राजस्थान- मध्य प्रदेश में जमकर बंटी फ्रीबीज... सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, मिली ये नसीहत

<p><em><strong>मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत 5 राज्यों में नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। एमपी और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों ने हाल ही में जमकर लोक लुभावन घोषणाएं की हैं।</strong></em></p>

राजस्थान- मध्य प्रदेश में जमकर बंटी फ्रीबीज... सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, मिली ये नसीहत
07-10-2023 - 10:55 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर को फ्रीबीज मुद्दे (चुनाव से पहले की जाने वाली घोषणाओं) पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि हाईकोर्ट में याचिका क्यों नहीं लगाई? शीर्ष कोर्ट ने याचिकाकर्ता को ये भी निर्देश दिया कि पार्टियों को दिए मेमो में मध्य प्रदेश के चीफ मिनिस्टर ऑफिस के नाम की जगह राज्य सरकार लिखें। साथ ही राज्य सरकार को मुख्य सचिव के जरिए रिप्रजेंट करें। फ्रीबीज मुद्दे पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच सुनवाई कर रही है।
हर बार सरकार घोषणाएं करती है, इससे टैक्सपेयर्स पर बोझ- याचिकाकर्ता
फ्रीबीज मुद्दे पर अश्विनी उपाध्याय ने याचिका दायर की है। कोर्ट में उनकी तरफ से वरिंदर कुमार शर्मा पेश हुए। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले सरकार का लोगों को पैसे बांटना प्रताड़ित करने जैसा है। यह हर बार होता है और भार टैक्स चुकाने वाली जनता पर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी याचिका में भट्टूलाल जैन की याचिका को भी शामिल करने को कहा है।
केंद्र और दो राज्य सरकारों को नोटिस
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अदालत ने इनसे 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने नई जनहित याचिका को पहले से चल रही अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है। सभी मामलों की सुनवाई अब एकसाथ होगी।
केंद्र सरकार ने भी जताई सहमति
जनवरी 2022 में अश्विनी उपाध्याय फ्रीबीज के खिलाफ एक जनहित याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। अपनी याचिका में उपाध्याय ने चुनावों के दौरान राजनीतिक पार्टियों के वोटर्स से फ्रीबीज या मुफ्त उपहार के वादों पर रोक लगाने की अपील की। इसमें मांग की गई है कि चुनाव आयोग को ऐसी पार्टियां की मान्यता रद्द करनी चाहिए। केंद्र सरकार ने अश्विनी से सहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट से फ्रीबीज की परिभाषा तय करने की अपील की। केंद्र ने कहा कि अगर फ्रीबीज का बंटना जारी रहा तो ये देश को ‘भविष्य की आर्थिक आपदा’ की ओर ले जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में अब तक क्या-क्या हुआ?
फ्रीबीज मामले की सुनवाई पूर्व चीफ जस्टिस एनवी रमना की अगुआई में तीन सदस्यीय बेंच ने अगस्त 2022 में शुरू की थी। इस बेंच में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस हिमा कोहली भी थे।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।