गैर-जिम्मेदाराना बचकानी जिज्ञासा ... गुजरात हाईकोर्ट ने किया पीएम मोदी की डिग्री सार्वजनिक करने वाले निर्देश को खारिज ; दिल्ली सीएम पर 25 हजार का जुर्माना
<p><em>गुजरात हाईकोर्ट से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को झटका लगा है। हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने सीआईसी (Central Information Commission) के उस आदेश को भी खारिज कर दिया है जिसमें गुजरात विश्वविद्यालय को पीएम नरेंद्र मोदी की MA डिग्री के बारे में जानकारी केजरीवाल को देने का निर्देश दिया गया था</em></p> <p><strong><em><a href="https://www.newsthikana.com/post/fierce-fire-in-kanpur-s-biggest-cloth-market-hamraj-complex-update--rv30133">Kanpur Fire : कानपुर के सबसे बड़े कपडा बाजार हमराज कॉम्पलेक्स में भीषण आग, 700 से अधिक दुकानें जलकर राख</a></em></strong></p> <p><strong><em><a href="https://www.newsthikana.com/post/rain-alert-issued-in-many-districts-of-rajasthan-hail-fell-at-some-places-rv5709">मौसम अपडेट : राजस्थान के कुछ स्थानों पर गिरे ओले ; कई जिलों में बारिश जारी;</a></em></strong></p>
गुजरात हाईकोर्ट ने आरटीआई के तहत पीएम नरेंद्र मोदी का डिग्री प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के सीआईसी (Central Information Commission) के आदेश को खारिज कर दिया है। सीआईसी ने 2016 में गुजरात विश्वविद्यालय को पीएम नरेंद्र मोदी की MA डिग्री के बारे में जानकारी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पेश करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने केजरीवाल को आदेश दिया है कि वे 25 हजार रुपए जुर्माना गुजरात राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करें।कोर्ट ने फैसले पर स्टे देने से भी इनकार कर दिया।
सीईसी के आदेश को किया रद्द
बता दें कि मुख्य सूचना आयोग (CEC) ने पीएमओ के जन सूचना अधिकारी (PIO) और गुजरात विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के पीआईओ को प्रधानमंत्री मोदी की स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री दिखाने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने याचिका दाखिल कर डिग्री दिखाने की मांग की थी।
डिग्री दिखाने की ज़रूरत नहीं
जिस पर 31 मार्च को गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिग्री और स्नातकोत्तर डिग्री प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है।
क्या क्या हुआ सुनवाई में
मामले की सुनवाई के दरमियान गुजरात यूनिवर्सिटी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि आरटीआई एक्ट का "स्कोर सेटर करने के लिए और विरोधियों पर बचकाना प्रहार करने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है"।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा ,'आप एक अजनबी हैं, हालांकि उच्च पदस्थ हैं (अरविंद केजरीवाल का जिक्र करते हुए) ... वह जिज्ञासा से कह सकते हैं कि मैं अपनी डिग्री दूंगा लेकिन आप (प्रधानमंत्री) भी अपनी डिग्री दिखाइए... यह बहुत बचकाना है ... किसी की गैर-जिम्मेदाराना बचकानी जिज्ञासा को जनहित नहीं कहा जा सकता।"
आरटीआई एक्ट की धारा 8 (1) (जे) का उल्लेख करते हुए मेहता ने तर्क दिया कि ऐसी जानकारी जो व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित है, जिसके प्रकटीकरण का किसी सार्वजनिक गतिविधि या हित से कोई संबंध नहीं है, का खुलासा नहीं किया जा सकता है, जब तक कि कोई ओवरराइडिंग पब्लिक इंटरेस्ट न हो।
कई बार उठा चुके हैं डिग्री वाला मुद्दा
बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कई बार पीएम मोदी की डिग्री का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने कई बार उनकी डिग्री को सार्वजनिक रूप से दिखाने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में विधानसभा में पूछा था कि देश के प्रधानमंत्री कितना पढ़े हैं।
उल्लेखनीय है कि संबंधित पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद नौ फरवरी को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।
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