एलएसी पर सैनिकों के लिए बन रहे मॉड्यूलर शेल्टर जो अंदर शून्य से 20 डिग्री तापमान में भी वातावरण को गर्म रखेंगे
<p><em><strong>वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैनिकों की तैनाती हमेशा से ही कठिन रहती है और सर्दियों मे विशेषतौर पर बर्फबारी होती है तो वहां तैनात सैनिकों के लिए परेशानियां और बढ़ जाती हैं। यद्यपि सैनिक एलएसी पर पहले भी तैनात रहा करते थे लेकिन जब से गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साझ झड़प हुई तब से सैनिकों की संख्या वहां बढ़ा दी गई है। लेकिन, इसके साथ ही वहां पर सैनिकों की परेशानी को कम करने के लिए नये शेल्टर होम बनाये गये हैं।</strong></em></p>
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अब एलएसी पर 22 हजार भारतीय सैनिकों के रहने के लिए नये शेल्टर बनाए गए हैं। ये शेल्टर मॉड्यूलर हैं और इन्हें जरूरत पड़ने पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर सरलता से ले जाया जा सकता है। अधिकारी के अनुसार एलएसी पर स्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहती और सैनिकों की तैनाती भी उसी हिसाब से बदलती रहती है इसलिए शेल्टर भी ऐसे बनाए गए हैं जो सरलता से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाये जा सकें।
ये शेल्टर 15 हजार फीट, 16 हजार फीट और 18 हजार फीट की ऊंचाई पर हैं। सैनिकों को यहां लगातार रहना है इसलिए शेल्टर का ढांचा इस तरह का बनाया गया है ताकि अंदर का तापमान नियंत्रित रहे। हाई एल्टीट्यूट में तापमान शून्य से 20 डिग्री तक नीचे भी चला जाता है और ऐसे में सैनिक वहां रहकर सक्रिय रह सकें, इसके इंतजाम के तहत ये शेल्टर तैयार किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि भारतीय सेना ने बड़ी संख्या में सोलर फ्यूल सेल खरीदे हैं और बड़ी संख्या में फ्यूल सेल आने हैं। सेना अभी 3 किलोवॉट और पांच किलोवॉट के जनरेटर के बराबर की क्षमता वाले फ्यूल सेल भी ले रही है। इसके अलावा हाईएल्टीट्यूट क्षेत्र में पेयजल उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती होती है। सेना के अधिकारी ने बताया कि ईस्टर्न लद्दाख में हाई एल्टीट्यूट एरिया में पॉन्ड यानी तालाब बनाये हैं। ये 20 हजार किलोलीटर से लेकर 27 हजार किलोलीटर तक के तालाब हैं। यहां पानी की ऊपरी सतह बर्फ बन जाती है लेकिन नीचे पानी रहता है। नीचे वाले पानी को पंप के जरिये खींचकर सर्दियों भर भी सैनिकों को ताजा पानी उपलब्ध कराया है। इसके साथ ही सैनिकों के उपकरण रखने के लिए भी कई नये शेल्टर बने हैं।
भारतीय सेना की इंजीनियरिंग कोर ईस्टर्न लद्दाख में सैनिकों के लिए शेल्टर बनाने के लिए थ्री डी प्रिटिंग तकनीक का भी इस्तेमाल कर रही है। इसके ट्रायल पाकिस्तान सीमा में रेतीली जगहों पर सफल रहे और अब इन्हें चीन बॉर्डर पर भी इस्तेमाल किया जा रहा है। थ्री डी प्रिटिंग से बने शेल्टर 100 मीटर की दूरी से टी-90 टैंक के हमले को झेल सकते हैं। यह तैयार भी जल्दी हो जाते हैं।
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