खतरे की घंटी..! 2050 तक समुद्र में मछलियों से ज्यादा होगा प्लास्टिक कचरा
प्लास्टिक का कचरा सिर्फ धरती पर विचरते पशुओं के लिए ही नहीं बल्कि समुद्र के जीवों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। जलीय प्रदूषण के कारण दुनियाभर में, खासतौर पर दक्षिण पूर्व एशिया में समुद्रों और नदियों में कचरा जमा होता जा रहा है और अगर कुछ बदलाव नहीं किया गया तो हालात बदतर होते जाएंगे। मेकांग नदी जिन देशों से होकर गुजरती है, वे दुनिया का कचरा स्थल बनते जा रहे हैं। समुद्री जीव प्लास्टिक भी निगल रहे हैं और बाद में इन जीवों का सेवन मनुष्य द्वारा किया जाता है। महामारी के दौरान यह स्थिति और भयावह हो गयी। कोविड-19 के कारण दक्षिण पूर्व एशिया में प्लास्टिक कचरा बढ़ा है।
अप्रेल 2020 में बैंकॉक में एकल इस्तेमाल वाले प्लास्टिक कचरे का दैनिक औसत 2,115 टन से बढक़र 3,400 टन से अधिक हो गया था। लॉकडाउन के कारण फिलीपीन और वियतनाम जैसे दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में कचरे की रीसाइक्लिंग 80 प्रतिशत से अधिक रुक गयी थी। महामारी के दौरान जमा कचरे से पहले भी प्लास्टिक की समस्त पैकेजिंग सामग्री का केवल नौ प्रतिशत निस्तारित किया जाता था और करीब 12 प्रतिशत को जलाया जाता था। बाकी 79 प्रतिशत कचरा कूड़ा डालने के स्थानों और प्राकृतिक पर्यावरण में जमा हो गया।
समुद्री जीवन को तबाह कर रहा प्लास्टिक कचरा
इसमें से ज्यादातर कचरा, विशेष रूप से प्लास्टिक समुद्र में चला जाता है। यूएन एनवॉयरमेंट के 2018 के एक अध्ययन के अनुसार हमारे समुद्रों में साल भर में करीब 1.3 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा जमा हो जाता है। समुद्र में प्लास्टिक का प्रदूषण अनेक देशों की एक प्रमुख समस्या है, जिस पर प्रति वर्ष 2500 अरब डॉलर की अनुमानित लागत आती है। समुद्री जानवरों की करीब 267 प्रजातियां प्लास्टिक के कचरे के निगलने या अन्य कारणों से प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुई हैं जिनमें कछुए, व्हेल, मछली और समुद्री पक्षी आदि प्रमुख हैं। हालांकि यह संख्या और अधिक होगी क्योंकि छोटी प्रजातियों का ही अध्ययन किया जाता है।
मछलियों से ज्यादा हो जाएगा कचरे का वजन
यदि गणना के अनुसार मौजूदा रुझान बना रहता है तो 2050 तक, महासागरों में प्लास्टिक का वजन मछलियों से ज्यादा हो जाएगा। सबसे अधिक प्लास्टिक प्रदूषण करने वाले छह देशों में से तीन देशों चीन, थाईलैंड और वियतनाम से मेकांग नदी गुजरती है और कई दक्षिण पूर्व एशियाई देश दुनिया के प्लास्टिक कचरे के डंपिंग ग्राउंड बन गए हैं।
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