China Covid : चीन की इस जिद की वजह से कोरोना ढा रहा कहर, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

<p><strong><em>China Covid : China&nbsp;में कोरोना (Covid-19) की हालत डरावनी होती जा रही है। एक रिपोर्ट की मानें तो चीन में जनवरी से मार्च तक corona&nbsp;बड़े स्तर पर फैल सकता है। China&nbsp;में हर रोज 10 लाख मामले और पांच हचार मौत हो सकती हैं। हालांकि, चीनी सरकार (Government Of China) अभी भी Corona&nbsp;को लेकर ज्यादा चिंता नहीं दिखा रही है। सरकारी आंकड़ों में भी कोरोना के मामले सामान्य ही दिखाए जा रहे हैं।</em></strong></p>

China Covid : चीन की इस जिद की वजह से कोरोना ढा रहा कहर, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी
24-12-2022 - 10:41 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

China में corona को लेकर डरावनी रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो चीन में covid-19 के omicron varaiant का sub-variant bf.7 तबाही मचा रहा है। सड़कों से ज्यादा अस्पतालों में भीड़ है। हालांकि, चीन की सरकार की ओर से जो आंकड़े पेश किए जा रहे हैं, वह ज्यादा नहीं है। लेकिन दुनिया इस बात से जरूर वाकिफ है कि चीन की सरकार अपने देश के आंतरिक मामलों पर हमेशा पर्दा डालने की कोशिश करती रही है। ऐसा कोरोना के मामले में पहले भी देखा जा चुका है और एक बार फिर वही गलती दोहराई जा रही है। 
कोरोना की शुरुआत यानी साल 2020 से लेकर अभी तक, चीन की सरकार ने देश में कोरोना फैलने की सीमित जानकारी ही सिर्फ दी। वहां की मीडिया ने भी सरकारी आंकड़ों को ही पेश किया। जहां दुनिया ने बढ़-चढ़कर वैक्सीन का इस्तेमाल किया और एक दूसरे देशों ने आपस में आयात-निर्यात कर मदद भी की, वहीं चीन इस मामले में भी शांत रहा। 
चीन में कोरोना महामारी के जारी कहर को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन कुछ प्राकृतिक नियमों के खिलाफ जाकर खड़ा हो गया, जैसे कि जीरो कोविड पॉलिसी। तमाम वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस अंत में तभी थमेगा, जब एक हद तक आबादी उससे संक्रमित हो गई हो लेकिन चीन जीरो कोविड पॉलिसी पर अड़ा रहा। 
चीन की जीरो कोविड पॉलिसी और लोगों का प्रदर्शन
साल 2022 की शुरुआत में जब अधिकतर देश नियमों को ढीला कर जिंदगी का सामान्य करने की कोशिश कर रहे थे, उस समय चीन ने जीरो कोविड पॉलिसी लागू कर दी। चीन की सख्त पॉलिसी से साल 2022 के मध्य आते-आते नुकसान होना शुरू हो गया। इस पॉलिसी ने चीन को आर्थिक चोट भी पहुंचाई। देश में बेरोजगारी चरम पर आ गई, लोगों के रोजगार बंद होने लगे। इससे लोग भड़क गए और साल के अंत आते-आते लोगों ने बड़े स्तर पर कोविड पॉलिसी के खिलाफ प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। 
ढील देते ही बिगड़े हालात
आखिरकार चीन की शी जिनपिंग सरकार को लोगों की बात माननी पड़ी और दिसंबर 2022 में सख्त नियमों को खत्म करने का एलान कर दिया गया। पाबंदियां हटाए कुछ ही दिन बीते थे कि एक बार फिर चीन में कोरोना के नए वैरिएंट से तबाही की खबरें आनी शुरू हो गईं।
