आर्मी चीफ मनोज पांडे ने बताई चीनियों की फितरत, निपटने की समझाई स्ट्रैटेजी
<p><em><strong>उन्होंने कहा है कि चीनी जो कहते हैं वो नहीं करते हैं। यह बात हर कोई जानता है। यही उनके नेचर और कैरेक्टर का हिस्सा है।</strong></em></p>
दिनोंदिन आक्रामक होते जा रहे चीन की विस्तारवादी सोच ने पूरी दुनिया की नाक में दम कर रखा है। भारत तो उसकी इस आक्रामकता से सीधे दो-चार है। एक सबसे बड़ी दिक्कत चीन को समझने की है। वह अपनी बात पर नहीं टिकता है। आखिर इस चुनौती से कैसे निपटा जाए? आर्मी चीफ जनरल मनोज पांडे ने इसका जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि हर कोई एक बात जानता है। चीनी जो कहते हैं, उससे काफी अलग करते हैं। यह उनके नेचर और कैरेक्टर का हिस्सा है। उनके मुताबिक, चीन से निपटने के लिए एक ही स्ट्रैटेजी है। चीन के कहे के बजाय उसकी हरकतों पर नजर रखनी होगी।
भारत और चीन के बीच काफी समय से सीमा विवाद है। गलवान में हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट और बढ़ी है। तभी से चीन से लगी सीमा पर तनाव भी है। भारत-चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर सीमा विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है। वहीं, भारत इसका विरोध करता है। बीते कुछ सालों में चीन की आक्रामकता में इजाफा हुआ है। इसे लेकर भारत ने भी कड़ा रुख अपनाया हुआ है।
चीन के बारे में क्या कहा पांडे ने
चीन के रवैये पर शनिवार को सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हमें उनकी लिखी-बोली गई चीजों के बजाय गतिविधियों पर नजर रखनी होगी। थलसेना प्रमुख ने चीन से लगे क्षेत्र में सीमा गतिरोध लंबे समय से जारी रहने के बीच कहा कि पूर्वी लद्दाख में ‘स्थिति स्थिर, लेकिन अप्रत्याशित’ है।
चीन पर हाल में आई है एक रिपोर्ट
सेना प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब बीते रोज एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में चीन की फितरत से पर्दा उठाया गया है। इस स्टडी के मुताबिक, अक्साई चिन क्षेत्र में चीनी अतिक्रमण आकस्मिक घटनाएं नहीं हैं। इसके बजाय ये विवादित सीमा क्षेत्र पर स्थायी नियंत्रण पाने की सुनियोजित ‘विस्तारवादी रणनीति’ का हिस्सा हैं।
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