सरकार के बाघ परियोजना के प्रयासों और श्रेय पर कांग्रेस तिलमिलाई ;भाजपा ने कहा कि कांग्रेसी नेता गंभीरता से दें अपने बयान
<p><em>काली टोपी, खाकी पेंट, जैतून के रंग की टी-शर्ट के साथ हाथ से पकड़ी जाने वाली जैकेट। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जंगल की पोशाक पहने बाघों से मिलने पहुंचे। हालांकि, विपक्ष ने चुनावी राज्य कर्नाटक के उनके दौरे पर सवाल उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार, 9 अप्रेल की सुबह जब मैसूर के बांदीपुर और मधुमलाई टाइगर रिजर्व के लिए रवाना हुए तो उनके दिल्ली से निकलते ही प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह तस्वीर जारी की थी। </em></p>
बाघ परियोजना की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर प्रधानमंत्री मैसूर में टाइगर रिजर्व का भी दौरा किया और बाघों की गणना के नवीनतम आंकड़े जारी किये।
बाघों पर कांग्रेस भाजपा आमने सामने
..लेकिन इस प्रोजेक्ट की शुरुआत करने के साथ ही भाजपा -कांग्रेस एक दूसरे के विरोध में खड़ी हो गयीं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट कर के टाइगर प्रोजेक्ट का श्रेय कांग्रेस को दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी कांग्रेस द्वारा शुरू किये गए टाइगर प्रोजेक्ट का श्रेय ले रहे हैं जिसे 50 वर्ष पूर्व शुरू किया गया था। वे जंगल के इलाके में पर्यावरण, जंगल, आदिवासियों के जीवन और आवास को बच्चन के लिए बनाये गए नियमो को ख़त्म करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने पीएम मोदी के बाघ संरक्षण पर सवाल खड़े किये। इस पर भाजपा के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने जवाबी ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस के नेताओं को अपने बयानों को गंभीरता से लेने की ज़रूरत है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने 'अमृत काल' के दौरान बाघ संरक्षण के लिए सरकार के दृष्टिकोण को भी स्पष्ट किया। वर्ष 2019 में दूसरी बार सत्ता में आने के बाद मोदी ने अवैध शिकार और वन्यजीवों की तस्करी को रोकने की पहल की। उन्होंने दुनिया के अन्य देशों से इस संबंध में आगे आने का आग्रह किया। केंद्र ने कहा कि आईबीसीए को उनके संदेश को पूरी दुनिया में फैलाने के लिए लॉन्च किया जा रहा है। बता दें कि टाइगर प्रोजेक्ट की शुरुआत 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय में हुई थी। उस समय अवैध शिकार के कारण पूरे देश में बाघों की संख्या घटकर लगभग 1,800 रह गई थी।
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