तीन बार छिनी मेयर की कुर्सी पर नहीं मानी हार, किस मिट्टी की बनी हैं डॉ. सौम्या गुर्जर

<p><em><strong>सौम्या गुर्जर ने शनिवार को जयपुर ग्रेटर नगर निगम के महापौर का पद एक बार फिर संभाल लिया। बीते दो साल में गुर्जर ने तीसरी बार यह पद संभाला है।</strong></em></p>

तीन बार छिनी मेयर की कुर्सी पर नहीं मानी हार, किस मिट्टी की बनी हैं डॉ. सौम्या गुर्जर
13-11-2022 - 08:55 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

जयपुर नगर निगम ग्रेटर की महापौर की कुर्सी को लेकर पिछले डेढ़ साल से घमासान मचा हुआ है। राजस्थान सरकार और सौम्या गुर्जर के बीच शह-मात का खेल लगातार चला लेकिन अभी तक सौम्या गुर्जर राज्य सरकार पर भारी पड़ती आई है। 
पिछले साल राज्य सरकार ने सौम्या को निलंबित किया तो सौम्या सुप्रीम कोर्ट से स्टे ऑडर लाई और महापौर की कुर्सी पर जा बैठी। इस साल राज्य सरकार ने सौम्या गुर्जर को महापौर पद से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए लेकिन सौम्या गुर्जर की अपील पर हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया। अब सौम्या गुर्जर फिर से महापौर की कुर्सी पर बैठ गई हैं।
पुत्र जन्म के तीन दिन बाद काम पर 
9 महीने की गर्भवती होने के बावजूद भी 10 फरवरी, 2021 को वे दिनभर निगम कार्यालय में बैठक लेती रही और देर रात को अस्पताल पहुंची और भर्ती हो गई। अगले दिन सुबह 5 बजे सौम्या गुर्जर ने एक पुत्र को जन्म दिया। पुत्र के जन्म के महज 3 दिन बाद ही सौम्या ने फाइलें देखना शुरू कर दिया और 10वें दिन ही वे निगम ऑफिस पहुंच गईं। 

समाजसेवा से मिला जीवनसाथी 
महापौर सौम्या कॉलेज के दिनों से ही समाज सेवा से जुड़ी रही। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से दर्शन शास्त्र में पीएचडी की है। वे एक कुशल एथेलेटिक्स और योगा टीचर भी हैं। अपनी फिटनेस को लेकर वे हमेशा सजग रहती हैं। योगा दिवस पर उन्होंने कई तरह के योगासन करके दिखाए तो लोग दंग रह गए। समाजसेवा के दौरान ही सौम्या का संपर्क राजाराम गुर्जर से हुआ। राजाराम के प्रोत्साहित करने पर वे भी राजनीति में आ गईं।

नगर परिषद की सदस्य से बनी महापौर
38 वर्षीय सौम्या गुर्जर की शादी राजाराम गुर्जर के साथ हुई। राजाराम गुर्जर राजनीति में हैं। सौम्या की कुशल नेतृत्व क्षमता को देखते हुए राजाराम ने सौम्या को भी नगर परिषद के चुनावों में उतार दिया। सौम्या चुनाव जीत गईं और करौली नगर परिषद की सदस्य बन गईं। उसी दौरान राजाराम भी नगर परिषद के सदस्य और फिर सभापति बन गए। राजाराम भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के नजदीकी रहे हैं। करौली से आगे बढते हुए वे जयपुर आए और सौम्या ने नगर निगम चुनाव में भाग्य आजमाया। बीजेपी से टिकट मिलने पर वे वार्ड 87 से भाजपा की पार्षद बनी और बाद में महापौर चुन ली गई।
राममंदिर के लिए 1 करोड़ दान 
जयपुर नगर निगम ग्रेटर की महापौर सौम्या गुर्जर और उनके पति राजाराम गुर्जर सामाजिक कार्यों में हमेशा आगे रहते हैं। तीन साल पहले जब श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए चंदा एकत्रित किया जा रहा था। तब राजाराम गुर्जर ने एक करोड़ रुपये का चंदा दिया था।
सरकार से ठनी, फिर भी मैदान में
महापौर बनने के बाद भी अपनी कार्यशैली को लेकर सौम्या हमेशा चर्चाओं में रही हैं। पूर्व निगम आयुक्त से दुर्व्यवहार के मामले में राज्य सरकार ने सौम्या को निलंबित किया तो वे सुप्रीम कोर्ट से स्टे ऑर्डर ले आईं। बाद में, उन्हें महापौर पद से बर्खास्त किया तो सौम्या ने राजस्थान हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी के ऑर्डर को रद्द कर दिया तो सौम्या तीसरी बार महापौर की कुर्सी पर जा बैठी।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।