फिर से बसाया तो जा सकता है जोशीमठ लेकिन..., भू अभियांत्रिकी तकनीक विशेषज्ञ अनुराग कपूर से न्यूजठिकाना की विशेष बातचीत

<p>जोशीमठ में आई दरारें चिंता का विषय बनी हुई हैं और आमजन को वहां से स्थांतरित भी किया गया है। लेकिन, कई प्रश्न अब भी उठते हैं कि आखिर जोशीमठ में ऐसा हुआ क्यों, क्या वहां आई दरारों को भरा जा सकता है&nbsp;या फिर जोशीमठ को क्या फिर से बसा पाना संभव है, यदि है तो&nbsp;भविष्य में किस तरह के नुकसान की आशंका है। <em>न्यूजठिकाना डॉट कॉम&nbsp;&nbsp;</em>ने ऐसे ही प्रश्नों के उत्तर&nbsp;तलाशने के लिए <em>भू अभियांत्रिकी&nbsp;तकनीक के दुनिया के सुप्रसिद्ध विशेषज्ञ अनुराग कपूर&nbsp;</em> से विशेष बातचीत की। अनुराग कपूर भू अभियांत्रिकी तकनीक को लेकर 30 वर्षों से&nbsp;शोध से करते हैं या उनसे संबद्ध रहे हैं। वे&nbsp;Geotechnical Engineering Consultancy करते रहे हैं और&nbsp;<a href="http://GeotechnicalTipsAnuragKapoor79">http://GeotechnicalTipsAnuragKapoor79</a> नाम से यूट्यूब चैनल भी संचालित करते हैं।&nbsp;</p>

फिर से बसाया तो जा सकता है जोशीमठ लेकिन..., भू अभियांत्रिकी तकनीक विशेषज्ञ अनुराग कपूर से न्यूजठिकाना की विशेष बातचीत
18-01-2023 - 12:12 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

न्यूज ठिकाना से बातचीत में अनुराग कपूर ने बताया कि जोशीमठ लंबे समय में भूकंप और भूस्खलन के बाद मिट्टी के जमाव पर यहां निर्माण शुरू हुए। इस तरह यहां हुए निर्माणों की नींव कमजोर ही रही है। यही वजह रही है कि वहां के के निर्माण कार्यों में दरारें देखने को मिल रही हैं। देखिये उन्होंने क्या बताया..

दरारों को भरने के लिए अनुराग कपूर ने बताया कि सड़कों की दरारों को भरना तो फिर भी सरल है लेकिन मकानों की चौड़ी दरारों के भर पाना काफी कठिन है। ऐसा कर भी दिया जाये तो भविष्य के लिहाज से यह असुरक्षित ही होगा। 

 

 

 

 

क्या इन दरारों के बारे में पहले कभी चेतावनी दी गई थी, इस प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि 1886 में एटकिंस ने इसके बारे में सबसे पहले चेताया था। इसके बाद एमसी मिश्रा कमेटी ने 1976 में भी चेताया था। लेकिन, दुर्भाग्य से हमने इन चेतावनियों को अनुसुना कर दिया। 

 

 

 

 

अनुराग कपूर ने यह भी न्यूजठिकाना को बताया कि आज के समय में तकनीक काफी  विकसित हो गई है और इसीलिए कह सकते हैं कि जोशीमठ को फिर से बसाया जा सकता है। सुनिये वो क्या कह रहे हैं इस बारे में ..

 

 

 

 

कपूर ने यह भी कहा है कि नई तकनीक से निर्माण तो हो सकता है लेकिन फिलहाल ऐसा करना ठीक नहीं होगा। इसके लिए पहले वहां की स्थितियों का संपूर्ण अध्ययन कर लिया जाए, उसके बाद ही वहां किसी किस्म का निर्माण कार्य संभव हो सकता है। किसी भी किस्म की जल्दबाजी और बिना तकनीकी जानकारी के निर्माण कार्य उचित नहीं है।

 

 

 

 

 

 

 

 

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