चीन के लोगों में Herd Immunity की कमी
जो BF.7 variant चीन में तबाही मचा रहा है, वही वैरिएंट भारत में पहली बार जुलाई में ही पहचान लिया गया था। इसके बावजूद भारत में इसने खतरनाक रूप नहीं लिया। इसका कारण है, भारत में करोड़ों की आबादी का टीकाकरण और लोगों की herd immunity, जो चीन के लोगों में कम है। दरअसल चीन में जब-जब कोरोना फैला, तभी लोगों पर सख्त नियमों लागू कर दिए गए। इस वजह से लोगों में नेचुरल इन्फेक्शन कम रहा और वहां लोगों में हर्ड इम्यूनिटी ना के बराबर ही पैदा हुई। जिन देशों में अधिकतर आबादी की herd immunity है, वहां corona का कोई भी वैरिएंट काफी कम असरदार है। ऐसे में चीन में अगर अब अगर व्यापक स्तर पर कोरोना फैला तो यह दुनिया का सबसे बड़ा कोविड विस्फोट साबित हो सकता है। 
चीन को सिर्फ स्वदेशी वैक्सीन पर भरोसा
कोरोना महामारी के समय भारत समेत corona vaccine बनाने वाले अन्य देश जब दूसरे देशों को टीका निर्यात कर सहायता कर रहे थे, तब चीन सिर्फ अपनी ही वैक्सीन पर टिका हुआ था। यानी चीन को बस अपनी वैक्सीन पर भरोसा था, जिनको चीन में ही बनाया गया था। चीन में लोगों के लिए 7 वैक्सीन बनाई गई। हालांकि, चीन की वैक्सीन पर एक्सपर्ट्स सवालिया निशान खड़े करते रहे हैं। हाल ही अमेरिकी एक्सपर्ट अली मोकदाद ने चीन को अमेरिकी वैक्सीन को आयात करने की सलाह दी है। यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन में प्रोफेसर अली मोकदाद कहते हैं कि अगर लोगों को अमरीकी वैक्सीन नहीं दी तो अप्रैल महीने तक चीन में हालात गंभीर हो सकते हैं। 
चीन से ही हुई थी lockdown की शुरुआत 
कोरोना की शुरुआत चीन से ही हुई, इसलिए चीन ही पहला देश भी था, जिसने इससे बचाव के लिए पाबंदियां लागू कीं। चीन ने जनवरी के अंतिम सप्ताह से ही सख्त lockdown का एलान कर दिया। वहीं, यूरोप में इटली पहला देश था, जिसने lockdown का एलान किया। इटली में 9 मार्च को लॉकडाउन लगा दिया गया था। वहीं, भारत ने 24 मार्च 2020 से लॉकडाउन पॉलिसी लागू की थी। ब्रिटेन समेत और कई देशों ने भी इसी दौरान ही अलग-अलग दिनों में लॉकडाउन का एलान किया। 
ढील देते हुए जीना कोरोना संग जीना
जिन भी देशों ने कोरोना को लेकर पाबंदियां जारी कीं, उन्होंने अपने देश में स्थिति के अनुसार उसमें ढील देनी शुरू की। किसी ने यह काम कुछ सप्ताह में ही शुरू कर दिया तो किसी देश ने महीनों तक ढील नहीं दी। चीन उन देशों में सबसे पहला था, जिन्होंने कुछ दिनों बाद ही नियमों में ढील देनी शुरू की। 8 अप्रेल, 2020 में वुहान में भी लॉकडाउन की सख्ती कम कर दी गई जबकि वुहान ही ऐसा शहर है, जहां से कोरोना के फैलने का आरोप लगता रहा है। अब सवाल है कि चीन में इतने कम समय का लॉकडाउन कितना असरदार रहा? इस पर चीनी सरकार की ओर से जो आंकड़े पेश किए गए, उन्हें देखकर कहा गया कि यह काफी असरदार रणनीति रही। हालांकि, इन आंकड़ों की सच्चाई पर एक्सपर्ट्स जरूर सवाल खड़े करते रहे हैं।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।