हाई टेक है नया संसद भवन, सुरक्षा व्यवस्था ऐसी कि परिंदा भी नहीं मार सकता पर...! बेहतरीन टेक्नोलॉजी से है लैस
<p><em><strong>नई संसद भवन में स्टेट ऑफ आर्ट सिक्योरिटी अरेंजमेंट्स यानी की एक आदर्श सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। नए परिसर में तैनात किए गए जवानों को 2 महीने की कमांडो ट्रेनिंग भी दी गई है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति का वह मजबूती से मुकाबला कर सके और उसे फेल कर सकें।</strong></em></p>
नई संसद में विशेष सत्र शुरू हो गया है। एक खूबसूरत इमारत के साथ-साथ तमाम ऐसे इंतजाम इस बिल्डिंग में किए गए हैं, जो न केवल आज की जरूरत के हिसाब से हैं। बल्कि भविष्य में बदली हुई परिस्थितियों की जरूरत को भी यह पूरा करेंगे। सुरक्षा भी इन इंतजामों में बहुत अहम पहलू है। अगर हम ये कहें कि नई संसद भवन में स्टेट ऑफ आर्ट सिक्योरिटी अरेंजमेंट्स यानी की एक आदर्श सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं तो यह बिल्कुल गलत नहीं होगा।
सबसे पहले हम बात करते हैं, यहां पर तैनात होने वाले जवानों की तो पुराने संसद भवन की तरह नए संसद भवन में भी पार्लियामेंट का सिक्योरिटी स्टाफ तैनात है। लेकिन इस बार नई वर्दी, जो कि विशिष्ट परिस्थितियों में निपटने के लिए सुरक्षा बलों के लिए बनाई जाती है। वह संसद भवन के सुरक्षाकर्मी भी पहनेंगे। एक खास तरीके का फैब्रिक है, जिससे संसद भवन सुरक्षा स्टाफ की पोशाक तैयार की गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में इनके मूवमेंट में दिक्कत ना हो।
बेशक पार्लियामेंट सिक्योरिटी स्टाफ हथियार के साथ संसद भवन में मौजूद नहीं रहता और नई संसद भवन में भी ऐसी तैनाती उनकी होगी। लेकिन समय-समय पर उन्हें आधुनिक ट्रेनिंग दी जाएगी। संसद भवन का पार्लियामेंट सिक्योरिटी स्टाफ सदन के भीतर और हर जरूरी जगह पर होता है। अब बात करते हैं, बाहर के स्टाफ की तो अर्ध सैनिक बलों की जिम्मेदारी संसद भवन की सुरक्षा है। नई संसद भवन में भी अधिकांश जगह पर आउटर लेयर में सीआरपीएफ के जवान मौजूद हैं। कुछ खास तैयारियों के साथ इन अर्धसैनिक बलों के जवानों को नई संसद भवन में तैनात किया गया है।
हर जवान की प्रोफाइलिंग
हर जवान जो की नई संसद भवन में तैनात है, उसकी प्रोफाइलिंग की गई है यानी कि नई संसद भवन में तैनाती से पहले उस जवान की कहां ड्यूटी थी। मसलन नक्सली इलाके में, कश्मीर में, नॉर्थ ईस्ट में या फिर दक्षिण भारत में। जिस जवान की दक्षता कुछ खास परिस्थिति के लिए है, उसे नए संसद भवन में तैनात किया गया है। हर जवान की पुख्ता जांच की गई है कि उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या है और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग हैं।
दो महीने की कमांडो ट्रेनिंग
नए परिसर में तैनात किए गए जवानों को 2 महीने की कमांडो ट्रेनिंग भी दी गई है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति का वह मजबूती से मुकाबला कर सके और उसे फेल कर सकें। इस कमांडो ट्रेंनिंग माॅड्यूल को खास नई संसद भवन की सुरक्षा के मुताबिक ही तैयार किया गया है। इसके अलावा जवानों को मनोवैज्ञानिक यानी साइकोलॉजिकल ट्रेनिंग भी दी गई है। ऐसा इसलिए ताकि वह किसी भी तरीके के दबाव की स्थिति का मजबूती से मुकाबला कर सकें और उनके आसपास जो महत्वपूर्ण लोग हैं उनकी सुरक्षा वह बेहद पुख्ता तरीके से कर सकें।
अन्य एजेंसियां भी सक्रिय
नई संसद भवन में मौजूद हर सुरक्षा कर्मी पर नजर रखने के लिए अन्य एजेंसियां भी सक्रिय है ताकि अवांछनीय तत्वों का संपर्क इनसे ना हो। तकनीक के इस दौर में टेक्नोलॉजी को ही सबसे मजबूत सुरक्षा का कवच नई संसद भवन में बनाया गया है। नई संसद भवन के लिए खास सिक्योर कम्युनिकेशन सिस्टम है, जिसका इस्तेमाल सुरक्षा में तैनात जवान और पार्लियामेंट सिक्योरिटी स्टाफ कर रहे हैं। हर शख्स जो कि नई संसद भवन परिसर में दाखिल होता है उसके चेहरे का रिकॉर्ड, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड और उसकी पहचान पत्र का रिकॉर्ड यहां पर लगाए गए सिस्टम में दर्ज हो जाएगा।
खास फेशियल स्कैनिंग सिस्टम
खास फेशियल स्कैनिंग सिस्टम नई संसद भवन परिसर में यह सुनिश्चित करेंगे कि सही चेहरा सही जगह पर ही मौजूद हो। ताकि कोई कर जरूरी शख्स संवेदनशील जगहों पर ना जा पाए। खास जगह पर उन्नत तकनीक के फेशियल स्कैनिंग सिस्टम लगाए गए हैं और उनमें उन लोगों के चेहरे का रिकॉर्ड दर्ज है जिनकी उन जगहों पर जाने की जरूरत है या फिर अनुमति है। अगर कोई अन्य शख्स ऐसी जगह पर गुस्सा है तो फेशियल स्कैनिंग सिस्टम तुरंत संबंधित एजेंसियों को अलर्ट कर देगा।
संसद भवन की चुनिंदा जगहों में ही प्रवेष
रेटिना आईडेंटिफिकेशन सिस्टम ये सुनिश्चित करेगा जिस शख्स का रिकॉर्ड नए संसद भवन के सिक्योरिटी सिस्टम में दर्ज है, वही शख्स संसद भवन की चुनिंदा जगहों में घुस सकेगा। सांसदों और स्टाफ को खास डिजिटल चिप से युक्त एक्सेस कार्ड दिया गया है। ताकि वह सुरक्षित तरीके से नई संसद भवन में अपने काम के मुताबिक आ और जा सके। पूरे संसद भवन परिसर में उच्च तकनीक के सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं जो न केवल संसद भवन के भीतर बल्कि उसके आसपास लोग गुजर रहे हैं उन पर पहली नजर रख रहे हैं।
स्निपर डॉग को भी ट्रेनिंग
नई संसद भवन की सुरक्षा के लिए खास तौर पर स्निपर डॉग को भी ट्रेन किया गया है, जो कि हर वक्त बिल्डिंग के आसपास मौजूद रहेंगे और आपातकालीन स्थिति में तुरंत अपनी ड्यूटी का निर्वाह करेंगे। कुल मिलाकर उन्नत तकनीक दूरदर्शी उपकरण और खास ट्रेनिंग माड्यूल से लैस सुरक्षा बल यह सुनिश्चित किया गया है कि नई संसद भवन का कांप्लेक्स ऐसा हाई सिक्योरिटी जोन हो जहां गलती और चूक की कोई भी गुंजाइश नहीं है।
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