। कंपनी ने 470 विमानों को खरीदने का ऑर्डर दिया है। यह एविएशन इंडस्ट्री के इतिहास का सबसे बड़ा ऑर्डर है। इस सौदे के साथ ही 370 और विमानों को खरीदने का विकल्प भी शामिल है। यानी कंपनी कुल 840 विमान खरीदने की तैयारी में है। इस बेड़े के साथ एयर इंडिया विदेशी एयरलाइन कंपनियों को कड़ी चुनौती देने की स्थिति में पहुंच जाएगी। कंपनी का कहना है कि भारत से दुनियाभर के हर शहर के लिए नॉन स्टॉप उड़ान शुरू की जाएगी। कभी इंटरनेशनल रूट्स पर एयर इंडिया का दबदबा हुआ करता था। महाराजा की चमक कम होने से अभी इसमें विदेशी एयरलाइन कंपनियों की तूती बोलती है। हालांकि टाटा के पास जाने के बाद एयर इंडिया एक बार फिर अपना खोया रुतबा हासिल करने की योजना बना रही है।
एयर इंडिया के चीफ कमर्शियल एंड ट्रांसफॉर्मेशन ऑफिसर निपुण अग्रवाल का कहना है कि कंपनी ने एयरबस और बोइंग से अगले एक दशक में 840 एयरक्राफ्ट खरीदने का सौदा किया है। इसमें 470 विमान खरीदे जाएंगे जबकि 370 विमानों को खरीदने का विकल्प शामिल है। एयर इंडिया को अपने बेड़े से 113 पुराने विमानों को बाहर करना है। इन विमानों का इंटीरियर बहुत खराब है और इससे यात्रियों को परेशानी होती है। सरकारी कंपनी के तौर पर एयर इंडिया की हालत खस्ता थी। फंड की कमी के कारण इन विमानों के इंटीरियर को अपडेट नहीं किया जा सका। ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतों को देखते हुए इन्हें रिफर्बिशिंग करना आसान नहीं है।
एयर इंडिया को अगले 7-8 साल में 470 विमानों की डिलीवरी की जाएगी। कंपनी जब अपने पुराने विमानों को सेवा से हटाएगी तब उसके पास 370 विमानों का खरीदने का विकल्प होगा। यानी पुराने विमानों के रिटायर होने से कंपनी के फ्लीट पर कोई असर नहीं होगा। अग्रवाल ने कहा कि यह एयर इंडिया और भारत के एविएशन इतिहास में शानदार क्षण है। इसकी शुरुआत दो साल पहले एयर इंडिया के निजीकरण प्रक्रिया के साथ हुई थी।
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