बड़े दिल वाला भारत...! पीएम मोदी की दरियादिली के कायल क्यों हुए जा रहे हैं जेलेंस्की
<p><em><strong>यूक्रेन का प्रतिनिधि भारत पहुंचा हुआ है। उनके साथ में एक पत्र भी आया है, जिसे लिखा है यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने। इसमें भारत से मदद मांगी गई है। </strong></em></p>
उम्मीदें उन्हीं से की जाती है जहां पर महसूस होता है कि यहां मेरी बात खाली नहीं जाएगी। उम्मीदें कई बार मायूसी भी दे जाती हैं लेकिन हिंदुस्तान की बात कुछ और है। दुनिया को एहसास हो गया है कि आखिर बड़े दिल वाला अगर कोई देश है तो वह भारत है और यह दुश्मनों की मदद के लिए भी पीछे नहीं हटता। हमारी दरियादिली पर किसी को शक नहीं है। तभी तो हर मोर्चे पर भारत का विरोध करने वाला तुर्किए जब विनाशकारी भूकंप के सामने असहाय हो गया तो हमने आगे होकर नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए उसकी मदद की। इसी का नतीजा है कि जब हमारी टीमें वहां से रेस्क्यू करके वापस लौट रहीं थीं तो वहां के लोगों की आखों में बेवजह आंसू थे। एक साल दो महीने से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में यूक्रेन बुरी तरह तबाही से गुजर रहा है।
यूक्रेन की उप विदेश मंत्री एमिने जापारोवा भारत दौरे पर आईं. युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार कोई यूक्रेनियन लीडर भारत पहुंचा था. जापारोवा अपने साथ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक खत भी लाई थी। यूक्रेन को लगता है कि भारत ही एक ऐसा देश है, जो दुनिया में शांति स्थापित कर सकता है। जेलेंस्की की उम्मीदें भारत पर टिकी हैं। वे बार-बार दोस्ती का पैगाम भेज रहे हैं। इसका कारण है भारत की मजबूत कूटनीति। जेलेंस्की ही नहीं, अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश भी यही कहता है कि अगर यूक्रेन और रूस का युद्ध कोई बंद करवा सकता है तो वह केवल भारत ही है। यह भारत ही था, जिसने प्रेसिडेंट पुतिन के सामने युद्ध खत्म करने की बात कह डाली थी।
रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत न्यूट्रल
इसको भारत के प्रति विश्वास कहें या फिर हमारी कूटनीति। रूस को भी यही लगता है कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध को शांत कराने में बड़ा रोल निभा सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत न्यूट्रल है। उसने कई मौकों पर खुद को किसी भी तरफ से बोलने पर रोका है, लेकिन भारत ने यूक्रेन को मानवीय मदद की है। रूस भारत का बहुत पुराना दोस्त है। यह दोस्ती तब की है, जब अमेरिका भी भारत को आंख दिखाता था। भारत एहसानफरामोश देश नहीं है। इसकी फितरत में खुद्दारी और वफादारी कूट-कूट कर भरी है.
यूक्रेन भारत का दोस्त बनना चाहता है- जापारोवा
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में रूस के खिलाफ वोटिंग नहीं की। वह रूस से तेल भी खरीदता रहा। आज यूक्रेन को भारत की जरूरत है। उनकी उप विदेश मंत्री 5,235 किलोमीटर की यात्रा कर मानवीय सहायता की मांग करने आईं। भारत ने भी तुरंत उनकी मदद का आश्वासन दिया। केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने बिना देर किए बड़ा दिल दिखाया और जल्द मदद भेजने का आश्वासन दे दिया।
यूक्रेन का इशारा किस ओर
यूक्रेन की उप विदेश मंत्री एमिने जापारोवा ने बार-बार कहा कि यूक्रेन भारत का दोस्त बनना चाहता है। आखिरकार इसके पीछे की वजह क्या है? उन्होंने कहा कि इस वक्त सच्चा विश्वगुरु वही है, जो यूक्रेन की मदद करे। बातों ही बातों में वह यह भी बता गईं कि भारत को अपने असली दुश्मनों को पहचानना होगा।
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