सितंबर में पाकिस्तान लौटेंगे नवाज शरीफ: पीएम शाहबाज बोले- पार्टी जीती तो नवाज ही बनेंगे प्रधानमंत्री
<p><em><strong>पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ सितंबर में लंदन से इस्लामाबाद लौट आएंगे। अगले चुनाव में वो ही पार्टी का नेतृत्व करेंगे और जीत मिलने पर प्रधानमंत्री भी बनेंगे। पाक पीएम शाहबाज शरीफ ने गुरुवार को एक इंटरव्यू के दौरान इस बात की पुष्टि की।</strong></em></p>
पाक पीएम शाहबाज शरीफ ने कहा है कि चुनाव से जुड़े सारे कैंपेन और प्लानिंग नवाज के हिसाब से ही होगी और वहीं पार्टी लीड करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवाज पाकिस्तान के चीफ जस्टिस के रिटायर होने का इंतजार कर रहे हैं। जस्टिस बंदियाल 17 सितंबर को रिटायर हो रहे हैं। इसके बाद नवाज पाकिस्तान लौटेंगे, जहां उन्हें पनामा पेपर लीक केस में राहत मिलने की उम्मीद है।
शाहबाज ने कहा था- चुनाव जीते तो बच्चों को लैपटॉप देंगे
इससे पहले लाहौर में एक प्रोग्राम के दौरान पीएम शाहबाज ने कहा था- नवाज की लीडरशिप में हम पाकिस्तान के लाखों बच्चों को लैपटॉप देंगे, ताकि वो मॉडर्न तालीम हासिल कर सकें। इसके अलावा एग्रीकल्चर सेक्टर को बहुत तेजी से प्रमोट किया जाएगा। 2017 में मुल्क बिल्कुल सही रास्ते पर था, लेकिन उस वक्त नवाज को सत्ता से बेदखल कर दिया गया। यह साजिश उस वक्त के चीफ जस्टिस ऑफ पाकिस्तान साकिब निसार ने रची थी।
3 दिन पहले भंग हुई पाकिस्तान की संसद
कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान की संसद यानी नेशनल असेंबली कार्यकाल खत्म होने से 3 दिन पहले भंग कर दी गई थी। इसके बाद से केयरटेकर पीएम को लेकर बैठक जारी हैं। शाहबाज शरीफ और विपक्ष के नेता राजा रियाज केयरटेकर पीएम का नाम तय करने के लिए चर्चा करेंगे। अगर इन दोनों में संसद भंग होने के 3 दिनों के भीतर सहमति नहीं बनी तो मामला संसदीय कमेटी के पास चला जाएगा। अगर यहां भी सहमति नहीं बनी तो इलेक्शन कमीशन फैसला करेगा। नेशनल असेंबली का टेन्योर 12 अगस्त तक था। इसे 3 दिन पहले 9 अगस्त को ही भंग कर दिया गया।
90 दिन में करवाना होगा चुनाव
पाकिस्तान का संविधान कहता है कि अगर टेन्योर खत्म होने के पहले असेंबली डिजॉल्व की जाती है तो इलेक्शन 90 दिन के अंदर कराए जाएं। अगर नेशनल असेंबली अगर तय वक्त (इस बार 12 अगस्त 2023) पर भंग की जाती है तो इलेक्शन 60 दिन के भीतर कराने पड़ते।
संसद ने आजीवन अयोग्यता वाला कानून बदला
2 महीने पहले पाकिस्तान में शाहबाज सरकार ने संसद ने ‘लाइफटाइम डिस्क्वॉलिफिकेशन’ को रद्द कर दिया था। नए कानून के तहत किसी भी सांसद को अब 5 साल से ज्यादा के लिए अयोग्य करार नहीं दिया जा सकेगा। इस फैसले का फायदा सीधे तौर पर नवाज शरीफ को मिलेगा।
पनामा पेपर्स मामले में मिली सजा
दरअसल, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में नवाज शरीफ को पनामा पेपर्स मामले में अयोग्य घोषित कर दिया था, जिसके बाद उन्हें किसी भी पार्टी में शामिल होने से रोक दिया गया था। लाहौर हाईकोर्ट ने 2019 में नवाज को इलाज कराने के लिए चार हफ्ते के लिए विदेश जाने की इजाजत दी थी। 19 नवंबर, 2019 को नवाज लंदन गए थे और तब से देश वापस नहीं लौटे हैं। कोर्ट ने 2018 में नवाज को अल-अजीजिया स्टील मिल्स भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई थी। वहीं एवनफील्ड प्रॉपर्टी मामले में उन्हें 11 साल की सजा सुनाई गई थी और 80 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया था। 16 नवंबर 2019 को लाहौर हाई कोर्ट ने नवाज की सजा सस्पेंड करते हुए उन्हें इलाज के लिए विदेश जाने की इजाजत दी। नवाज शरीफ अब तक 3 बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।
इस साल चुनाव बेहद मुश्किल
काउंसिल ऑफ कॉमन इंट्रेस्ट ने पिछले हफ्ते मीटिंग की थी। इसमें जनगणना 2023 को मंजूरी दी गई थी। अब इलेक्शन कमीशन ऑफ पाकिस्तान को इसी जनगणना के आधार पर नए चुनाव क्षेत्र (परिसीमन) बनाने हैं। इलेक्शन कमीशन कह चुका है कि उसे परिसीमन के लिए कम से कम 6 महीने चाहिए। इसके बाद ही वो राज्यों या फिर नेशनल असेंबली के इलेक्शन करा सकता है। जनगणना को चारों राज्य भी मंजूर कर चुके हैं। लिहाजा, परिसीमन के लिए 6 महीने दिए जाएंगे और अगले साल फरवरी या मार्च के पहले चुनाव हो सकते हैं।
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