एआर रहमान से सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जूनियर डागर बंधुओं का सम्मान करें..
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को प्रसिद्ध संगीतकार ए. आर. रहमान से कहा कि वे भारतीय शास्त्रीय संगीत की ध्रुपद परंपरा में जूनियर डागर बंधुओं के योगदान का सम्मान करें और उसे स्वीकार करें। डागर परिवार के उत्तराधिकारी ने रहमान पर कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप..
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को प्रसिद्ध संगीतकार ए. आर. रहमान से कहा कि वे भारतीय शास्त्रीय संगीत की ध्रुपद परंपरा में जूनियर डागर बंधुओं के योगदान का सम्मान करें और उसे स्वीकार करें। डागर परिवार के उत्तराधिकारी ने रहमान पर कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप लगाया है।
उस्ताद फैयाज़ वसीफुद्दीन डागर ने एक मुकदमा दायर कर रहमान को ‘शिव स्तुति’ के उपयोग से रोकने की मांग की है। उनका दावा है कि यह रचना मूल रूप से उनके पिता उस्ताद फैयाज़ुद्दीन डागर और उनके चाचा उस्ताद ज़ाहिरुद्दीन डागर ने की थी, और इसके कॉपीराइट अभी भी उनके पास हैं। यह रचना फिल्म/गीत ‘वीरा राजा वीरा’ में प्रयुक्त की गई है।
वादी की ओर से यह भी कहा गया कि जब भी ‘वीरा राजा वीरा’ का संस्करण किसी भी माध्यम—डिजिटल, इंटरनेट, ओटीटी प्लेटफॉर्म, सैटेलाइट, केबल टेलीविजन आदि—पर प्रसारित हो, तो उसमें डागर बंधुओं को श्रेय दिया जाना चाहिए।
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह ने मौजूदा क्रेडिट लाइन ‘डागरवाणी परंपरा की ध्रुपद रचना पर आधारित’ को बदलकर ‘दिवंगत उस्ताद फैयाज़ुद्दीन डागर और दिवंगत उस्ताद ज़ाहिरुद्दीन डागर की शिव स्तुति पर आधारित रचना’ करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही, रहमान समेत चार प्रतिवादियों को मुकदमे के अंतिम फैसले के अधीन दो-दो करोड़ रुपये जमा करने को कहा गया था।
हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने ये अंतरिम निर्देश—क्रेडिट बदलने और दो करोड़ रुपये जमा कराने—को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि वादी प्रथम दृष्टया ‘शिव स्तुति’ की लेखकीय मौलिकता (ऑथरशिप/ओरिजिनैलिटी) सिद्ध करने में असफल रहे हैं।
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने रहमान के वकील ए. एम. सिंहवी से कहा कि वादी ने रचना की मौलिकता के संबंध में एक मामला जरूर बनाया है, हालांकि लेखकीय अधिकार (ऑथरशिप) का प्रश्न अभी जांच का विषय रहेगा।
पीठ ने भारतीय शास्त्रीय संगीत में डागर बंधुओं के अतुलनीय योगदान पर जोर देते हुए कहा,
“उनके और अन्य महान कलाकारों के योगदान के बिना क्या आपको लगता है कि आधुनिक गायक टिक पाते?”
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि “कानूनी पेचीदगियों में जाने के बजाय, आप उन्हें थोड़ा सम्मान दे सकते हैं। वे आपके साथ किसी व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में नहीं हैं।”
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