सेना को जल्द मिलेंगे ‘जोरावर..’ 85 हजार करोड़ के सैन्य प्रस्तावों को मंजूरी, स्वदेशी लाइट-टैंक शामिल
<p><em><strong>रक्षा मंत्रालय ने 85 हजार करोड़ के सैन्य प्रस्तावों को हरी झंडी दी, जिसमें थल सेना (India Army) के लिए प्रोजेक्ट जोरावर के तहत देश में ही बनने वाले लाइट-टैंक (light tank)भी शामिल हैं। </strong></em></p>
एलएसी पर चीन से चल रही तनातनी के बीच गुरुवार को रक्षा मंत्रालय ने 85 हजार करोड़ के सैन्य प्रस्तावों को हरी झंडी दी। इनमें थल सेना के लिए प्रोजेक्ट जोरावर के तहत देश में ही बनने वाले लाइट-टैंक भी शामिल हैं। भारतीय सेना ये हल्के टैंक खासतौर से पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी पर तैनात करना चाहती है।
पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीन के खिलाफ हल्के-टैंक के लिए भारतीय सेना ने प्रोजेक्ट-जोरावर शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत स्वदेशी लाइट टैंक लेने की तैयारी है। खास बात ये है कि लाइट टैंक के प्रोजेक्ट का नाम जम्मू-कश्मीर रियासत के पूर्व कमांडर, जोरावर सिंह के नाम रखा गया है। जिन्होंने 19वीं सदी में चीनी सेना को हराकर तिब्बत में अपना परचम लहराया था।
जल्द ही सेना लेगी मंजूरी
जानकारी के मुताबिक, भारतीय सेना जल्द ही रक्षा मंत्रालय से लाइट टैंक लेने की मंजूरी लेने वाली है। इन हल्के टैंकों को मेक इन इंडिया के तहत देश में ही तैयार किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय सेना इन टैंकों को पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर तैनात करने के लिए लेना चाहती है।
हल्के टैंक लेना चाहती है भारतीय सेना
दरअसल, भारतीय सेना के पास जो फिलहाल टैंक हैं वे प्लेन्स और रेगिस्तान के लिए हैं. चाहें फिर रूसी टी-72 हो या फिर टी-90 या फिर स्वदेशी अर्जुन टैंक. ये सभी टैंक 45-70 टन के हैं, जबकि प्रोजेक्ट जोरावर के तहत लाइट टैंक करीब 25 टन के होंगे. चीन से सटी (LAC) पर तैनात करने के लिए दुनिया के सबसे ऊंचे दर्रों से होकर गुजरना पड़ता है. ऐसे में टी-72 और बाकी भारी टैंकों के लिए LAC पहुंचने में खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है. यही वजह है कि भारतीय सेना हल्के टैंक लेना चाहती है.
हल्के टैंकों में शामिल होंगे अत्याधुनिक फीचर
जानकारी के मुताबिक, प्रोजेक्ट जोरावर के तहत हल्के टैंकों में भारी टैंक की तरह ही फायर पावर तो होगी ही साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) युक्त ड्रोन से भी लैस होंगे। ये हल्के टैंक ऊंचे पहाड़ों से लेकर दर्रों तक से भी निकल सकते हैं। आपको बता दें कि चीन ने पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी पर पहले से ही लाइट टैंक तैनात कर रखे हैं। भारतीय सेना ने भी टी-72 टैंक यहां तैनात किए हैं, लेकिन अब तेज मूवमेंट के लिए भारतीय सेना प्रोजेक्ट जोरावर के तहत लाइट टैंक लेना चाहती है।
भारतीय सेना 1841 में तिब्बत में घुसकर चीनी को हराया था
गौरतलब है कि जोरावर सिंह जम्मू-कश्मीर रियासत के कमांडर थे। उन्होंने 1841 में तिब्बत में घुसकर चीनी सेना को हराया था चीनी सेना को हराने के बाद जोरावर सिंह अपने सैनिकों के साथ हिंदुओं के पवित्र तीर्थ-स्थल कैलाश मानसरोवर गए थे। इसके बाद जोरावर सिंह के सैनिक चीनी झंडे तक लेकर भारत आ गए थे। भारतीय सेना की मौजूदा जम्मू कश्मीर राइफल (जैक रिफ) रेजीमेंट अपने को जोरावर सिंह की सेना का ही वंशज मानती है।
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