बूंदी महोत्सव में दिखे लोक संस्कृति के रंग, जमकर थिरके विदेशी मेहमान
<p><em><strong>बूंदी महोत्सव में दिखे लोक संस्कृति के रंग, विभिन्न कलाकारों ने दी रंगारंग प्रस्तुतियां</strong></em></p>
बूंदी महोत्सव के दूसरे दिन सुखमहल में सुरम्य प्राकृतिक छटा के बीच देशी-विदेशी पावणों की देशी व्यंजनों से मनुहार की गई। इस अवसर पर नगर परिषद सभापति मधु नुवाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी करतार सिंह, उपखण्ड अधिकारी सोहनलाल सहित जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने मेहमानों की खातिरदारी करते हुए उन्हें हाड़ौती के पसंदीदा व्यंजन कत्त बाफले से सत्कार किया।
कार्यक्रम में पावणों को रोली अक्षत का टीका लगाकर, रक्षा सूत्रा और साफा बांधकर स्वागत किया गया। तिलक किया। वहीं, विदेशी महिलाओं को चूड़ियां पहना कर हाथों में मेंहदी लगाई गई। विदेशी मेहमान इस मान मनुहार से बहुत अभिभूत नजर आए और इस आयोजन को सराहते रहे।
कार्यक्रम में लोक कलाकारों ने कच्छी घोड़ी नृत्य और अन्य नृत्य गीतों से समा बांधा दिया। साथ ही, विदेशी सैलानी लोक कलाकारों के साथ थिरकते दिखे।
शिल्पग्राम में दिखी ग्रामीण अंचल की झलक
कुंभ स्टेडियम परिसर में आयोजित बूंदी उद्योग एवं हस्तशिल्प मेला परिसर में सजाया गए शिल्पग्राम में ग्रामीण अंचल की झलक दिखने को मिल रही है। इंटेक संयोजक राजकुमार दाधीच के निर्देशन में संस्कृति संस्था की महिला सदस्यों की ओर से तैयार किए गए शिल्पग्राम को महिलाओं ने पूरी तरह ग्रामीण परिवेश में ढाला है। शिल्पग्राम में मांडने, परिंडा, चूल्हा, चैकी, कुएं से पानी खींचते बैल, चॉक, भैरू जी व माता जी का थानक, लोक देवता, घांस भैरू आदि से सजा कर ठेठ ग्रामीण अंचल की झलक दी गई है।
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